सुख और दुःख – एक मित्र
जीवन मे सुख और दुःख का साथ पक्के दोस्ती की तरह है।
जीवन मे कोई साथ हो तो सुख मिलता है।
वही जीवन मे कोई दूर तो दुःख मिलता है।
जीवन मे कभी कुछ पाने की इच्छा हो और मिल जाये तो सुख मिलता है।
वही जीवन मे वो चीज़ न मिल पाये तो दुःख मिलता है।
कभी अगर किसी का भला करने का मौका मिल जाये तो तहेदिल से सुख मिलता है।
वही किसी अपने का कोई बुरा करदे दे तो आखे नम हो जाती है और तहेदिल से दुःख पहुचता है।
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