नातेदारी की श्रेणियाँ - Categories of Kinship
नातेदारी की श्रेणियाँ - Categories of Kinship
सभी नातेदारों से संपर्क निकटता एवं घनिष्ठता का नहीं होता। कुछ अधिक घनिष्ठ होते है तो कुछ कम। मुरडॉक ने नातेदारी की श्रेणियों का गहन अध्ययन किया है और लिखा है कि इस प्रथा संपर्क, घनिष्ठता, निकटता एवं आत्मीयता के आधार पर विवाह संबंध, रक्त संबंध एवं काल्पनिक संबंधों के स्वरूपों के आधार पर नातेदारी को तीन श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं-
1. प्राथमिक नातेदारी (Primary Kinship)
2. द्वितीय नातेदारी (Secondary Kinship)
3. तृतीयक नातेदारी (Tertiary Relation)
1. प्राथमिक नातेदारी (Primary Kinship )
इसके अंतर्गत हमारे वे संबंधी आते हैं जो एक दूसरे से प्रत्यक्ष व घनिष्ठ रूप से संबंधित होते हैं। इनसे संबंधों को प्रकट करने के लिए कोई और संबंधों को प्रकट करने के लिए कोई और संबंधी बीच में नहीं होता है और जिनके साथ रक्त या विवाह के आधार पर नातेदारी होती है। एक परिवार में आठ प्रकार के प्राथमिक संबंधी हो सकते हैं, जिनमें सात रक्त से संबंधित एवं एक विवाह से संबंधित होता है। जैसे पिता-पुत्र, पिता-पुत्री, माता-पुत्र माता-पुत्री, भाई-भाई भाई-बहन, बहन-बहन ये सभी सात संबंध रक्त संबंधी है। आठवा संबंध पति-पत्नी का होता है जो रक्त संबंधी न होकर वैवाहिक होता है।
2. द्वितीयक नातेदारी (Secondary Kinships )
इसके अंतर्गत वे नातेदार आते हैं जो प्राथमिक नातेदारों से सीधे जुड़े होते हैं। अर्थात् जो उपर्युक्त प्राथमिक संबंधियों के प्राथमिक संबंधी होते हैं। उदाहरण के लिए एक व्यक्ति का दादा उसका द्वितीयक संबंधी है,
क्योंकि दादा का संबंध पोते से पिता के द्वारा है और बच्चे का पिता एवं उसका पिता दो आपस में प्राथमिक संबंधी हैं। द्वितीयक नातेदारी भी रक्त संबंधी एवं विवाह संबंधी होता है। जैसे रक्त संबंधी द्वितीयक नातेदारी में चाचा-भतीजा, मामा-भांजा, नाना-नाती, नानी-नाती, दादा-पोता, दादी-पोती इत्यादि आते हैं. जबकि विवाह संबंधी नातेदारों में सास-बहु, सुसर-दामाद, साला-बहनोई, देवर-भाभी, भाभी-नंद इत्यादि मुरडॉक ने ऐसे 33 प्रकार के द्वितीयक संबंधों का उल्लेख किया है।
3. तृतीयक संबंधी या नातेदारी (Tertiary Kinship)
इस श्रेणी के नातेदार वे हैं जो प्राथमिक नातेदार के द्वितीयक नातेदार या द्वितीयक नातेदार के प्राथमिक नातेदार है। उदाहरण- 'क' के भाभी की बहन क' के लिए तृतीयक संबंधी होगा। इसी प्रकार पिता यह पोते के लिए तृतीय संबंधी है मुरडॉक ने कुल 151 प्रकार के तृतीयक संबंधियों का उल्लेख किया है। इस प्रकार संबंधों की यह श्रृंखला चतुर्थ, पंचम भी जा सकती हैं। एक उदाहरण द्वारा नातेदारों की श्रेणियों को सरलतापूर्वक समझा जा सकता है
> माना शगुन नाम की एक बच्ची है। अब उसकी माँ से उसका संबंध प्राथमिक या प्रत्यक्ष संबंध होगा। शगुन के लिए उसकी माँ प्राथमिक नातेदार होगी।
> शगुन की नानी शगुन के लिए द्वितीयक नातेदार या द्वितीयक संबंधी होगी परंतु उसकी माँ के लिए उसकी नानी प्राथमिक नातेदार होगी।
> अब नानी का भाई, शगुन के लिए तृतीयक नातेदार होगा। नानी के लिए नानी का भाई द्वितीयक नातेदार होगा।
> अब यदि शगुन की माँ के तृतीयक नातेदार की बात करे तो वो मामा की पत्नी होगी जो माता के
लिए प्राथमिक होगी। इन संबंधों की श्रेणियाँ इसी तरह से आगे बढ़ती जाएंगी।
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