इंग्‍लैण्‍ड में दान संगठन समिति - Beginning Of Charity Organisation In England.

Beginning Of Charity Organisation In England.
 19 वीं शताब्‍दी में निर्धन सहायता एवं सामाजिक दर्शन को प्रभावित करने की दृष्टि से दान संगठन समिति की विशेष भूमिका है। इंग्‍लैड में 1834 से पूर्व निर्धन सहायता पर काफी व्‍यय किया जाता था। देश के परोपकारी व्‍यक्ति मिश्रित भिक्षा गृहों की क्रूरता एवं हीनता से अपने जानने वाले एवं अन्‍य व्‍यक्तियों, बच्‍चों और अपंगों को बचाने के लिए प्रयाग करने लगे।
थामन्‍स चामर्स (Thomas Chalmers) के विचारों में व्‍यक्ति के पुनवास के लिए उसमें आत्‍म–निर्भरता लाना आवश्‍यक है। इन सहायता समितियाँ के अनुसार निर्धन का कारण उसका व्‍यक्तिगत दोष माना जाता था यही विचार निर्धन सहायता अधिकारियों का था। इस परिस्थिति में सुधार लाने की दृष्टि से 1869 में लंडन में Society for Organizing Charitable Relief and Repressing Mentality की स्‍थापना की गयी। कालान्‍तर में इसका नाम C. O. S.  (Chalmers Organizing Society) कर दिया गया। इस समिति के सिद्धान्‍त थामस चामर्स के विचारों पर आधारित थे। इनका विचार था कि व्‍यक्ति के पुनर्वास के लिए उसे आत्‍मनिर्भर बनाना आवश्‍यक है। इस Society ने चामर्स के इन विचारों को मान लिया कि – व्‍यक्ति अपनी निर्धनता के लिए उत्तरदायी है एवं सहायता प्राप्‍त करना उसके आत्‍म सम्मान को नष्‍ट करता है एवं उसे भिक्षा पर रहने पर विवश करता है। Society ने यह भी माना कि- निर्धन को अपना भरण पोषण अपनी योग्यताओं को प्रयोग करके,करने के लिए जाना चाहिए।

उस समय की दान पद्धतिके एक महान आलोचक थामस चालर्स (1780-1847) थे। उनकी विचार था कि प्रचलित सार्वजनिक एवं चर्च की दान-पद्धति निरर्थक है। उससे निर्धन व्‍यक्ति अनैतिक हो जाते हैं और उनकी आत्‍मावलम्‍बन की इच्‍छा नष्‍ट हो जाती है। उनका विचार था कि इस प्रकार का दान निर्धनो के सम्‍बन्धियों मित्रों तथा पड़ोसियों की सहायता करने की इच्‍छा को नष्‍ट कर देता है और इससे परोपकारी व्‍यक्तियों की सहायता करने की उत्‍सूकता का प्रयोग नही हो पाता।