हिन्दू धर्म के अनुसार विवाह के कुछ नियम।

हिन्दू धर्म के अनुसार विवाह के कुछ नियम।

गठबंधन का महत्त्व-
हल्दी,धुर्वा,अक्षत,पुष्प,मुद्रा ये पाँच तत्व गठबंधन के दौरान गांठ को बांधते समय इन तत्वों को रखा जाता है। इन पांचो तत्वों का महत्त्व अपने आप मे बहुत ही बड़ा महत्त्व है।

हल्दी- हल्दी प्रतीक है, की विवाह के उपरांत उन सारे बीमारियों को जड़ से ख़त्म करने का,आयुर्वेदिक दृष्टि से।

धुर्वा-धुर्वा की विशेषता है,की वो कभी मरता नहीं है। इसे जिस भी वातावरण मे रखो सदा जीवित रहता है।इसलिए,दूर्वा प्रतीक है, की विवाह के बाद कई बार लड़ाई झगड़े,तू तू मय मय होता है, पर इस सबके बाद पति पत्नी मे अटूट बंधन सदा सदा के लिए बना रहे।

अक्षत- अक्षत प्रतिक है, विवाह के बाद उनके दाम्पत्य जीवन मे अन्न की कभी कमी न हो। सदा भोजन से जुड़ी कोई संकट न आये। जिससे उनके जीवन मे कभी अकाल न छाए।

पुष्प- पुष्प प्रतीक है, सदा शांति, खुशहाली,और चारो और हरयाली का। जिससे कोई कलह कलेश उनके जीवन मे न आये।

मुद्रा- मुद्रा प्रतीक है, विवाह के बाद शुरु की गयी वर वधु के जीवन मे आर्थिक रूप से कोई समस्या न आए।जिससे सदा खुशहाली बरकरार रहे।

कन्यादान-
ब्रह्देव ने जब स्त्री की उत्त्पति की थी,तो बर्ह्म ने उसे 'हिता' शब्द से संबोधित किया था। हिता का अर्थ है जो दो कुल,परिवार,वंश के हित का आधार हो।

कन्यादान इस संसार मे बड़ा दान है। ये महादान है।
©©©गौरव कुमार