समूह निर्माण की प्रक्रिया-सामाजिक समूह कार्यकर्ता द्वारा महत्वपूर्ण कार्य - Group Formation Process

समूह निर्माण की प्रक्रिया-सामाजिक समूह कार्यकर्ता द्वारा महत्वपूर्ण कार्य - Group Formation Process 

समूह कार्य प्रक्रिया में समूह कार्यकर्ता की महती भूमिका होती है। कार्यकर्ता यह प्रयास करता है कि किस प्रकार से समूह के सदस्यों आपस में संबंध स्थापित करें। जिससे आवश्यक समूह कार्य प्रक्रिया को सम्पन्न किया जा सके। इसके लिए कार्यकर्ता द्वारा निम्नांकित प्रयास किये जाते है-

v समूह कार्य प्रक्रिया प्रारंभ होने के पश्‍चात नये सदस्यों का आगमन प्रारंभ हो जाता है जिससे कार्यकर्ता समूह सदस्यों के मध्य आपसी सामंजस्य का प्रयास करता है। उसी समय कार्यकर्ता का प्रयास रहता है कि वह संस्था एवं सदस्यों की वस्तुस्थिति से सभी सदस्यों को अवगत कराये।

v कार्यकर्ता के लिए यह आवश्यक होता है कि वह व्यक्ति एवं समूह दोनों का ज्ञान रखे और नये सदस्यों के शामिल होने संबंधी तथ्यों पर सोच-विचार कर निर्णय ले। यह भी ध्यान रखें कि समूह का प्रत्येक सदस्य उसकों स्वीकर करें साथ ही समूह की आवश्यकता का ज्ञान भी कार्यकर्ता को होना चाहिए।

v कार्यकर्ता को स्पष्ट रूप से समूह के संदर्भ में संभावित उद्देश्यों को निर्धारित कर लेना चाहिए और यदि कार्यकर्ता पहले से ही निर्मित समूह के साथ कार्य करना चाहता है तो उसे चाहिए कि वह उस समूह में शामिल होने से पूर्व उसके व्यापक उद्देश्यों की जानकारी अवश्य ही प्राप्त कर लें।

v समूह कार्य का एक मुख्य उद्देश्य नेतृत्व का विकास भी करना है। नेतृत्व विकास से कार्य सदस्य एक सूत्र में बंध जाते है तथा अपनेपन की भावना का विकास होता है। कार्यकर्ता को नेतृत्व की स्थिति का उपयोग उचित प्रकार से करना चाहिए।

v कार्यकर्ता में आवश्यक कुशलताएँ होना चाहिए। जिससे वह समूह में ऊर्जा का संचार कर सकें ओर उचित तकनीकों का प्रयोग कर समूह भावना को विकसित कर सके।

v समूह निर्माण प्रक्रिया के दौरान कार्यकर्ता के कार्य का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा समूह से पहले संपर्क है। इस संपर्क का उद्देश्य नियोजित किए जा रहे समूह के लिए उपयुक्त  सदस्यों को सुरक्षित या निश्चित करना तथा उस समूह में भागीदारी के लिए उनको तैयार करना है।

v कार्यकर्ता को संसाधनों के उपयोग का पूर्ण ज्ञान होना और साथ ही पत्र-पत्रिकाओं विज्ञापन,समाचार पत्र, संस्थानों को पत्र लिखना आदि कुशलताओं का ज्ञान होना आवश्यक हो जाता है।

v कार्यकर्ता अभिकरण द्वारा समूह की योजना बनाने के ठीक इसी समय से समूह के उद्देश्य संरचना, सदस्यता, प्रचार का कार्य हाथ में लेना, संभावित सदस्यों  का चयन और भर्ती करना इत्यादि के संबंध में एक विस्तृत रूपरेखा तैयार कर लेनी चाहिए, कार्यकर्ता को बहुत ही महत्त्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन करना होता है जिनका इसके लक्ष्यों की उपलब्धियों में समूह की सफलता पर सीधा प्रभाव पड़ता है वे हैं व्यक्तिगत सदस्य् तथा समूह।  समूह निर्माण की व्यापक प्रक्रिया की पहले ही योजना बनानी चाहिए तथा समूह की सफलता के लिए प्रथम बैठक बहुत ही व्यापक एवं महत्त्वपूर्ण होती है।

v कार्यकर्ता यह भी दायित्व होता है कि वह समुदाय से संबंधित सामुदायिक नेताओं, स्थानीय पंचों को समूह कार्य से संबंधित उद्देश्यों से सभी को अवगत करायें।

v समूह कार्यकर्ता के लिए अत्यन्त ही आवश्यक है कि वे समूह की संरचना तथा उसके विशेष लक्षणों के संबंध में विस्तृत नियोजन के निर्णय को तैयार करें।

v कार्यकर्ता को यह निश्चित कर लेना चाहिए कि क्या प्रस्तावित समूह को आरंभ करने के लिए किसी प्राधिकारी की अनुमति की आवश्यकता होगी। ऐसे कई कार्यक्रम एवं समूह होते है जिनको आरंभ करने के पूर्व संभावित अधिकारियों से स्वीकृति आवश्यक होती है।

 इन सब तथ्यों के अतिरिक्त समूह कार्यकर्ता समूह को स्थापित करने तथा निर्मित करने से पहले समूह कार्य की प्रणालियों को लागू किया जाना चाहिए। व्यवासायिक समाज कार्यकर्ता को कुछ महत्वयपूर्ण प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने चाहिए तथा उसके पश्चात निर्णय लिए जाने चाहिए।

ü सामाजिक अभिकरण के क्या उद्देश्य है?

ü सामाजिक अभिकरण का लक्ष्य समूह कौन स्थापित करेगा ?

ü क्या समूह कार्य द्वारा सामूहिक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है ?

ü जिन सदस्यों के समान उद्देश्य है उनकी पहचान करना ?

ü क्या जो समय, स्थान,दिन व वातावरण का निर्धारण किया गया है वह उचित है?

ü समूह का उद्देश्य कौन निर्धारित कर रहा है?

ü समूह के कौन से भावी सदस्य होते हैं ?किस प्रकार से उनका समूह में चयन और उन्‍हें सूचीबद्ध किया जाता है ?

ü सदस्यों के चयन के पीछे आधार क्या होगा? क्या एक-दूसरे से परिचित व्यक्तियों के आधार पर चयन किया जायेगा? कार्यकर्ता सुविचार के तहत अपने हित-लाभ, कौशल, आवश्यकता समस्या या सरोकारों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित समूह के लिए परिप्रेक्ष्य सदस्यों का चयन कर सकता है?

ü समूह में सदस्यों की संख्या का निर्धारण कैसे किया जायेगा ?

ü समूह में कौनसे कार्यक्रमों का पालन किया जाएगा ?चर्चा, खुली या विषम-मूलक होगी ? क्या गतिविधियाँ-खेल, कला और शिल्प कला, नाटक, भूमिका निभाना, सामुदायिक सेवा इत्यादि एक साथ होगी ?

ü अनेक गैर-सामाजिक कार्य संस्थाएँ जैसे विद्यालय, अस्पताल, बन्दीगृह, आदि में सामाजिक कार्यकर्ता को किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता है ?इसका निर्धारण करना।

ü यह निर्णय लेना कि किस प्रकार से समूह की शुरूआत की जाए, इसकी पूरी अवधि में समूह की निगरानी किस प्रकार की जाए, किस प्रकार से समूह के कार्य निष्पादन तथा विकास का मूल्यांकन किया जाए और कब और कैसे समूह को समाप्त किया जाए ? यह सब बातें समूह के सक्षम योजना के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है।

अतः उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि व्यवासायिक समूह कार्यकर्ता को कुछ महत्वपूर्ण प्रश्‍नों के उत्तर प्राप्त करने चाहिए तथा उसके पश्चात निर्णय लिए जाने चाहिए।

समूह निर्माण को प्रभावित करने वाले कारक

हम सभी एक ही समय में विभिन्न प्रकार के समूहों के सदस्य होते है जैसे- परिवार के, मित्रमंडली, कार्य संगठनों के, धार्मिक संस्थाओं के इत्यादि। प्रत्येक समूह के अपने अलग-अलग कार्य एवं उद्देश्य होते है। हम अपने-अपने हितों की पूर्ति के लिए समूह से जुड़ते हैं। समूह कार्य प्रक्रिया में जब सदस्य भाग लेता है तो वह भी इन्हीं संस्थाओं के माध्यम से समूह का सदस्य बनने आता है कई ऐसे कारक होते है, जो एक व्यापक किस्म के समूहों में प्रवेश करने और बने रहने के हमारे निर्णय को प्रभावित करते है ये प्रकार निम्‍नानुसार के हो सकते है-

ü समूह के सदस्यों के प्रति कार्यकर्ता का विशेष आकर्षण।

ü समूह की गतिविधियां।

ü लक्ष्य तथा कार्य समूहों के साथ जुड़ना।

ü समूह के बाहर की आवश्यकताओं एवं लक्ष्यों को प्राप्त करना

  इसके अतिरिक्त कुछ अन्य कारक भी है जो समूह को प्रभावित करते है जैसे- कार्यात्मक विभाग, शारीरिक गतिविधियाँ, बौद्धिक प्रयास, भावनात्मक आवश्यकताएँ या संरक्षण, और मित्रता बनाना। विल्सरन तथा रीलांड (1949) ने विभिन्न  कारकों पर प्रकाश डाला है -‘‘प्रत्येक सामाजिक कार्यकर्ता जो समूहों के साथ कार्य करता है, उन्हें इन कारकों की जानकारी रखना अत्यन्त आवश्यक है समूह का आकार, स्थापना-अभिकरण तथा समुदाय जिसमें समूह स्थापित करना है, सदस्यों का व्यक्तित्व, उनकी सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि तथा अभिकरण और समुदाय में इस समूह से दूसरे समूहों के संबंध इत्यादि ये सब प्रमुख कारक हो सकते है जिन्हें कार्यकर्ता को कार्य के दौरान ध्यान में रखना चाहिए।