सामाजिक समूह कार्य में मूल्य और सिद्धांत Principals and value of social group work

फ्रीडलैंडर के मतानुसार समाज कार्य के मौलिक मूल्यों एवं सिद्वान्तों का जन्म स्वतः नहीं हुआ है अपितु इनकी जड़े उन गहरे एवं उपजाऊ विश्‍वासों में मिलती हैं जो सभ्यताओं को सीखते हैं। अमेरिका की प्रजातान्त्रिक व्यवस्था का आधार नैतिक एवं आध्यात्मिक समानता, वैयक्तिक विकास की स्वतन्त्रता , सुअवसरों के स्वतंत्र चुनाव की स्वतंत्रता, न्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा, वैयक्तिक स्वतंत्रता, पारस्परिक प्रतिष्ठा एवं सर्वजन के अधिकार हैं। प्रजातन्त्र के यह सभी आदर्श अभी तक पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं किए जा सके है तथा समाज कार्य इन्हीं आदर्शात्मक की प्राप्ति का प्रयास कर रहा है।
फ्रीडलैंडर के मतानुसार समाज कार्य के मौलिक मूल्यों एवं सिद्वान्तों का जन्म स्वतः नहीं हुआ है अपितु इनकी जड़े उन गहरे एवं उपजाऊ विश्‍वासों में मिलती हैं जो सभ्यताओं को सीखते हैं। अमेरिका की प्रजातान्त्रिक व्यवस्था का आधार नैतिक एवं आध्यात्मिक समानता, वैयक्तिक विकास की स्वतन्त्रता , सुअवसरों के स्वतंत्र चुनाव की स्वतंत्रता, न्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा, वैयक्तिक स्वतंत्रता, पारस्परिक प्रतिष्ठा एवं सर्वजन के अधिकार हैं। प्रजातन्त्र के यह सभी आदर्श अभी तक पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं किए जा सके है तथा समाज कार्य इन्हीं आदर्शात्मक की प्राप्ति का प्रयास कर रहा है।
हर्बर्ट बिस्नो ने समाज कार्य के मूल्यों को चार क्षेत्रों में विभाजित किया है- प्रथम व्यक्ति की प्रकृति के संदर्भ में, द्वितीय समूहों, व्यक्तियों एवं समूहों और व्यक्तियों के आपसी संबंधो के संदर्भ में, तृतीय समाज कार्य प्रणालियों एवं कार्यों के संदर्भ में एवं चतुर्थ सामाजिक कुसमायोजन एवं सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में। हर्बर्ट बिस्नो द्वारा कहें गये इन समस्त मूल्यों को यदि हम समायोजिमत करके अध्ययन करें तो यही स्पष्ट होता है कि अपने अस्तित्व के कारण ही प्रत्येक व्यक्ति मूल्यावान है, यह मूल्य समस्त समाज कार्य दर्शन का आधार स्तम्भ है । साथ ही स्पष्ट होता है कि समाज कार्य का द्विमुखी दृष्टिकोण है। एक ओर समाज कार्य व्यक्तियों का संस्थागत समाज के साथ समायोजन स्थापित करने में सहायता करता है और दूसरी ओर यह संस्थागत समाज के आवश्यक क्षेत्रों में परिवर्तन लाने का प्रयास करता है। समाज कार्य में सिद्धांतों का भी अपना अलग ही महत्व है जो कार्य को एक क्रमबद्धता के साथ करने में हमारी सहायता करते है और यही क्रमबद्धता समूह कार्य के सिद्धांतों मे भी प्रतीत होती है समूह कार्य के सिद्धांतों में मुख्य रूप से -नियोजन का सिद्धांत, लक्ष्यों की स्पष्टता का सिद्धांतसौद्देश्य संबंध का सिद्धांत, निरंतर व्यक्तिकरण का सिद्धांत, निर्देशित सामुहिक अंतःक्रिया का सिद्धांत, जनतंत्रीय सामुहिक आत्मनिश्चयिकरण का सिद्धांत, लोचदार कार्यात्मक संगठन का सिद्धांत, प्रगतिशील कार्यक्रम अनुभवों का सिद्धांत, साधनों के उपयोग का सिद्धांत, मूल्यांकन का सिद्धांत, भावनाओं के उद्देश्य पूर्ण प्रगटन का सिद्धांत, आत्म-संकल्प का सिद्धांत आयी मुख्य सिद्धांतों के रूप में देखे जाते है जिनके माध्यम से संपूर्ण समूह कार्य प्रक्रिया को लक्ष्य प्राप्ति हेतु आसानी से किया जा सकता है।