भारत में समाज कार्य एक उभरते हुए व्यावसायिक पाठ्यक्रम के रूप में। - समाज कार्य शिक्षा

समाज कार्य शिक्षा

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Thursday, 30 July 2020

भारत में समाज कार्य एक उभरते हुए व्यावसायिक पाठ्यक्रम के रूप में।


भारत में समाज कार्य एक उभरते हुए व्यावसायिक पाठ्यक्रम के रूप में

समाज कार्य (Social Work) एक शैक्षिक एवं व्यावसायिक विधा है जो समाज कार्य की अपनी छः प्रणालियों के आधार पर सेवा प्रदान करता हैं। इन विधियों के द्वारा लोगों एवं समूहों के जीवन-स्तर को उन्नत बनाने का प्रयत्न करता है। सामाजिक कार्य का अर्थ है सेवार्थी की अनुमति के आधार पर आवश्यक हस्तक्षेप के माध्यम से व्यक्ति, समूह, समुदाय और उनके सामाजिक माहौल के बीच अन्तःक्रिया प्रोत्साहित करके सेवार्थी की क्षमताओं को बेहतर करना। ताकि वे अपनी ज़िंदगी की ज़रूरतें पूरी करते हुए अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें। इस प्रक्रिया में समाज कार्य सेवार्थी की आकांक्षाओं की पूर्ति करने और उन्हें अपने ही मूल्यों की कसौटी पर खरे उतरने में सहायक होता है। समाज कार्य में जिन्हें सेवा प्रदान किया जाता हैं,उन्हें सेवार्थी कहते है। जैसे चिकित्सा के क्षेत्र में चिकित्सक जिसे सेवा देता हैं वो उनके लिए मरीज होता है. ठीक उसी प्रकार समाज कार्य में सेवा लेने वाले को सेवार्थी कहा जाता हैं।

समाज कार्य वैयक्तिक, समूह अथवा समुदाय में व्यक्तियों की सहायता करने की एक प्रक्रिया है, जिससे सेवार्थी अपनी सहायता स्वयं कर सके। इसके माध्यम से सेवार्थी वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में उत्पन्न अपनी समस्याओं को स्वयं सुलझाने में सक्षम होता है। समाज कार्य सेवार्थी के जीवन के प्रत्येक पहलू तथा उसके पर्यावरण में क्रियाशील, प्रत्येक सामाजिक स्थिति से अवगत रहता है क्योंकि सेवा प्रदान करने की योजना बताते समय वह इनकी उपेक्षा नहीं कर सकता।

समाज कार्य एक बहुआयामी ज्ञान अनुशासन आधारित पाठ्यक्रम है। अर्थशास्त्र,राजनीती विज्ञान, मानवविज्ञान, मनोविज्ञान और समाजशास्त्र आदि अनुशासन से अधिकांश ज्ञान और इनके  सिद्धांतों से लिया गया है, लेकिन ये सभी विषय जहाँ मानव-समाज और मानव-संबंधों के सैद्धांतिक पक्ष का अध्ययन करता है, वहीं समाज-कार्य इन संबंधों में आने वाले अंतरों एवं सामाजिक परिवर्तन के कारणों की खोज जमीनी स्तर पर करने के साथ-साथ व्यक्ति के मनोसामाजिक पक्ष का भी अध्ययन और उन समस्याओं का समाधान भी करता है। समाज कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्त्ता का आचरण एक विद्वान साथ-साथ समस्याओं में हस्तक्षेप के ज़रिये व्यक्तियों, परिवारों, छोटे समूहों या समुदायों के साथ संबंध स्थापित करने की तरफ़ उन्मुख होता है। इसके लिए समाज कार्य अनुशासन पूर्ण रूप से प्रशिक्षित और व्यावसायिक कार्यकर्ता तैयार करता है।

भारत के शैक्षणिक संस्थानों में समाज कार्य एक पाठ्यक्रम के रूप में

भारत में 1936 के पहले समाज कार्य को एक ऐच्छिक क्रिया समझा जाता था। 1936 में पहली बार समाज कार्य की व्‍यावसायिक शिक्षा के लिए एक संस्‍था सर दोराबजी टाटा ग्रेजुएट स्‍कूल आफ सोशल वर्कके नाम से स्‍थापित हुई। इस समय इस बात की स्‍वीकृति भारत में हो चुकी थी। कि समाज कार्य करने के लिये औपचारिक शिक्षा अनिवार्य थी। बाद में इस विद्यालय का नाम टाटा इन्‍स्‍टीट्यूट आफ़ सोशल साइन्‍सहो गया और अब भी यह इसी नाम से प्रसिद्ध है। दिल्ली  विश्वविद्यालय में 1946 में स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क की स्थापना की गयी। भारत में स्वतंत्रता के बाद काशी विद्यापीठ, लखनऊ विश्वविद्यालय, गुजरात विश्वविद्यालय आदि ने समाज कार्य के विभिन्न डिप्लोमा आधारित पाठ्यक्रम शुरू कर दिए थे। 1954 में समाज कार्य कार्य का स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम मद्रास स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क के द्वारा शुरू किया गया। भारत में समाज कार्य की सैद्धान्तिक पृष्‍ठभूमि प्राचीन है,किन्‍तु समाज कार्य के वैज्ञानिक स्‍वरूप का विकास काफी विलंब में हुआ।


वर्तमान में समाज कार्य अनुशासन के विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रम

12वीं के बाद से ही स्नातक स्तर से समाज कार्य अनुशासन की पढाई शुरू की जा सकती है। भारत के कई केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय और नीजी विश्वविद्यालय बैचलर ऑफ़ सोशल वर्क पाठ्यक्रम संचालित कर रहे। यह पाठ्यक्रम साधारणतः सामान्य स्नातक पाठ्यक्रम की तरह तीन वर्ष का है। समाज कार्य अनुशासन की पढाई लगभग भारत के सभी विश्वविद्यालय में अंग्रेजी में करायी जाती हैं। लेकिन अगर आप हिंदी माध्यम से समाज कार्य अनुशासन की पढाई करना चाहते है, तो महाराष्ट्र राज्य स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय समाज कार्य अनुशासन के सभी पाठ्यक्रम बैचलर ऑफ़ सोशल वर्क, मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क, एम.फिल. सोशल वर्क, पीएच.डी. सोशल वर्क हिंदी भाषा में संचालित कर रहा हैं। वहीं अगर आप दूर शिक्षा मतलब डिस्टेंस मोड में घर बैठे समाज कार्य के विभिन्न पाठ्यक्रम की पढाई करना चाहते हैं,तो इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय समाज कार्य के स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर हिंदी और अंग्रेजी भाषा में पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं।

उच्च शिक्षा जगत में समाज कार्य अनुशासन के स्नातक, स्नातकोत्तर और एम.फिल., पीएच.डी. आदि की उपाधि के पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। समाज कार्य अनुशासन के स्नातक आधारित पाठ्यक्रम को बैचलर ऑफ़ सोशल वर्क, स्नातकोत्तर आधारित पाठ्यक्रम को मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क और कई विश्वविद्यालय डिप्लोमा आधारित पाठ्यक्रम भी संचालित करते हैं। जिन्हें एनजीओ मैनेजमेंट, रूरल देवेलोप्मेंट, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट के नाम से भी जाना जाता हैं। स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर चिकित्सा जगत की तरह यहाँ भी कई शाखा हैं, जैसे कम्युनिटी देवेलोप्मेंट, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, सायकेट्रिक सोशल वर्क, रूरल देवेलोप्मेंट आदि। इन शाखाओं के चयन के आधार पर आप आकादमिक क्षेत्र और जमीनी स्तर पर स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। तथा स्वयं के संस्था आदि की भी स्थापना कर कई को रोजगार प्रदान कर सकते हैं।


समाज कार्य पाठ्यक्रम के आधार पर रोजगार की असीम संभावनाएं

भारत में आजादी के बाद से राज्य के सभी कल्याणकारी कार्यक्रमों के पश्चात जिस क्षेत्र के आकार-प्रकार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, वह है स्वैच्छिक क्षेत्र। जबकि सरकारी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर दिन-प्रतिदिन सिमटते जा रहे हैं। स्वैच्छिक क्षेत्र में रोजगार के अवसर कई गुना बढ़ते जा रहे हैं। समाज कार्य के क्षेत्रों में न केवल गैर सरकारी संगठन सक्रिय हुए हैं बल्कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट हाउस भी स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबी, आपदा और कल्याण आदि कार्य में सीधे प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे अनगिनत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ हैं, जो बड़ी संख्या में सामाजिक कल्याण,सेवा और सुरक्षा के कार्यक्रमों को प्रायोजित कर रही हैं।

विकास की इस तेज रफ्तार के साथ व्यावसायिक समाज कार्य एक ऐसे क्षेत्र के रूप में उभरा है, जिसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। यद्यपि भारत में समाज कार्य का व्यवसाय इतना चर्चित नहीं है। लेकिन अमेरिका, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, कोरिया, चीन या कहे पश्चिम के लगभग सारे देश में समाज कार्य एक बहुत ही प्रतिष्ठित व्यवसाय के रूप में मान्यता प्राप्त कर चूका है। लेकिन भारत में आज भी समाज कार्य एक तरफ से संघर्ष की स्थिति में ही हैं, अभी समाज के द्वारा इतनी मान्यता प्राप्त नहीं हुई हैं। इसके पीछे कई कारण हैं, लोगों में समाज कार्य को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां हैं। क्योकिं भारत एक परोपकारी और कल्याणकारी राज्य हैं, और यहां दान,किसी असहाय की सेवा,सुरक्षा और कल्याण आदि एक भावनात्मक लगाव और आत्म संसुष्टि के लिए किया जाता हैं। और इन्हीं कार्यों को व्यावसायिक समाज कार्य लोगों ने समझ लिया हैं। जिस कारण से वास्तविक में समाज कार्य क्या हैं? और किन मूल्यों और उद्देश्यों को लेकर व्यावसायिक समाज कार्य अपने गतिविधि आदि को आयोजित करता हैं। लोगों तक नहीं पहुँच पा रहा हैं। व्यावसायिक समाज कार्य दान और किसी असहाय की सहायता तक सिमित नहीं हैं,अपितु ये तो हमारा कार्य ही नहीं हैं। समाज कार्य शिक्षा के आधार पर नीति निर्माण करना है, समाज के उत्थान और चौमुखी विकास के लिए योजना बनाना और उसे जमीनी स्तर पर लागू करना, मनोसामाजिक समस्याओं का समाधान करना, परामर्श प्रदान करना, बेरोजगारी, अशिक्षा, गरीबी और कल्याण के लिए परियोजना निर्माण करना, समय-समय पर सर्वेक्षण आदि आयोजित करना, ग्रामीण, शहरी और जनजातीय विकास के लिए कार्य करना, बाल कल्याण, युवा कल्याण, वृद्ध कल्याण, तृतीय लिंग कल्याण, महिला कल्याण और दिव्यांग कल्याण के लिए कार्य करना, अति पिछड़ा कल्याण, अनुसूचित जाति कल्याण, अनुसूचित जनजाति कल्याण के लिए कार्य करना आदि। इस तरह के और भी कई ऐसे कार्य, गतिविधि और कार्यक्रम जमीनी स्तर पर समाज कल्याण प्रशासन के माध्यम से सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर आयोजित करते हैं।

अकादमिक क्षेत्र में आचार्य, परियोजना निदेशक, क्षेत्र कार्य पर्यवेक्षक और किसी परियोजना में अनुसंधानकर्ता के रूप में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी नौकरी के भी कई अवसर समाज कार्य के स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा के विद्यार्थियों के लिए मौजूद हैं। जैसे समाज कल्याण प्रशासन विभाग में कई पद होते हैं। इसके अलावा और भी अन्य कई पद सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में होते हैं। जैसे परियोजना निदेशक, कार्यक्रम निदेशक, कार्यक्रम अधिकारी, कार्यक्रम समन्वयकर्ता, सहायक समन्वयकर्ता, कार्यक्रम सहायक, परियोजना अधिकारी, कम्यूनिटी मोबिलाइजर, कार्यक्रम प्रबंधक, ब्लॉक/जिला/राज्य/जोनल/क्षेत्रीय समन्वयकर्ता, सलाहकार, समाज-वैज्ञानिक, निगरानी एवं मूल्यांकन अधिकारी, अनुसंधान अधिकारी/अनुसंधानकर्ता, क्षेत्र प्रबंधक, क्षेत्र कार्य प्रबंधक, फंड रेजर, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक, संसाधन मोबिलाइजर, प्रशिक्षण समन्वयकर्ता, मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यालय सामाजिक कार्यकर्ता, सलाहकार आदि।

उद्योग और कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी के कारण कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी समाज कार्य के विद्यार्थियों और अनुसंधानकर्ताओं के लिए रोजगार के प्रतिष्ठित पद प्राप्त करने के दरवाजे खुले हैं। कुछ महत्वपूर्ण पद उदाहरण के रूप में निम्नलिखित हैं। प्रबंधक, (मानव संसाधन/ कल्याण आदि) कार्यपालक प्रशिक्षणार्थी, श्रमिक कल्याण अधिकारी, कार्यपालक प्रशिक्षणार्थी, सामुदायिक विकास अधिकारी, सामाजिक विकास अधिकारी, ग्रामीण विकास अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी आदि।

समाज कार्य विषय से शिक्षण के आधार पर स्वयं से भी आप गैर सरकारी संगठन स्थापित कर सकते हैं। और समाज के वंचित, गरीब, असहाय जन को सेवा प्रदान कर खुद और अन्य कई को रोजगार प्रदान कर  सकते हैं। अशिक्षा, मानवाधिकार, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के क्षेत्र में भी संगठन स्थापित कर राष्ट्र के उत्थान और विकास का कार्य कर सकते हैं। अन्य और भी ऐसे सभी क्षेत्र जिनसे मानवीय मूल्यों की अवहेलना होती हो या समाज के लिए अवरोधक तत्व हो। उस क्षेत्र में सामाजिक कार्यकर्ता विभिन्न प्रकार के संगठन स्थापित कर कार्य कर सकता हैं। कोई संगठन की स्थापना स्थानीय,राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर स्थापित करने का प्रावधान हैं।


कुशल व्यावसायिक सामाजिक कार्यकर्ता बनने के लिए महत्वपूर्ण कौशल,तकनीक और निपुणता

समाज कार्य शिक्षा प्राप्त करने के बाद आपके लिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर तब ही मिलेंगे। जब आप डिग्री के साथ-साथ समाजिक कार्यकर्ता होने के अपेक्षित कौशल, तकनीक, और निपुणता को आत्मसाध कर पाएंगे। क्योकिं समाज कार्य एक व्यवहारिक पाठ्यक्रम हैं। यहां समाज ही प्रयोगशाला हैं और कार्यक्षेत्र भी।

समाज कार्य के क्षेत्र में रोजगार के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण कौशल,तकनीक और निपुणता का होना अति आवश्यक हैं।

परियोजना प्रस्ताव तैयार करना।

प्रबंधन सूचना प्रणाली (एम.आई.एस) बनाना।

परियोजना कार्यान्वयन योजना (पी.आई.पी.) बनाना।

जिला/राज्य/राष्ट्रीय स्तर पर परियोजना प्रबंधन और समन्वय।

कार्यक्रम निगरानी एवं मूल्यांकन करना।

रिपोर्ट लेखन एवं मूल्यांकन प्रस्तुति करना।

मासिक योजना तथा बजट बनाना।

जिला एवं राज्य प्रशासन, अन्य स्टेक होल्डरों तथा सहभागी संगठनों के साथ समन्वय तथा सम्पर्क करना।

प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित करना।

सूचना शैक्षिक संचार (आई.ई.सी.) सामग्री का विकास करना।

प्रलेखन एवं केस अध्ययन करना।

समूह प्रबंधन।

व्यापक दौरे करना।

राज्य तथा जिला स्तर पर परियोजनाओं का प्रबंधन एवं समन्वय करना।

सकारात्मक कार्य अभिवृत्ति।

सत्यनिष्ठा एवं ईमानदारी।

प्रतिकूल स्थिति में अधिक घंटों तक क्षेत्रगत कार्य करना।

अंतर-वैयक्तिक अभिव्यक्ति कौशल।

कंप्यूटर में दक्षता।

सामुदायिक संसाधनों का ज्ञान।


समाज कार्य अनुशासन के विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित करने वाले प्रमुख विश्वविद्यालय/कॉलेज/महाविद्यालय और नामांकन प्रक्रिया

भारत के लगभग सभी विश्वविद्यालय में समाज कार्य के किसी भी पाठ्यक्रम में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर नामांकन दिया जाता हैं। कहीं-कहीं बिना प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार के मेरिट के आधार पर भी नामांकन दिया जाता है। सभी विश्वविद्यालय के ऑफिसियल वेबसाइट पर नामांकन की सूचना प्रकाशित की जाती हैं। उसके आधार पर नामांकन फॉर्म भरकर नामांकन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। भारत में समाज कार्य अनुशासन से संबंधित निम्नलिखित प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/कॉलेज/महाविद्यालय –

·        दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली (भारत)

·        टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज, मुंबई (महाराष्ट्र)

·        इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी

·        जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली (भारत)

·        काशी विद्यापीठ, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

·        बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

·        देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर (मध्य प्रदेश)

·        राजागिरी कॉलेज ऑफ़ सोशल साइंसेज, कोची (केरल)

·        मद्रास स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क, चेन्नई (तमिल नाडू)

·        लोयला कॉलेज, चेन्नई (तमिल नाडू)

·        अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)

·        क्रिस्तु जयंती कॉलेज, बेंगलुरु (कर्नाटक)

·        एमिटी यूनिवर्सिटी

·        विश्व भारती विश्वविद्यालय, शांति निकेतन (पश्चिम बंगाल)

·        स्टेला मारिस कॉलेज, चेन्नई (तमिल नाडू)

·        गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद (गुजरात)

·        असम विश्वविद्यालय, सिलचर (असम)

·        उदयपुर स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क, उदयपुर (राजस्थान)

·        इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल सर्विस, मंग्लोर (कर्नाटक)

·        कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

·        लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

·        नागपुर विश्वविद्यालय (नागपुर)

·        एम.एस. विश्वविद्यालय, बड़ौदा (गुजरात)

·        महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र)


आज इस आधुनिक युग में समाज कल्याण,सेवा के कार्यों को करते हुए एक अच्छा-खासा करियर बनाया जा सकता है। इस क्षेत्र से जुड़ कर आप समाज कार्य के माध्यम से समाज सेवा करते हुए जीविका उपार्जन कर सकते हैं। बदलते समय और भाग-दौड़ भरी जिंदगी में अकेलापन, मनोसामाजिक समस्याएं और सामाजिक जरूरतों के कारण आज  समाज कार्य एक प्रतिष्ठित व्यवसाय के रूप में उभर कर सामने आया है। अगर आप सामाजिक न्याय,कल्याण,सुरक्षा,सेवा या समाज के उपेक्षित वर्ग को मुख्यधारा में शामिल करने, दलित, वंचित लोगों के जीवन स्तर में उत्थान के प्रयास करने तथा समाज के प्रत्येक वर्ग के लोगों को उनकी क्षमताओं के अनुसार विकसित होने के लिए मार्ग प्रशस्त करने की सोच रखते है, तो यह क्षेत्र  आपके करियर के लिए उपयुक्त है। इस क्षेत्र से जुड़ कर सामाजिक कार्यकर्त्ता समाज निर्माण के साथ-साथ अपने सुनहरे कल का निर्माण करते हुए आत्मसंतुष्टि  महसूस करता है।

समय के साथ समाज कार्य का विस्तार भी तेजी से हो रहा है, इस क्षेत्र में भी अब अन्य क्षेत्रों के तरह कुशल व्यावसायिक सामाजिक कार्यकर्त्ता की जरूरत पड़ने लगी है। इसी कारणवश अब तमाम तरह के प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम अस्तित्व में आ गए हैं। साथ ही विभिन्न कार्यशाला,सेमिनार और संगोष्ठी का भी आयोजन विभिन्न विश्वविद्यालय और समाज कार्य से जुड़े संस्थान आयोजित करते हैं। जिससे कुशल व्यावसायिक सामाजिक कार्यकर्ता तैयार हो सकें और जमीनी स्तर और अकादमिक क्षेत्र में समाज कार्य के मूल्य,उद्देश्य,सिद्धांत और आचार संहिता के आधार पर उपयुक्त और समाज उपयोगी सेवा प्रदान कर सकें।

लेखक - गौरव कुमार

एम.एस.डब्लू. छात्र, महात्मा गाँधी फ्यूजी गुरूजी सामाजिक कार्य अध्ययन केंद्र,

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय,वर्धा (महाराष्ट्र)

      ईमेल – gkjamui01@gmail.com

सन्दर्भ -  

01. लेख - सामाजिक कार्य विभाग, असम (केन्द्रीय) विश्वविद्यालय

02. Web Duniya Hindi Article
03. Sarita Magazine

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