समस्या चयन की प्रक्रिया (Process of Problem Selection)

समस्या चयन की प्रक्रिया (Process of Problem Selection)


शोध समस्या के चयन की प्रक्रिया में सामान्यतः निम्नलिखित चयन निहित रहते हैं 


1. सबसे पहले मोटे तौर पर यह निर्धारित करना कि किस क्षेत्र में शोध करना है। प्रत्येक विषय का ज्ञान अनेक क्षेत्रों में विभाजित रहता है। उदाहरण के लिए शिक्षा विषय के विशिष्ट क्षेत्र मनोविज्ञान शिक्षा समाजशास्त्र, शिक्षा दर्शन, शिक्षा तकनीकी शिक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन एवं मापन अध्यापक शिक्षा शिक्षण प्रक्रिया आदि हो सकते हैं। इसी प्रकार मनोविज्ञान विषय के ये क्षेत्र अधिगम, प्रेरणा, व्यवहार परिवर्तन, प्रयोगात्मक मनोविज्ञान, मापन एवं मूल्यांकन, सृजनात्मकता, अवधान, व्यक्तिगत, संस्थागत व्यवहार (organizational behaviour) आदि हो सकते हैं।







समाजशास्त्र के क्षेत्र में ये सामाजिक परिवर्तन, जाति-संबंध, परिवार विघटन, संस्थाएँ एवं उनकी संरचना, सामाजिक वर्ग-भेद, सामाजिक तनाव, सामाजिक रूढ़ियाँ, आधुनिकीकरण, सामाजिक मान्यताएँ एवं परम्पराएँ आदि हो सकती हैं। अपने अध्ययन, ज्ञान एवं रुचि के आधार पर क्षेत्र का निर्णय कर लेने के पश्चात् उस क्षेत्र में से एक सीमित एवं महत्त्वपूर्ण समस्या की खोज करनी चाहिए। क्षेत्र, ज्ञान का विस्तृत रूप होता है। उसके अन्तर्गत अनेक परिप्रेक्ष्य सिद्धांत आयाम प्रश्न एवं समस्याएँ आते हैं। अत: यह आवश्यक होता है कि उस समस्त ज्ञानसागर का मंथन करने के पश्चात् उस समस्या को खोज निकाला जाए, जिसका निश्चित एवं निर्विरोध समाधान अभी तक उपलब्ध नहीं हो सका है।


2. एक निश्चित एवं स्पष्ट समस्या का चयन करने में दूसरा कदम चुने हुए क्षेत्र में जो अनुसंधान हो चुके हैं, उनका सर्वेक्षण करना होता है। इससे यह पता लगता है कि उस क्षेत्र में किन-किन समस्याओं को लेकर कितना और किस प्रकार का शोध कार्य हो चुका है। साथ ही यह भी पता चलता है कि कौन से प्रश्न अभी अनुत्तरित हैं अथवा पूर्णतया उत्तरित नहीं हैं। इन प्रश्नों अथवा समस्याओं में से किसी एक का नये शोध हेतु चयन किया जा सकता है। 


3. उपरोक्त प्रश्न अथवा समस्या का चयन कर लेने का अर्थ यह नहीं होता कि शोध समस्या मिल गई। इसे केवल संभावित समस्या ही समझना चाहिये। अच्छा यह रहता है कि ऐसी कई संभावित समस्याओं का चयन किया जाए। 









4. इन संभावित समस्याओं को लेकर शोध मार्गदर्शक के साथ बैठकर गम्भीरतापूर्वक उन पर विचार-विमर्श करना चाहिए। यह समस्या चयन की प्रक्रिया का तीसरा चरण है। समस्या का समाधान खोजना इतना कठिन नहीं होता, जितना कि समस्या का चयन एवं उसकी संरचना तैयार करना होता है। विभिन्न दृष्टिकोणों से मार्गदर्शक की सूझ-बूझ एवं सुझावों को ध्यान रखते हुए अन्तिम रूप से समस्या का चयन स्तर पर हो जाता है।