शोध का अर्थ, परिभाषा, तत्व, विशेषताएं, महत्त्व और चरण

 शोध का अर्थ, परिभाषा, तत्व, विशेषताएं, महत्त्व और चरण -  Meaning, definition, elements, features, importance and stages of research

शोध का अर्थ, परिभाषा


शोध को अंग्रेजी में रिसर्च (Research) कहा जाता है। रिसर्च मूल रूप से लैटिन के 'Re' अर्थात् दुबारा और 'search' अर्थात् खोजना से बना है। वैज्ञानिक पद्धति द्वारा ज्ञान प्राप्त करने का निरंतर प्रयास ही शोध है।


रैडमैन और मोरी ने शोध का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखा है कि नवीन ज्ञान की प्राप्ति के व्यवस्थित प्रयत्न को हम शोध कहते हैं।


• एडवांस्ड लर्नर डिक्शनरी ऑफ करेंट इंग्लिश के अनुसार किसी भी ज्ञान की शाखा में नवीन तथ्यों की खोज के लिए सावधानीपूर्वक किए गए अन्वेषण या जांच पड़ताल को शोध की संज्ञा दी जाती है।


• स्पार और स्वेन्सन ने शोध को परिभाषित करते हुए अपनी पुस्तक में लिखा है कि कोई भी विद्वतापूर्ण शोध ही सत्य के लिए, तथ्यों के लिए, निश्चितताओं के लिए अन्वेषण है।


लुण्डबर्ग ने शोध को परिभाषित करते हुए लिखा है, कि शोध अवलोकित सामग्री का संभावित वर्गीकरण, साधारणीकरण एवं सत्यापन करते पर्याप्त कर्म विषयक और व्यवस्थित पद्धति है।


• शोध के अंतर्गत केवल नए सत्यों एवं सिद्धांतों की खोज ही नहीं अपितु पुराने सत्यों को नए ढंग से प्रस्तुत करना, पुराने सिद्धांतों को नवीन रूप प्रदान करना, पुराने तथ्यों को नए तरीके से स्पष्टीकृत करते हुए उनके मध्य के अंतर्सम्बंधों का विश्लेषण करना सम्मिलित है।





शोध को प्रेरित करने वाले चार प्रमुख तत्व हैं


• अज्ञात को जानने की जिज्ञासा ।


• मौजूदा गहन समस्या के कारणों और प्रभावों को जानने की इच्छा।


भावुकता से परे होकर असली कारणों की खोज करने की इच्छा।


• नया खोजने और पुरानी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं/विधियों को जांचने की इच्छा।


शोध के उद्देश्य


• पुरानी तथा वर्तमान की घटनाओं की स्थिति ज्ञात करना।


• चुनी हुई घटनाओं की प्रकृति, गठन तथा प्रक्रिया की विशेषताओं को ज्ञात करना।


• उन घटनाओं के इतिहास तथा परिवर्तनों की स्थिति ज्ञात करना।


• उन घटनाओं का अन्य सम्बंधित घटनाओं से सह-सम्बंध ज्ञात करना।


एक सफल शोधकर्ता वह होता है जो:


• किसी नए सत्य को खोजने में सक्षम हो;


• पुराने सत्य को नये ढंग से खोजने में सक्षम हो;


• नए सम्बन्धों का स्पष्टीकरण करने में सक्षम हो ।






शोध की विशेषताएं


• शोध एक तर्कपूर्ण तथा वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है। इससे प्राप्त निष्कर्ष तार्किक तथा वास्तविक आँकड़ों पर आधारित होते हैं तथा व्यक्तिगत पक्षपात से मुक्त होते हैं।


• शोध द्वारा किसी नए तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु की खोज की जाती है अथवा किसी प्राचीन तथ्य, सिद्धांत, विधि या वस्तु को परिवर्तित किया जाता है।


• यह एक उद्देश्यपूर्ण बौद्धिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी सैद्धांतिक अथवा व्यावहारिक समस्या का समाधान किया जाता है तथा इन समस्याओं के समाधान हेतु विशिष्ट उपकरणों तथा प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है।


• इस प्रक्रिया में आंकड़ों से जानकारी एकत्रित की जाती है जो प्राथमिक अथवा माध्यमिक स्रोतों से एकत्र किए जाते हैं।


आंकड़ों के संग्रहण के उपरांत इनका विश्लेषण किया जाता है जिसके लिए कई परिकल्पनाओं (Hypothesis) का निर्माण एवं परीक्षण किया जाता है।


आंकड़ों के विश्लेषण में सांख्यिकीय विधियों का उपयोग किया जाता है जो आंकड़ों की प्रकृति तथा चयनित प्रतिदर्श पर निर्भर करती है।


शोध द्वारा प्रदत्त ज्ञान सत्यापित होता है क्योंकि किया गया विश्लेषण नियंत्रित तथा वस्तुनिष्ठ होता है।


शोध कार्य हेतु वैज्ञानिक अभिकल्पों का प्रयोग किया जाता है।


आंकड़ों को प्राप्त करने के लिए वैश्वसनीय तथा वैध उपकरणों का उपयोग किया जाता है।


• शोध से प्राप्त परिणामों तथा सम्बंधों की पुरावृत्ति की जाती है जिससे सदैव सुनिश्चित तथा सुसंगत निष्कर्ष उपलब्ध हो सके।


• शोध से प्राप्त ज्ञान परिशुद्ध (Precise), वैध (Valid) तथा विश्वसनीय (Reliable) रहता है।


• प्राप्त जानकारी का अभिलेखन तथा प्रतिवेदन सावधानीपूर्वक किया जाता है जिससे उस क्षेत्र के आगामी अनुसंधानों हेतु वह सहज रूप से भविष्य में उपलब्ध हो सके। शोध के परिणामों का प्रकाशन इस दृष्टि से उत्तम रहता है।





शोध का महत्व


शोध हमारे ज्ञान का विस्तार करता है ।


• मानव समाज की समस्याओं के हल का रास्ता सुझाता है।


• शोध से तार्किक और समीक्षा की दृष्टि मिलती है ।


• शोध के बिना ज्ञान और विकास में वृद्धि संभव नहीं।


• शोध बदलती परिस्थितियों में तथ्यों की व्याख्या और पुनर्व्याख्या सिखाता है।


• शोध कई पूर्वाग्रहों के निदान एवं निवारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


शोध प्रक्रिया के चरण


विषय / समस्या का चुनाव ( Selection of Research Problem )


सर्वप्रथम शोधकर्ता उस क्षेत्र या समस्या का चुनाव करता है जिसमें वह शोध करना चाहता है। विषय का चयन शोधकर्ता की पसंद तथा व्यक्तिगत प्रभावित हो सकता है। चुनाव से




साहित्य समीक्षा (Review of Literature )


इस चरण में शोधकर्ता उस विषय से सम्बंधित पूर्व में किए गए अध्ययनों की समीक्षा करता है जिससे उसे अमुक विषय में अधिकाधिक ज्ञान अर्जित होता है। इसके अतिरिक्त वह अपने अध्ययन में प्रयोग किए जाने वाली प्रविधियों (Methodology), उपकरणों (Tools), सांख्यिकीय विधियों आदि के बारे में भी जान सकता है।


उद्देश्य (Objectives)


इस चरण में शोधकर्ता अपने शोध अध्ययन के उद्देश्यों को स्पष्ट एवं सीमित करता है। उद्देश्यों का गठन ही अध्ययन को एक स्पष्ट दिशा प्रदान करता है।

• परिकल्पना / शोध प्रश्न (Hypothesis and Research Question) | इस चरण में शोधकर्ता द्वारा शोध विषय समस्या हेतु एक परिकल्पना की रचना करनी होती है जिसका आनुभविक (Empirical) तथा मात्रात्मक (Quantitative) अध्ययन सम्भव हो और जो चयनित विषय का एक उपयुक्त उत्तर हो।


शोध विधि और डिजाइन (Research methodology and Design) 


इस चरण में शोधकर्ता को शोध हेतु एक उपयुक्त शोध विधि का चयन करना होता है। जिससे सम्बंधित समस्या का अध्ययन हो सके। इसके अतिरिक्त एक शोध प्रविधि का भी चयन करना होता है जो विषय के अनुरूप हो ।


प्रतिदर्श का चुनाव (Selection of Sample)


इस चरण में शोधकर्ता अध्ययन हेतु उपयुक्त प्रतिदर्श का चुनाव करता है जो लक्षित जनसंख्या का सटीक प्रतिनिधित्व करे। इस चयन के लिए उपयुक्त प्रतिचयन विधि का प्रयोग किया जाता है जो समस्या / विषय के प्रकार पर निर्भर करता है।





आंकड़ों का संग्रह (Data Collection)


इस चरण में आंकड़ों का संकलन किया जाता है।


विश्लेषण और व्याख्या (Analysis and Interpretation) इस चरण में आंकड़ों का व्यवस्थापन तथा विश्लेषण किया जाता है। इसमें उपयुक्त सांख्यिकीय विधि का उपयोग कर परिकल्पना को सत्यापित किया जाता है।


शोध निष्कर्ष (Research Findings)


इसमें परिकल्पना को स्वीकृत अथवा अस्वीकृत किए जाने के आधार पर उपयुक्त निष्कर्ष निकाले जाते हैं।


रिपोर्ट लेखन/ शोध सार (Report writing/ Executive Summary)


अंतिम चरण में सम्पूर्ण शोध प्रक्रिया के आधार एक संक्षिप्त तथा स्पष्ट प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाता है जिससे इस शोध का संदर्भ आगामी सम्बंधित शोधों के लिए सरलता से उपलब्ध हो सके। इस दृष्टिकोण से शोध के परिणामों का प्रकाशन किया जाता है।