सामाजीकरण का अर्थ एवं परिभाषा - Meaning and definitions of socialization

 सामाजीकरण का अर्थ एवं परिभाषा - Meaning and definitions of socialization


सामाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने समाज की जीवन शैली सिखता है और समाज में समायोजन करता है। मनुष्य जिस समाज के बीच जन्म लेता है और रहता है उसे उस समाज की भाषा, रहन-सहन, खान-पान एवं आचरण की विधियाँ और रीति-रिवाज सीखने होते हैं। बिना उन्हें सीखे वह समाज में समायोजन नहीं कर सकता. उसका सदस्य नहीं बन सकता। वह यह सब कार्य एक दिन में नहीं सीख सकता यह सब सिखाने में उसे काफी समय लगता है। जन्म के कुछ दिन बाद वह अपने समाज की भाषा सीखने लगता है, रहन-सहन, खान-पान और आचरण की विधियाँ सीखने लगता है और जैसे-जैसे बड़ा होता है वैसे-वैसे समाज के रीति-रिवाज़ सिखहने लगता है और उसके अनुसार आचरण कर अपने समाज में समायोजन करता है।

प्रायः मनुष्य एक साथ अनेक समाजों का सदस्य होते हैं और उन्हें इनमें से किसी भी समाज में समायोजन करने के लिए उसकी भाषा और व्यवहार प्रतिमानों को सीखना होता है। इस पूरी प्रक्रिया को समाजीकरण कहते हैं। ड्रेवर महोदय ने इसे निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया है.


समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने सामाजिक पर्यावरण के साथ अनुकूलन करता है और इस प्रकार वह उस समाज का मान्य, सहयोगी और कुशल सदस्य बनता है।


परंतु इस परिभाषा में समाजीकरण की प्रक्रिया के परिणाम पर ही प्रकाश डाला गया है, उसके स्वरूप को स्पष्ट नहीं किया गया है। दूसरी बात यह है कि उसके परिणाम की सीमा भी बड़ी व्यापक बना दी गई है इसके द्वारा समाज का मान्य सहयोगी और कुशल सदस्य बनता है।

हरलॉक के अनुसार- “सामाजिक विकास का अभिप्राय है सामाजिक आशाओं के अनुकूल व्यवहार करने की योग्यता प्राप्त करना। हरलॉक ने समाजीकरण के संबंध में कहा है कि "यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति इस प्रकार का व्यवहार करता है जिससे कि वह उस समूह के अनुकूल अपना व्यवहार करता है जिसके साथ वह अपना आतमीकरण करता है जिससे कि सामाजिक समूह द्वारा वह एक सदस्य के रूप में स्वीकृत किया जा सके। 


हरलॉक के अनुसार समाजीकरण की प्रक्रिया में तीन उपक्रियाएँ सम्मिलित होती हैं


1 उचित व्यवहार करना- इसका अभिप्राय है बालक सामाजिक समूह द्वारा स्वीकृत व्यवहार करे और हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि सामाजिक समूह की “उचित व्यवहार" के संबंध में अपनी नियमवली होती है।


2 स्वीकृत सामाजिक प्रकार्यों को करना समाज द्वारा स्वीकृत प्रकार्यों को संपादित करने से अभिप्राय है व्यक्ति उन सभी कार्यों का सम्पादन करे जो उस विशेष स्थिति के साथ जुड़े हुए हैं जिसे वह समाज में रह कर प्राप्त करता है।"


3 सामाजिक अभिवृत्ति का विकास- इसका अभिप्राय है व्यक्ति में एकीकरण व सहयोग का भाव होना जिससे कि वह समाज के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित कर सके। रॉस के अनुसार "सामाजीकरण सहयोग करने वाले व्यक्तियों में हम भावना का विकास करती है और उनमें एक साथ कार्य करने की इच्छा तथा क्षमता की वृद्धि करती है।"


गसकिन एवं गसकिन के अनुसार- समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति व्यवहारों, मूल्यों एवं अपेक्षाओं को सीखता है

जिससे वह समाज में विशिष्ट प्रकार्यों को संपादित कर सके।" हैविग्रस्ट एवं न्यूगाटन के अनुसर समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बालक अपने समाज के स्वीकृत तरीकों को सिखाता है तथा इन तरीकों को अपने व्यक्तित्व का अभिन्न अंग बनाता है।


गिलिन और गिलिन के अनुसार समाजीकरण से हमारा तात्पर्य उस प्रक्रिया से है जिसके द्वारा व्यक्ति समूह में एक क्रियाशील सदस्य बनता है, समूह की कार्यविधियों से समन्वय स्थापित करता है, उसकी परम्पराओं का ध्यान रखता है और सामाजिक परिस्थितियों से अनुकूलन करके अपने साथियों के प्रति सहनशीलता की भावना को विकसित करता है।


 आगबर्न के अनुसार- "समाजीकरण एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति समूह के आदर्श नियमों के अनुसार व्यवहार करना सीखता है।"


ग्रीन के अनुसार- "समजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालक सांस्कृतिक विशेषताओं. आत्मपन और व्यक्तित्व को प्राप्त करता है। 


हार्टन एवं हट के अनुसार “समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपने समूह मे मानकों को आत्मसात कर लेता है जिससे उसके आत्म का विकास होता है जो उस व्यक्ति की अपनी विशेषता है।


एच. एम. जॉनसन के अनुसार "समाजीकरण एक प्रकार का सीखना है जो सीखने वाले को सामाजिक कार्य करने के योग्य बनता है"।


लुण्डबर्ग के अनुसार समाजीकरण अन्तः क्रियाओं की जटिल प्रक्रियाओं का नाम है जिसके द्वारा व्यक्ति सामाजिक समूहों एवं समुदायों में प्रभावी भाग लेने हेतु आदतों, चतुराइयों, विश्वासों एवं नियमों को सीखता है"।


स्टीवर्ट एवं ग्लिन के अनुसार- "समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति सामाजिक व्यवहारों को स्वीकार करता है और उनसे अनुकूलन करना सीखता है।


किंम्बाल यंग के मतानुसार समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में प्रवेश करता है तथा समाज के विभिन्न समूहों का सदस्य बनता है और जिसके द्वारा उसे समाज के मूल्यों तथा मानकों को स्वीकार करने की प्रेरणा प्राप्त होती है। बोगार्डस के शब्दों में - "समाजीकरण इकट्ठा मिलकर कार्य करने, समूह दायित्व की भावना विकसित होने तथा अन्य व्यक्तियों की कल्याणकारी आवश्यकताओं से मार्गदर्शन लेने की प्रक्रिया है।


उपरोक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि सामाजीकरण सांस्कृतिक विशेषताओं एवं समाजिक मूल्यों की सीख एक प्रक्रिया है। इसके द्वारा सांस्कृतिक विशेषताएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित होती हैं। इसके द्वारा व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास करता है एवं समाज का क्रियाशील सदस्य बनता है।