गांधी जी के ग्यारह व्रत 1.        सत्य – सत्य ही परमेश्र्वर है। सत्य-आग्रह , सत्य-विचार , सत्यवाणी और सत्य-कर्म ये सब उसके अंग हैं। जहां सत्य है , …