समाज कल्याण प्रशासन की अवधारणा - Concept of Social Welfare Administration - समाज कार्य शिक्षा

समाज कार्य शिक्षा

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Friday, 11 September 2020

समाज कल्याण प्रशासन की अवधारणा - Concept of Social Welfare Administration


 समाज कल्याण प्रशासन की अवधारणा


सामाजिक संस्थाओं और सरकारी एवं गैर सरकारी कल्याण कार्यक्रमों से संबंधित प्रश्न को समाज कल्याण प्रशासन कहा जाता है। सरकारी एवं गैर सरकारी तरीके से समाज कार्य अथवा कल्याण कार्यक्रमों के विकास के साथ-साथ समाज कल्याण प्रशासन के द्वारा मानव व्यवहार को भी शक्ति प्रदान की जाती है। समाज कल्याण प्रशासन समाज कार्य की एक सहायक पद्धति है। कुछ समाज कार्य वेत्ता इसे सामर्थ्य पद्धति (Enabling Method) अथवा अप्रत्यक्ष प्रविधि (Indiret Technique) बतलाते हैं, क्योंकि यह सामाजिक-वैयक्तिक सेवा कार्य सामाजिक सामूहिक सेवा कार्य तथा सामुदायिक संगठन के अन्तर्गत दी जाने वाली सेवाओं को कार्यान्वित करती है। समाज कार्य मुख्य रूप से समाज कल्याण से संबंधित संस्थाओं के माध्यम से अभ्यास में लाया जाता है अथवा विद्यालयों, सुधारगृहों आदि में व्यवहृत किया जाता है। कार्यों के लिए समाज कल्याण प्रशासन का ज्ञान होना आवश्यक होता है समाज कल्याण प्रशासन सामाजिक विधानों को समाज कल्याण अभिकरणों में कार्यान्वित करता है तथा लोगों के लिए नियमों व कानूनों को सेवा में परिवर्तित करता है। समाज कल्याण प्रशासन, निजी समाज कल्याण अभिकरणों एवं अन्य ऐच्छिक संगठनों के उद्देश्यों का मूल्यांकन कर उन्हें व्यवहार में परिवर्तित करता है अथवा गकार्यरूप प्रदान करता है। सामान्य रूप से समाज कल्याण प्रशासन का अभ्यास प्रशासन के सिद्धान्तों एवं प्रविधियों पर आधारित होता है, लेकिन यह मानवीय समस्याओं को परिभाषित करने तथा इन समस्याओं का समाधान करने सम्बन्धी समाज के कार्यों से जुड़ा है। मानवीय आवश्यकताओं की संतुष्टि से संबंधित समाज कल्याण संस्थाओं के निदेशक को व्यवसाय अथवा उद्योग की अपेक्षा भिन्न ज्ञान की जरूरत पड़ती है तथा यह ज्ञान व्यावसायिक शिक्षा व समाज कार्य अभ्यास के अनुभव पर आधारित होता है। समाज कल्याण अभिकरण के प्रशासक हेतु सामाजिक कार्यकर्ता को समाज कार्य के लक्ष्यों, कार्यों व दर्शन का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए साथ ही उसे समाज कार्य के सामाजिक निदान, विश्लेषण और व्यक्ति व समूहों की जरूरतों के संश्लेषण की विधियों का ज्ञान होना चाहिए। उसे अपने अभिकरण का ढांचा तथा सामुदायिक साधनों का बोध होना चाहिए। समाज कल्याण अभिकरण को सामाजिक कार्यों तथा सेवार्थियों, सामाजिक वैयक्तिक सेवाकार्य और सामाजिक सामूहिक सेवाकार्य के मध्य होने वाली जटिल अंत: क्रियाओं का ज्ञान भी उसे होना चाहिए।

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