समूह विकास में समूह कार्यकर्ता की भूमिका - Group activist/ Social Worker role in the development of group
समूह विकास में समूह कार्यकर्ता की भूमिका - Group activist/ Social Worker role in the development of group
समूह कार्य की उपर्युक्त अवस्थाओं में
समूह कार्यकर्ता की महती भूमिका है। जिसके द्वारा कार्यकर्ता प्रत्येक अवस्था व
चरण में समूह सदस्यों की सहायता करता है एवं सामूहिक लक्ष्य प्राप्ति हेतु सदस्यों
को प्रेरित करता है। कार्यकर्ता सामूहिक कार्य-प्रणाली द्वारा समूह-सदस्यों के
विकास,
उन्नति, शिक्षा,एवं
सांस्कृतिक प्रगति पर जोर देता है। कार्यकर्ता प्रत्येक स्तर पर समूह को समझने का
प्रयास करता है और समूह में उत्पन्न समस्या का निवारण प्रस्तुत करता है । समूह
कार्यकर्ता के कार्यों और उसकी भूमिका को निम्नलिखित आधारों पर समझा जा सकता है-
समूह कार्यकर्ता के कार्य - सामूहिक
कार्यकर्ता के कार्यों के निम्नलिखित आधारों पर समझा जा सकता है -
समूह निर्माण के संबंध में - समूह
निर्माण के संबंध कार्यकर्ता निम्नलिखित आधारों पर कार्य करता है-
कार्यकर्ता यह निर्धारित करता है कि
किस प्रकार के समूह का निर्माण किया जा सकता है जैसे मनोरंजनात्मक, शिक्षात्मक, सामाजिक या मिश्रित।
समूह कार्य की कार्य-प्रणाली
निर्धारित करता है जैसे- खेल-कूद,ड्रामा,वार्तालाप इत्यादि।
स्थान का चयन करता है।
समय का निर्धारण करता है।
समूह अवधि का निर्धारण करता है।
संसाधन का निर्धारण करता है।
माध्यमों का निर्धारण करता है।
समूह का उद्देश्य निर्धारित करता है।
सदस्यों का चयन निर्धारित करता है।
संस्था अथवा समुदाय में स्त्रोंतों का निर्धारण करता है।
कार्यक्रम नियोजित करने में सहायता करना-
कार्यकर्ता समूह के साथ मिलकर कार्यक्रमों को नियोजित करने में समूह सदस्यों
की सहायता करता है। वह कार्यक्रम को अधिक प्रभावशाली एवं रचनात्मक बनाने में समूह
की सहायता करता है, जिससे अधिक से अधिक समूह की आवश्यकताओं
को पूरा किया जा सके और इसके अतिरिक्त वह समूह को कार्यक्रम हेतु दिशा-निर्देश
देता है।
समूह की रूचियों को खोजने में सहायक का कार्य- कार्यकर्ता समूह सदस्यों की विभिन्न रूचियों की खोज करता है।
अन्तःक्रिया का निर्देशन -
समूह
कार्य प्रक्रिया में समूह सदस्यों के बीच कुछ ना कुछ अंतःक्रिया अवश्य होती है यही
अन्तः क्रिया मूल्यांकन कार्यकर्ता द्वारा किया जाता है। वह सकारात्मक एवं
नकारात्मक प्रत्युत्तरों को देखता है वह सफलता एवं असफलता के कारणों पर प्रकाश
डालता है। टेकर ने निम्नलिखित क्षेत्रों का ज्ञान कार्यकर्ता के लिए आवश्यक बताया
है-
कार्य का विवरण ।
बारम्बारता- कार्यकर्ता देखता है कि
सदस्य कितनी बार तथा कैसे कार्य में भाग लेते है।
अवधि - सदस्यों के द्वारा
कार्यक्रमों में भाग लेने की अवधि को देखता है।
अन्तःक्रिया की दिशा-दिशा की दो
श्रेणियां होती है-एक व्यक्ति की ओर तथा दूसरी उद्देश्य की ओर । कार्यकर्ता
अन्तःक्रिया की दिशा की ओर ध्यान देता है।
नेतृत्व का विकास करना-
समूह
कार्यकर्ता का मुख्य उद्देश्य समूह के सदस्यों में नेतृत्व का विकास भी करना है।
कार्यकर्ता द्वारा यह भी प्रयास किया जाता है कि जो सदस्यों में सकारात्मक नेतृत्व
के गुण विद्यमान है और वे उत्तरदायित्व को ग्रहण कर सकतें है ऐसे सदस्यों हेतु
प्रयास करता है। समूह कार्यकर्ता यह जानता है कि वह समूह के साथ कुछ ही दिन रहेगा
और एक निश्चित समय पश्चात उसे समूह का समापन करना पडेगा इसलिए वह कोशिश करता रहता
है कि समूह के एसे सदस्य जिनमें नेतृत्व हेतु सकारात्मक भाव हो ऐसे लोगो के निरंतर
संपर्क में रहता है और इस प्रकार से निर्देशित करता है जिससे समूह-नेता समूह का
प्रिय सदस्य हो जाता है। वह समूह के प्रत्येक सदस्य को कोई जिम्मेदारी वाला कार्य
सौंपता है जिससे समूह में एकता भी बनी रहें और किसी भी प्रकार उच्च-निम्न का भाव
जाग्रत ना हो सकें।
मूल्यांकन करना-
समूह कार्यकर्ता जैसे-जैसे कार्यक्रम प्रक्रिया
को आगे बढता रहता है वह समूह व सदस्यों का मूल्यांकन करता रहता है। वह प्रत्येक
सदस्यों की भूमिका का भी मूल्यांकन करता है। कार्यकर्ता हमेशा प्रयत्न रहता है कि
वह सदस्यों द्वारा क्रियान्वित किये जा रहे कार्यों का प्रत्येक स्तर पर मूल्यांकन
करते रहें टेकर ने मूल्यांकन के लिए निम्नलिखित कार्यों का उल्लेख किया है-
संस्था को ध्यान में रखकर व्यक्तियों
और समूहों के उद्देश्यों का निर्धारण करना।
समूह व व्यक्ति के विकास व उन्नति को
निश्चित करने के लिए मापदंड का ज्ञान रखना।
तीव्र विकास एवं परिवर्तन के लिए
कार्यक्रम की योजना तैयार करना।
विकास व उन्नति के मापदण्ड के आधार
पर अभिलेखों का विश्वेषण करना।
यह निश्चित करने के लिए कि क्या समूह
उद्देश्यों प्राप्त कर रहा है, विश्लेषणात्मक आँकड़ों की
व्याख्या करना।
कार्यक्रम, विषय
वस्तु और ढंगों का पुनरावलोकन करना।
उद्देश्यों को संशोधित करना तथा
मूल्यांकन में निरन्तरता बनाये रखना।
संस्था से संबंधित कार्य -
सामाजिक
समूह कार्य में मुख्य रूप से तीन प्रकार के अंगों का वर्णन किया जाता है -
कार्यकर्ता ,समूह एवं संस्था । सामाजिक संस्था द्वारा ही
कार्यकर्ता समूह को सेवा प्रदान करता है। कार्यकर्ता संस्था के संबंध में यह जानने
का प्रयास करता है कि-
संस्था के प्रमुख उद्देश्यों के
संबंध में जानकारी एकत्रित करता है।
संस्था की सामाजिक,आर्थिक,भौगोलिक व मनोसामाजिक स्थिति का पता लगाना ।
संस्था में मुख्य रूप से उपलब्ध
सुविधाओं को ज्ञात करना ।
संस्था की कार्यप्रणाली को ज्ञात
करना।
संस्था की नीतियों का अध्ययन कर समूह
को संस्था की नीतियों के अनुरूप मोड़ने का प्रयास करना ।
संस्था की सभी गतिविधियों में भाग
लेना।
संस्था को समूह के हित में सोचने के लिए अंतर्दृष्टि देता है।
समूह कार्यकर्ता की भूमिका:-
सामूहिक कार्यकर्ता समूह की आवश्यकता एवं सामूहिक स्थितियों को ध्यान में रखकर अपनी भूमिका को निभाता हैं। कुछ विद्वानों ने मुख्य रूप से समूह कार्यकर्ता की निम्नलिखित भूमिकाओं को स्पष्ट किया है-
सार्थकता की भूमिका (Enabler): -
कार्यकर्ता का सर्वप्रथम यह प्रयास रहता है कि वह अपने समूह
-सदस्यों की आवश्यकताओं एवं समस्याओं को समझे एवं उन्हें सुलझाने में सहायता करें।
अतः वह उन स्रोतों का पता लगाता है जिनसे आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है तथा
सदस्य सहयोग ले सकते है। वह समूह निर्माण के लिए व्यक्तियों में अपनी वर्तमान
स्थिति के प्रति असंतोष उत्पन्न करता है, जिससे वे परस्पर
सहयोग एवं संयुक्त प्रयास के लिए एकत्रित होते है। कार्यकर्ता सभी के मतानुसार
समूह का निर्माण करता है। वह सदस्यों में अपनी समस्याओं के समाधान हेतू सक्षमता को
विकसित करता है तथा कार्यक्रम के चयन हेतु भी सदस्यों में जागरूकता पैदा करता है
अतः इस आधार पर वह एक सार्थकता की भूमिका को निभाता है।
पथ-प्रदर्शक के रुप में (The Guide) :-
कार्यकर्ता एक पथ-प्रदर्शक की भांति समूह को रास्ता
दिखाता है। वह सदस्यों को संस्था व समुदाय की सुविधाओं एवं अन्य स्रोतों से अवगत
कराता है, जिनकी उन्हें आवश्यकता तो है परन्तु वे जानते नहीं
है। वह सदस्यों की अपनी भूमिका का एहसास कराता है तथा आवश्यक मुद्दों को स्पष्ट
करता है। आवश्यकता पड़ने पर प्रत्यक्ष रुप से समूह की सहायता करता है। वह सामूहिक
अन्तः र्क्रिया का निर्देशन करता है।
अधिवक्ता के रुप में (The Advocate) :-
जिस प्रकार एक
अधिवक्ता अपने मुवक्किल के लिए उसके न्याय के लिए जज के सामने अपने पक्षों को रखता
है उसी प्रकार कार्यकर्ता सदस्यों की
समस्याओं को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखता है तथा आवश्यक सेवायें प्रदान करने की
सिफारिश करता है।
विशेषज्ञ के रुप में (The Expert) : -
कार्यकर्ता
सदस्यों को आवश्यकता पड़ने पर एक विशेषज्ञ की भांति सलाह देने का कार्य करता है। वह समूह-समस्या का विश्लेषण करता है तथा
उसका निदान किस प्रकार से किया जाय उसका हल खोजता है। समूह को विधिवत् तथा अधिक
प्रभावकारी होने के लिए उपयुक्त तरीके बतलाता है। वह संस्था व समूह के कार्यक्रमों
का मूल्यांकन भी करता है, जिससे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित
रूप से सम्पन्न किया जा सके।
चिकित्सक के रुप में (The Therapist) : -
जिस प्रकार एक चिकित्सक मरीज के रोगों के अध्ययन के पश्चात
उचित इलाज करता है, उसी प्रकार एक कार्यकर्ता समूह की कुछ
मुख्य समस्याओं को चयनित कर उनका समाधान करने में समूह की सहायता करता है। वह समूह
का उन शक्तियों से परिचय करवाता है जो विघटनात्मक है तथा जिनका प्रत्यक्ष रुप से
प्रभाव पड़ता है। वह समूह को इस प्रकार से प्रेरित करता है जिससे सदस्य स्वयं
परिवर्तन की माँग करते है। वह सदस्यों के अहं को सुदृढ़ करता है।
परिवर्तक के रुप (The Change) : -
कार्यकर्ता सदस्यों की आदतों में परिवर्तन लाने के लिए अनेक
कार्यक्रम करता है, क्योंकि कभी-कभी आदतों के कारण ही समस्या
उठ खड़ी होती है और परिवार व समाज में विघटन उत्पन्न कर देती है। कार्यकर्ता
सदस्यों के कार्य करने के तरीकों में भी परिवर्तन लाने का प्रयास करता है ,
क्योंकि जब तक कार्य करने के ढंगों में बदलाव नही आयेगा तब तक समूह
किसी भी प्रकार से विकास नहीं कर सकेगा। वह सदस्यों के मनोवृत्तियों मे भी
परिवर्तन लाने के कार्यक्रम प्रस्तुत करता है जिससे की समूह को मजबूती प्रदान हो
सके।
सूचना दाता के रुप में (The Imformer) : -
कार्यकर्ता एक सूचनादाता के रूप में समूह के साथ कार्य
करता है। वह समूह को संस्था के संदर्भ में उपलब्ध सुविधाओं के अतिरिक्त समुदाय की
आवश्यकताओं एवं समूह सदस्यों को प्राप्त होने वाली समस्त सुविधाओं के संदर्भ में
समूह की सहायता करता है।
सहायक के रुप में (The
Helper) : - कार्यकर्ता समूह की सहायता लक्ष्य निर्धारण तथा लक्ष्यों को
प्राप्त करने के तरीकों को निश्चित करनें में करता है। वह संस्था से सहायता लेने
में समूह की मदद करता है। कार्यक्रमों के निर्धारण तथा उनका चयन करने में वह
सहायता करता है। समूह में सामूहिक चेतना तथा सामूहिक भावना विकसित करने के लिए
समूह की सहायता करता है।
अतः उपर्युक्त आधारों पर यह कहा जा सकता है कि समूह कार्यकर्ता समूह के प्रत्येक चरण व अवस्था में प्रारंभ से समापन तक अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को निभाता है एवं इन आधारों पर वह समूह का लक्ष्य प्राप्ति हेतु सहायता करता है।
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