एक औरत।

त्वचा से होती है कोमल।
मन से होती है चनचल।

प्यारी प्यारी सी होती है आँखे।
मीठी मीठी सी करती है बातें।
टुकुर-टुकुर सबको है ताके।

दया करुणा से है जानी जाती ।
शर्म,लज्जा से है पहचानी जाती।
सम्मान से है पुकारी जाती।

ख़ुशी हो या गम सदा ही है मुस्कुराती।
बात कैसी भी हो आसानी से है सुलझाती।
आदर भाव के साथ सबसे है बतयाती।

न करे भेद भाव न कभी मन मुटाव,
सदा करे आपस मे सबसे प्यार।
न किसी से कुछ मांगे न किसी को कुछ मना करे,
सदा बाटें अपनों मे खुशियाँ बेशुमार।

घर के रौनक की जैसी है सदा जगमगाती।
घर मे मर्यादा मे रहने जैसी है नियम बनाती।
घर मे मुखिया जैसी है भूमिका निभाती।
©©©गौरव कुमार