समूह विकास की अवस्थाएं - Stages Of Group Develpment
समूह विकास की अवस्थाएं - Stages Of Group Develpment
समूह कार्य प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण अवस्थाएँ होती है जिनसे गुजरकर संपूर्ण समूह कार्य प्रक्रिया को सपन्न किया जाता है जो एक निश्चित चरण के अनुसार होती है जिससे लक्ष्य प्राप्ति हेतु मार्गप्रशस्त किया जाता है। अवस्थाओं को परिवर्तित रूप में चरण भी कहा जाता है। समूह अवस्था के माध्यम से समूह कार्य को एक क्रमबद्धता प्रदान की जाती है जिससे कार्य को एक निरंतर प्रक्रिया में सम्पन्न किया जा सकें । कुछ विद्वानों ने अपनी-अपनी विचारधाराओं के आधार पर समूह विकास की अवस्थाओं को निम्नलिखित प्रकार से वर्णित किया है :
बेल्स (1950) ने समूह कार्य अवस्था
को अपना स्वरूप प्रदान करते हुए दिशा-निर्धारण (Orientation), मूल्यांकन (Evaluation) एवं निर्णय लेना (Decision
making) की क्षमता के आधार पर इसका वर्णन किया है।
टकमैन (1963 )ने समूह कार्य अवस्था को फोरमिंग (Forming) स्टोरमिंग (stroming ) नोर्मिग (Norming ) परफार्मिंग (Perfomig) एवं एडजर्निंग (Adjourning) के आधार पर वर्णिन किया है।
कैलिन (1972) के अनूसार अवस्था
दिशा-निर्धारण (orientation) विरोध (Resistance) समझौता (Negotiation) घनिष्ठता (Intimacy) समापन (Termination) स्तर को मुख्य रूप से अंकित
किया है।
ट्रैकर 1972 ने समूह अवस्था को-
प्रारंभ (Beginning) समूह भावना का आविर्भाव (Emergence
of group feeling)मित्रता का विकास (Developmen&t of
bond), सशक्ति समूह (Strong group) समूह
भावना का पतन (Decline in group feeling) का वर्णन समूह
अवस्थाओं में किया है।
गारलैंड जोन्स एवं कोलोन्ड्नी (1976)
ने समूह कार्य अवस्था को निर्धारित करते हुऐं बताय कि समूह मुख्य रूप से, मान्यता-पूर्व (Pre&affiliation) अधिकार एवं
नियंत्रण (Power and control) घनिष्ठतता (Intimacy) अलगाव (diffiesertiation) विभाजन (Separation)
समाप्ति (Ending) के रूप में कार्य करता है।
नोरदन एवं करलैंड 2001 ने समूह कार्य
की अवस्थाओं की, समावेश-दिशा निर्देश (Inclusion&orientation),अनिश्चितता-पर्यवेक्षण(Unccrtainty&eÛploration), पारस्परिकता एवं लक्ष्यव सफलता (Mutuality and goal achievement) विभाजन-समापन (Separation&permination) को मिलकर
बनने का वर्णन किया है।
समूह कार्य की विभिन्न विद्वानों द्वारा
दी गई अवस्थाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि समूह कार्य के मुख्य रूप तीन से
लेकर छः अवस्थाऐं है जो मुख्यतः निम्नलिखित चरण प्रदान करती है-
v प्रथम अवस्था : योजना और समूह
निर्माण (आरंभ चरण )
v द्वितीय अवस्था : पर्यवेक्षण (आरंभिक
सत्र)
v तृतीय अवस्था : निष्पादन (कार्य चरण)
v चतुर्थ अवस्था : मूल्यांकन (विश्लेषण
चरण)
v पंचम अवस्था : समापन (अंतिम चरण)
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