प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रभावित करने वाले घटक - Factors Affecting Foreign Direct Investment

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रभावित करने वाले घटक - Factors Affecting Foreign Direct Investment


प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अतप्रर्वाह को प्रभावित करने वाले घटकों को निम्न तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:


(i) पूर्ति पक्षीय घटक


अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक इकाइयां अन्य देशों में उपलब्ध आगतों व संसाधनों का लाभ उठाने के लिए वहां पूंजी निवेश करती है। जैसे-कम श्रम लागत, सस्ता कच्चा माल आदि। जब विदेशी प्रत्यक्ष निवेश निर्णय कच्चे माल की उपलब्धता, समार तंत्र, कुशल मानवीय संसाधनों आदि से प्रभावित होते हैं तो उन्हें पूर्ति घटक कहा जाता है। मुख्य पूर्ति घटक निम्नलिखित है-


(क) श्रम की कम लागत पर उपलब्धता विकसित देशों में श्रम लागत अधिक होती है। जबकि विकासशील देशों में जनसंख्या की अधिकता के कारण श्रम लागत कम होती है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां कम श्रम लागत के कारण अपनी उत्पादन इकाई को विकसित देशों से विकासशील देश में हस्तांतरित करना पसंद करती है।

बहुत से उद्योगों में श्रम लागत उत्पादन लागत का मुख्य तत्व होती है। इससे कुल उत्पादन लागत कम होती है। अतः बहुराष्ट्रीय कंपनियां विकासशील देशों में प्रत्यक्ष निवेश द्वारा अपनी सहायक कंपनियां स्थापित करती है।


(ख) कच्चे माल की उपलब्धता - बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपनी उत्पादन इकाई ऐसे देश में स्थापित करना पसंद करती है जहां अच्छी क्वालिटी का कच्चा माल कम लागत पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जैसे- अमेरिका ने अपनी तेल शोधन इकाइयां सऊदी अरब व अन्य खाड़ी देशों में स्थापित की है, क्योंकि वहां कच्चा तेल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। प्रायः कच्चा माल बहुत भारी होता है तथा इनकी परिवहन लागत बहुत अधिक होती है यदि उत्पादन आधार ऐसे स्थान पर स्थापित किया जाता है जहां कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में कम लागत पर उपलब्ध है तो इससे न केवल परिवहन लागत में बचत होती है, बल्कि कच्चा माल भी नियमित रूप से मिलता रहता है। अतः बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपना उत्पादन आधार ऐसे स्थान पर स्थापित करती है। 


(ग) लंबी दूरी बहुत-सी बहुराष्ट्रीय कंपनियां विश्वभर में अपने उत्पाद बेचती है। यदि ये कंपनिया निर्यात रूट अपनाती है, अर्थात उत्पादन आधार एक स्थान पर केंद्रित करके अन्य सभी देशों में उत्पाद को इस स्थान से निर्यात किया जाता है, तो इससे विभिन्न देशों में लंबी दूरी के कारण परिवहन व्यय बहुत अधिक हो जाते हैं। यदि उत्पाद बहुत भारी होते हैं तो परिवहन व्यय उत्पाद मूल्य का एक मुख्य तत्व बन जाते हैं। ऐसी दशा में बहुराष्ट्रीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रूट अपना कर विभिन्न देशों में उत्पादन आधार स्थापित करती है, जैसे- कोका कोला के विश्व में 150 से भी अधिक देशों में बोटलिंग प्लाट है।


(घ) कुशल कार्यबल की उपलब्धता- कुछ उद्योगों जैसे सूचना तकनीक उद्योग में कुशल, प्रशिक्षित पेशेवर श्रम बल जैसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर आई टी इंजीनियर हार्डवेयर इंजीनियर की आवश्यकता होती है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपनी सहायक कंपनियां ऐसे स्थानों पर स्थापित करती है,

जहाँ पेशेवर कुशल कर्मचारी तुलनात्मक रूप से कम वेतन पर उपलब्ध होते हैं, जैसे बहुत-सी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपनी सूचना तकनीक आधारित सेवाओं का आधार भारत में स्थापित किया है, क्योंकि यहां तुलनात्मक रूप से कम वेतन पैकेज पर कुशल इंजीनियर मिल जाते हैं।


(ङ) आधुनिकतम टेक्नोलॉजी पर पहुंच बनाना - अन्य देशों में उपलब्ध विकसित टेक्नोलॉजी का लाभ उठाने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियां विदेशी प्रत्यक्ष निवेश रूट अपनाती है। इसके लिए दो देशों की व्यावसायिक इकाइयों के मध्य सहयोग समझौते किए जाते है जिसमें एक देश की कंपनी वित्त प्रदान करती है तथा दूसरे देश की व्यावसायिक इकाई टेक्नोलॉजी उपलब्ध करवाती है, जैसे- अमेरिका की इकाइयां जापान की विकसित टेक्नोलॉजी पर पहुंच बनाने के लिए जापान से सहयोग समझौते करती है।


(ii) मांग पक्षीय घटक


(क) विशाल ग्राहक आधार:- बहुराष्ट्रीय कंपनियां ऐसे देश में प्रवेश करना पसंद करती है, जहां अधिक जनसंख्या आकार के कारण ग्राहकों की संख्या अधिक होने की संभावना होती है जैसे - मैक्डोनाल्ड जो अमेरिका मूल की कंपनी है ने भारत में विशाल ग्राहक से आकर्षित होकर अपने केंद्र स्थापित किए हैं।


(ख) अंतरराष्ट्रीय छवि-कुछ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की छवि विश्वव्यापी होती है। इनके पास वित्तीय संसाधन भी शामिल मात्रा में होते है तथा टेक्नोलॉजी भी बहुत विकसित होती है। ऐसे बहुराष्ट्रीय कंपनिया अपनी क्षमताओं का पूर्ण लाभ उठाने के लिए विदेशों से प्रत्यक्ष निवेश द्वारा अपनी इकाईया स्थापित करती है।


(ग) कम विपणन लागत-यदि बहुराष्ट्रीय कंपनिया निर्यात रूट अपना कर अन्य देशों में अपने उत्पाद बेचती है तो इस व्यवस्था में विपणन मध्यस्थों की कमीशन के कारण उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। इसके अलावा निर्यात रूट अपनाने पर विपणन मध्यस्थ उत्पादक पर हावी होते हैं। वे उत्पादक पर अपनी शर्तें थोपते हैं। परंतु यदि बहुराष्ट्रीय कंपनी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश रूट अपना कर विदेशी बाजारों में अपनी विपणन इकाइयां स्थापित करती है तो इससे विपणन मध्यस्थों की कमीशन का भार कम हो जाता है। उन्हें विदेशी बाजारों में विपणन मध्यस्थ व डीलर भी सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं। इससे विपणन लागत कम करने में सहायता मिलती है।


(घ) बेहतर ग्राहक सेवाएं यदि बहुराष्ट्रीय कंपनी विदेशों में अपने उत्पाद बेचने के लिए निर्यात रूट को अपनाती हैं तो विदेशी ग्राहकों को विक्रय उपरांत सेवाएं लेने में अत्यधिक कठिनाई होती है।

अतः वे आयायित उत्पाद खरीदने में हिचकिचाते हैं। परंतु यदि बहुराष्ट्रीय कंपनी विदेशी बाजारों में अपनी विपणन इकाई स्थापित करती है तो इससे विदेशी ग्राहकों को विक्रय उपरांत सेवाएं सरलता से प्राप्त हो जाती है। वे विदेशी उत्पाद खरीदने में हिचकिचाते नहीं है। इसके अलावा विदेशी ग्राहकों की प्रतिक्रिया को भी समझा जा सकता है। विदेश में स्थापित विपणन इकाइयों में नियुक्त स्थायी विक्रयकर्ताओं को स्थानीय पसंद, रूचि, प्राथमिकता, फैशन आदि के बारे में अच्छी जानकारी होती है।


(ङ) कम टैरिफ व गैर टैरिफ बाधाएं बहुत से देशों में सरकार ने भुगतान शेष की समस्या के कारण आयातों पर टैरिफ व गैर टैरिफ बाधाएं लगा रखी है। यदि कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी निर्यात रूट द्वारा अपने उत्पाद विदेशों में बेचती है तो इसे बहुत सी टैरिफ व गैर टैरिफ बाधाओं का सामना करना पड़ता है

जैसे आयात कर, आयात कोटा, आयात लाइसेंस आदि। परंतु ऐसी दशा में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश रूट अपनाने पर इन रूकावटों से बेचा जा सकता है। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश रूट में एम एन सी विदेशों में उत्पादन इकाइया स्थापित करती है जिन पर आयात कर, आयात कोटा, लाइसेंस के प्रावधान लागू नहीं होते। इससे विदेशी बाजारों में इन उत्पादों की कीमतें कम हो जाती है तथा मांग में वृद्धि होती है।


(iii) अन्य घटक


(1) मेजबान देश की सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए गए प्रोत्साहन - मेजबान देश में विदेशी इकाई स्थापित होने पर विदेशी मुद्रा के प्रवाह में वृद्धि होती है वहा रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

इससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। मेजबान देश की सरकार विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए इसे विभिन्न प्रोत्साहन देती है, जैसे- अनुदान, करों में छूट आदि। इन प्रोत्साहनों को प्राप्त करने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियां विदेशों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश रूट अपना कर अपनी इकाइयां स्थापित करती है।


(2) मुख्य औद्योगिक ग्राहक का स्थानांतरण:- प्राय: सहायक इकाइयां अपने उत्पाद को एक या दो बड़ी औद्योगिक कंपनियों को बेचती है। यदि ये बड़ी औद्योगिक कंपनियां अपने उत्पादन आधार को किसी अन्य देश में स्थानांतरित कर देती है तो ऐसी स्थिति में इन सहायक इकाइयों को भी इन औद्योगिक कंपनियों के हस्तांतरण उत्पादन आधार पर जाना पड़ता है, क्योंकि ये सहायक इकाइयां अपने विक्रय के लिए इन बड़ी औद्योगिक कंपनियों पर ही निर्भर करता है। अतः इस स्थिति में सहायक इकाई भी विदेशी प्रत्यक्ष रूट को अपनाती है।