निवेश का अर्थ, प्रकृति और स्कोप - Meaning, Nature and scope of Investment

निवेश का अर्थ, प्रकृति और स्कोप - Meaning, Nature and scope of Investment


परिभाषा


( 1 ) हमारी बचत का ऐसा उपयोग जिससे इसमें वृद्धि होती है निवेश कहलाता है। जब हम किसी वित्तीय सम्पत्ति की खरीद इस उम्मीद से करते हैं कि भविष्य में हमें उससे लाभ मिलेगा, तो वह निवेश / इन्वेस्टमेंट (Investment) कहलाता है। निवेश करना यानी कि अपने पैसे या अन्य महत्वपूर्ण संसाधनो को भविष्य में लाभ प्राप्त करने की इच्छा से आवंटित करना।


( 2 ) निवेश एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पैसे के मूल्य को बढ़ाने का प्रयास किया जाता है अर्थात कुछ समय बाद आपको निवेश किये गए पैसे से अधिक पैसा मिलता है। दूसरे शब्दों में निवेश से तात्पर्य है अधिक पैसा कमाने के लिए अपने पैसे का उपयोग करना।


निवेश से लाभ


उदाहरण के लिए आप सोना या संपत्ति खरीदते हैं जिसका मूल्य समय के साथ बढ़ता है। कुछ वर्षों बाद जब आपको पैसों की आवश्यकता होती है आप इन चीज़ों को अधिक कीमत पर बेचते हैं क्योंकि तब तक इनका मूल्य बढ़ चुका होता है।


जॉन कीन्स ने कहा है


“Investment as real investment and not financial investment “ अर्थार्त इवेस्टमेंट सिर्फ एक वित्तीय निवेश न होकर एक असली निवेश है। निवेश का मुख्य लक्ष्य होता है 'संपत्ति और प्रतिभूतियों के मूल्य में वृद्धि, या सम्पति और प्रतिभूतियों से लगातार लाभ प्राप्त करना'


उदाहरण के लिए


आपने 5,000 की बचत की है। यदि आप इस धन को घर में ही रखते हैं तो यह 5000 ही रहेगा। पर यदि आप इसे बैंक में जमा करते हैं तो इस पर ब्याज लगेगा और यह बढ़ेगा जितनी अधिक अवधि तक आप इसे बैंक में रखेंगे यह उतना ही बढ़ेगा या इससे कोई आप भूखण्ड खरीदते हैं तो कुछ समय के बाद इस भूखण्ड को बेच कर अधिक मूल्य प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि भूखण्ड की कीमतें सदैव बढ़ती रहती है। ऐसे अनेक तरीके हैं जिससे हम अपने धन का निवेश कर सकते हैं ये निम्नलिखित है।


कैसे मिलता है निवेश का फायदा


कोई और आपके पैसों का उपयोग कर सके इसके लिए आप निवेश करते हैं

और इसके लिए आपको पैसा भी मिलता है। अत: जब आपको अपने पैसे की आवश्यकता होती है तब आपको "ब्याज" सहित पैसा


मिलता है।


निवेश का क्या अर्थ है?


निवेश का सबसे सरल भाषा में मतलब है कि जो भी पैसा हम बचायें उसे ऐसी जगह लगायें जहाँ पर प्रतिफल (रिटर्न) हमें वर्तमान महगाई दर (Inflation) से ज्यादा मिले। उदाहरण अभी इंडिया में रिटेल में महगाई दर 7% के आसपास है। हालांकि सरकारी दर 4-5% के आसपास ही है परन्तु हम एक्चुअल रिटेल दर की बात कर रहे हैं

जिससे आम आदमी प्रभावित होता है।) तो निवेश हमें ऐसी जगह करना चाहिये जहाँ पर रिटर्न कम से कम 8% या उससे अधिक हो और वो भी टैक्स फ्री तभी हम एक्चुअल में कुछ अर्जन (कमाई) कर रहे हैं। अगर हम 5-6% से ही अपने निवेश को प्रो कर रहे हैं तो एक्चुअल में हम अपनी रकम को कम ही कर रहे हैं। यानि जिन्दा मक्खी निगल रहे हैं। तो इंवेस्टमेंट्स का सरल भाषा में मतलब आज के भारत में टैक्स फ्री 7-8% से ऊपर कमाई करना है। अभी निवेश के बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं जैसे एफडीए, एनएससीए, पीपीएफए, इंश्योरेंस पॉलिसी, गोल्ड, प्रॉपर्टी, म्यूच्यूअल फण्ड आदि ।


सेविंग निवेश नहीं है सेविंग के विपरीत जब आप अपने पैसों का निवेश करते हैं तो आप इसे केवल सुरक्षित करके नहीं रखते बल्कि इसे बढ़ाने का प्रयत्न करते हैं। बैंक के खाते में पैसे बचाकर रखने को निवेश करना नहीं कहा जा सकता।


निवेश के साथ कुछ खतरे भी जुड़े हुए होते हैं। हालाँकि निवेश करने का अर्थ शर्त लगाना नहीं है - आप बिना सोचे समझे किसी भी जगह पैसे का नि वेश नहीं कर सकते। सही तरीके से निवेश करना एक सोची समझी प्रक्रिया है जिससे रिटर्न्स मिलने के लिए भाग्य पर निर्भर नहीं होना पड़ता।


यदि निवेश करने के बजाय आप अपने पैसे पिगी बैंक या सेफ्टीवॉलेट में रखते हैं तो ये कभी भी बढ़ते नहीं हैं। ऐसा करने के लिए आपको पैसे का निवेश वहां करना पड़ता है जहाँ आपको इस पर ब्याज मिल सके या ऐसे चीज़ों को बेचे या खरीदें जिनका मूल्य समय के साथ बढ़ा है।


उदाहरण के जरिए समझें


विजय और अजय दो दोस्त हैं जिन्होंने 22 वर्ष की उम्र में एक साथ काम करना शुरू किया। विजय एक सतर्क निवेशक है और नियमित तौर पर अपने वेतन का 20% विभिन्न प्रकार के निवेशों जैसे म्युचल फंड्स, शेयर्स और फिक्स्ड डिपाजिट आदि में निवेश करता है। इसके परिणाम स्वरूप उसके पोर्टफोलियो का मूल्य बढ़ता रहता है और पांच वर्षों के अन्दर ही वह अपने घर का डाउन पेमेंट करने में समर्थ हो जायेगा।


दूसरी ओर अजय अपने वेतन का केवल 10% रिकरिंग डिपाजिट में डालता है

तथा अन्य किसी भी तरह का निवेश नहीं करता। उसका बाकी का बचा हुआ वेतन उसके खर्चों को पूरा करने और क्रेडिट कार्ड के बिल के भुगतान में खर्च हो जाता है। पांच वर्षों बाद उसे कुछ ख़ास रिटर्न्स नहीं मिलेंगे क्योंकि उसने अपने आर्थिक भविष्य या निवेश की योजना नहीं बनाई थी।


तो यदि आप अपने निवेश की योजना बनाते हैं और समय के साथ उचित निवेश करते हैं तो आप अपने आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।