Ye Jindgi - ये जिन्दगी
ये जिन्दगी
माँ की ममता के नीचे,
लोरी, प्यार- दुलार के साथ,
शुरू होती है ये जिंदगी।
बड़ो के उंगलियो को पकड़कर,
चलना सिखाती है,
सही-गलत का फर्क ,
धीरे- धीरे सीख कर आगे की,
ओर बढ़ती है ये जिन्दगी।
विद्यालय मे शिक्षक के समकक्ष,
रहकर जीवन के हकीकत को,
सही मायने से जीना,
सीखती है ये जिंदगी।
एक बुनयादी नींव,
तथ्यों के प्रति समझ को,
लेकर आगे कि ओर,
बढ़ती है ये जिंदगी ।
कई उतार- चढ़ाव,
सुख-दुःख झेलकर,
जवानी की ओर,
बढ़ती है ये जिंदगी।
जवानी मे मस्ती करना,
दोस्तो संग समय बिताना,
बातें करना पसंद,
करती है ये जिंदगी।
समय के साथ,
अपनों से दूर,
दोस्तों के करीब,
हो जाती है जिंदगी।
जवानी मे ही एक उमंग,
जोश, जूनून के साथ,
कुछ करना,
कुछ बनना,
अपने माता-पिता,
गुरुजनों, समाज,राज्य,
देश का नाम रौशन,
करना चाहती है ये जिंदगी।
समाज, संस्कृति, परम्परा के बने,
नियम के तहत,
आगे की जीवन के लिए,
विवाह के पवित्र बंधन मे,
बंधती है ये जिंदगी।
वैवाहिक जीवन को जीवन भर,
बरकार रखने लिए हमें ,
खुद पर आत्म निर्भर होकर,
अपने खुद की परिवार के बारे मे,
सोचना सिखाती है ये जिंदगी।
समय के साथ-साथ आगे की,
जीवन को सुलभ तरीके से,
जीने के लिए,
हमें खुद माता- पिता बनकर,
अपने बच्चे को जन्म देकर,
उनका पालन पोषण करना,
सिखाती है ये जिंदगी।
उम्र के साथ- साथ बुढ़ापे मे,
अपने बच्चो के सहारे के साथ ,
आगे के जीवन जीने का ख्वाब,
दिखाती है ये जिंदगी ।
समय गुजरता जाता है,
शरीर कमजोर होता है,
अपनों को साथ छुटता जाता है,
सारे रिश्ते - नाते टूटते जाते है,
जब ये शरीर का साथ,
छोड़ जाती है ये जिंदगी।
रचियता- गौरव कुमार
(जिला –जमुई,राज्य- बिहार)
मो.- 9525120945

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