पृथ्वी सम्मेलन 2002 - Earth Summit 2002

पृथ्वी सम्मेलन 2002 - Earth Summit 2002

पृथ्वी सम्मेलन 2002 का आयोजन दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग शहर में किया गया जिसमें आम सहमति से मुख्यमुद्दे निकलकर सामने आये - 


√ स्वच्छता संबंधित सुविधाओं से वंचित लोगों की संख्यों 2015 तक 50 प्रतिशत तक कमी लाना। 


√ पर्यावरण की क्षति को रोकन के लिए सौर ऊर्जा एवं पवन ऊर्जा के स्त्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ाना क्योंकि ये स्त्रोत पुन: प्राप्त किये जो सकते है तथा ईं धनपेट्रोल, डीजल तथा कोयला के उपयोग को कम करना जिससे कि इसको भीवी पीढ़ी के लिए बचाकर रख जा सके।


√ ऐसे उच्चस्तरीय तथा उचित प्रबंधन को बढ़ावा देना जिससे खतरनाक कचरे को स्वच्छ तरीके से निस्तारित किया जा सके।


√ 2020 ई. तक रसायनों के उत्पादन एवं प्रयोग को मानव पर्यावरण हेतु सुरक्षित बनाने का लक्ष्यनिर्धारित करना। 


√ समुद्रीय पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए विशेष तौर पर निर्धन देशों में भोजन में प्रमुख स्त्रोत के रूप में मछलियों को महत्व प्रदान करते हुए इनकी स्टाक में आई कमी के पूरा करना।


√ विकास के निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति बढ़ाने के लिए निर्धन देशों की आर्थिक सहायता बढ़ायी जाय। 


√ पट्टे संबंधी विश्वव्यापार संगठन का समझौता निर्धन देशों को दवाएँ उपलब्ध कराने से नहीं रोकेगा, जिससे निर्धन देश अपने देशवासियों को गंभीर रोगों की सस्ती दवाएँ उपलब्ध करा सकता है।


√ वैश्वीकरण के अच्छे तथा बुरे दोनों प्रकार के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास एवं जीवन स्थितियों में सुधार के लिए समान अवसर मुहैया कराया जाना चाहिए।





√ विकसित देशों में व्यापार संतुलन को असंतुलित करने वाले सब्सिडियों को कम करने की इच्छयाक्ति व्यक्त की जाए जिससे व्यापार एवं पर्यावरण के संबंधों को बढ़ावादिया जाय। 


√ 2010 ई. तक दुर्लभ प्रजाति के प्राणियों तथा वनस्पतियों के विलुप्त होने की दर में कमी लाना।


√ पृथ्वी को संरक्षित करने तथा बचाने का उत्तरदायित्व प्रत्येक राष्ट्रों का है परंतु इस पर होने वाले खर्च का बोझ, विकसित राष्ट्रों को उठाना चाहिए।