अनुसंधान प्ररचना के प्रकार - Types of Research Structure
अनुसंधान प्ररचना के प्रकार - Types of Research Structure
सामान्यत सभी अनुसंधानों का एक ही मूलभूत उद्देश्य होता है ज्ञान की प्राप्ति इस उद्देश्य की पूर्ति विभिन्न प्रकार से हो सकती है और उसी अनुसार अनुसंधान प्ररचना का रूप भी अलग-अलग हो सकता है।
सी. विलियम एमोर्य के अनुसार, "अनुसंधान प्ररचना को विभिन्न तरीकों में वर्गीकृत किया जा सकता है उनमें से कुछ निम्नलिखित है-
1. अन्वेषणात्मक बनाम औपचारिक
2. वैयक्तिक बनाम सांख्यिकीय
3. क्षेत्र बनाम प्रयोगशाला बनाम सिम्युलेशन।
4. एक बार बनाम दीर्घकालीन ।
5. अवलोकन बनाम सर्वे बनाम एक्स पोस्ट फैक्टो
6. वर्णात्मक बनाम आकस्मिक
अनुसंधान विषय क्षेत्रों में समग्र अध्ययन हेतु अन्वेषणात्मक अनुसंधान उपयुक्त होता है जहां पर विकसित समक सीमित होते हैं। अन्य अधिकाश अध्ययों में यह परियोजना की प्रथम अवस्था है और अनुसंधानकर्ता तथा अध्ययन के लक्ष्यानुसार प्रयोग की जाती है। अन्येपण का उद्देश्य परीक्षण स्थान पर परिकल्पनाओं का विकास करना है औपचारिक अध्ययन वे है जिनमें वास्तविक संरचना तथा विशिष्ट परिकल्पनाओं को एक साथ परीक्षण किया जाना है
या अनुसधान प्रश्नों का उत्तर दिया जाना है। व्याख्यात्मक अध्ययन वे है जिनका प्रयोग समय के साथ प्राकृतिक घटनाओं की व्याख्या में किया जाता है या समय का अनुपात का अनुमान लगाया जा सकता है जिनकी निश्चित विशेषताए होती है। आकस्मिक अध्ययन यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि एक चल का अन्यों पर क्या प्रभाव पड़ता है या क्यों निश्चित शर्तों या स्थितियां होती हैं।
चर्चिल का मत है कि 'अन्वेषण अनुसंधान में प्रमुख बल विचारों तथा अन्तर्दृष्टियों की खोज पर होता है। व्याख्यात्मक अनुसंधान विशेष रूप से मात्रा के निर्धारण से सबंधित होता है जिसमे कुछ घटित होता है या दो चलो के बीच संबंधों की मात्रा को निर्धारित किया जाता है। यह अध्ययन विशेष रूप से किसी प्रारम्भिक परिकल्पना द्वारा निर्देशित होता है और एक आकश्मिक अनुसंधान प्ररचना कारण एवं प्रभाव संबंध के निर्धारण से संबंधित होता है।
अकार एवं डे का मत है कि सभी अनुसंधान पद्धतियों को मोटे रूप में तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है अन्येपात्मक अनुसंधान, व्याख्यात्मक अनुसंधान तथा आकस्मिक अनुसंधान अन्येपात्मक अनुसंधान का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति समस्या की सामान्य प्रकृति, संभावित निर्णय विकल्पना तथा विचारणीय संगत चलो पर अन्तर्दृष्टि खोजना चाहता है। अनुसंधान प्रश्नों के मध्य प्राथमिकता स्थापित करने तथा अनुसंधान को आगे ले जाने में उत्पन्न व्यावहारिक समस्याओं को सीखने के मद्देनजर भी अन्येषात्मक अनुसंधान उपयोगी रहता है व्याख्यात्मक अनुसंधान का उद्देश्य विपणन वातावरण के बारे में व कुछ पहलुओं के बारे में निश्चित एवं शुद्ध वर्णन ज्ञात करना होता है जब यह प्रदर्शित करना आवश्यक होता है कि एक चल का अन्य चल पर प्रभाव होता है तो आकस्मिक अनुसंधान पद्धति का प्रयोग किया जाता है।
रोनाल्ड आर गिस्ट ने अनुसंधान प्ररचना को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया है
1. अनुसंधान प्ररचनाए, जो मुख्यतः गौण समको के द्वारा विकसित होती हैं। इसमें निम्न बातें सम्मिलित की जाती है
a) आंतरिक समक
b) बाह्य समक
2. अनुसंधान प्ररचना, जो मुख्यत प्राथमिक
(i) समकों से विकसित होती है। इसमें अप्राकित को सम्मिलित किया जाता है
(a) प्रत्यक्ष सर्वे
(b) अवलोकन सर्वे
(c) प्रयोगात्मक सर्वे- इसमें निम्न को सम्मिलित किया जाता है
(i) पूर्व प्रयोगात्मक पद्धति
(ii) तथ्यात्मक पद्धति
(iii) लेटिन स्कवाया डिजायन
(iv) क्षेत्र प्रयोग
(v) प्रयोगशाला परीक्षण
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