सतत विकास की रणनीतियाँ तथा उपागम - Sustainable Development Strategies and Approaches

सतत विकास की रणनीतियाँ तथा उपागम - Sustainable Development Strategies and Approaches

किसी भी देश में सतत विकास की रणनीतियों का नियोजन इस प्रकार होना चाहिए कि उस देश में गरीबी एवं भूखमरी, भविष्य में कभी भी न आ सके। भविष्य को ध्यान में रखकर विकास की रणनीति तय करनी चाहिए। जिससे भविष्य में भी उस देश में खुशहाली बनी रहे और इसे धारणीय विकस के रूप में धारण किया जा सके। इसके लिए निम्नलिखित पूर्व शर्तें आवश्यक है, जिन्हें रणनीतियों के रूप में देखा जाना चाहिए -






1. पर्यावरणीय असंतुलन की कीमत पर सम्पनता और उत्पादन स्वीकार नहीं है। 


2. देश की सामाजिक संरचना और व्यवस्था इस प्रकार की होनी चाहिए' वह दलितों एवं गरीबों का कल्याण कर सके तथा समाज के सभी वर्गों को एक साथ लेकर चल सके। उनमें आपसी वैमनस्य नहीं होना चाहिए।


3. विदेशी या बाहरी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता को समाप्त किया जाना चाहिए तथा देश के अंदर स्वदेशी प्रौद्योगिकी के विकास पर बल दिया जाना चाहिए।


4. आर्थिक व्यवस्था स्वार्थी एवं शोषक दृष्टि की नहीं होनी चाहिए। 


5. राजनैतिक व्यवस्था कल्याणकारी राज्य और प्रजातंत्र के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए।


6. शिक्षा व्यवस्था कौशल युक्त, व्यावहारिक और उपयोगी होनी चाहिए।


7. ऐसी सरकार जिसे सभी वर्गों का समर्थन प्राप्त हो तथा यह सरकार भ्रष्टाचार मुक्त हो ।





8. समाज में एक सुदृढ़ पारिवारिक व्यवस्था पायी जानी चाहिए तथा परिवार और व्यक्ति की स्वतंत्रता को स्वीकार की जाती हो।


9. सतत विकास के अंतर्गत मुख्या: पाँच क्षेत्रों पर बल दिये जाने की आवश्यकता रियो सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव कोफी अन्ना ने व्यक्त की। ये पाँच क्षेत्र जल एवं सफाई, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कृषि तथा जैव विविधता है।