एक अनुशासन के रूप में सामाजिक कार्य के उद्भव(emergence of social work as a discipline) इंग्‍लैड़ में समाज कार्य


एक अनुशासन के रूप में सामाजिक कार्य के उद्भव
(emergence of social work as a discipline)
इंग्‍लैड़ में समाज कार्य 

1556 में संसद द्वारा एक अधिनियम पारित हुआ जिसके अनुसार प्रत्‍येक रविवार को गिरजाधरों द्वारा बीमार गरीबों की सहायता के लिए धन का संग्रह किया जाने लगा। इसके साथ-साथ स्‍वस्‍थ व्‍यक्तियों के लिए भीख माँगना वर्जित कर दिया गया। 1547 में पारित एक अधिनियम के अनुसार स्‍वस्‍थ भिखमंगों के शरीर में V चिन्‍ह गुदवाने की व्‍यवस्‍था कर दी गई। परंतु इस प्रकार के अधिनियम समस्‍या को हल करने के बजाय समस्‍या को दबाने के दृष्टिगत से पारित हुए थे।

  1576 में सुधारगृह (House of Correction)  स्‍थापित किए गए जिनमें पटसन, पटुआ लोहा एकत्रित किया जाता था एवं स्‍वस्‍थ शरीर वाले निर्धनों, विशेष रूप से युवकों को कार्य करने के लिए बाध्‍य किया जाता था । निर्धनों के लिए 1601 में एलिजाबेथ का निर्धन कानून (Elizabethan  Poor Law) बनाया गया जिसे “43-A एलिजाबेथ के नाम से जाना जाता हैा इस कानून के प्रमुख प्रावधान निम्‍नलिखित हैं-

इस कानून के प्रमुख प्रावधान निम्‍नलिखित हैं- 

žकिसी भी ऐसे व्‍यक्ति का पंजीकरण न किया जाए जिसके सम्‍बंधी, पति अथवा पत्‍नी, पिता अथवा पुत्र सहायता कर सकने की स्थिति में हों।
žनिर्धन कानून के अन्‍तर्गत 3 प्रकार के निर्धनों को सहायता प्रदान करने की व्‍यवस्‍था की गयी।
žस्‍वस्‍थ शरीर वाले निर्धन।
žशक्तिहीन निर्धन ।
žआश्रित बच्‍चे।
žयदि बच्‍चे अपने निर्धन माता-पिता या सम्‍बंधियों के साथ रह सकें तो उन्‍हें उत्‍पादन के लिए आवश्‍यक ऐसी वस्‍तुएँ प्रदान की जाएँ जिनसे वे घेरलू उद्योग गृहों में रखा जाए।
žनिर्धन सहायता हेतु वित्तीय व्‍यवस्‍था करने के लिए निर्धन कर लगाकर एक कोष स्‍थापित किया गया था जिसमें निजी दान, कानून का उल्‍लंघन करने  पर किए गए जुर्माने इत्‍यादि से प्राप्‍त धनराशि जमा की जाती थी।
žनिर्धनों के ओवरसियर इस निर्धन कानून को लागू करने एवं उसका प्रशासन सम्‍बंधी कार्य करते थे। इनकी नियुक्ति शान्ति के न्‍यायाधीस या मैजिस्‍ट्रेट द्वारा की जाती थी। इन अधिकारियों का कार्य निर्धनों से सहायता के लिए प्रार्थना पत्र लेना उनकी सामाजिक दशाओं का पता लगाना एवं किस प्रकार की सहायता दी जाए इससे सम्‍बंधित सभी निर्णय लेना था।

ž- इस प्रकार 1601 का यह निर्धन कानून इंग्‍लैड़ में 300 वर्षों तक जान सहायता के क्षेत्र में अपेक्षित मानदण्‍ड निर्धारित करते हुए निर्धनों को सहायता प्रदान करने में महत्‍वपूर्ण्‍ भूमिका निभाता रहा।
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ž- इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया कि अपने क्षेत्रके निर्धनों की सहायता का उत्तरदायित्‍व स्‍थानीय समुदाय पर होना चाहिए  । किसी भी एक स्‍थान पर अन्‍य स्‍थानों से आकर निर्धन जमा न हों इसके लिए 1662 में the Law of Settlement पारित किया गया।
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ž- 1982 में Work Houses Act के बन जाने के बाद ब्रिस्‍ट्रल तथा अन्‍य शहरों में कार्य गृहों की स्‍थापना की गयी। जिनमें वहाँ निर्धन प्रौढ़ो एवं बच्‍चे को कताई-बुनाई इत्‍यादि के प्रशिक्षण अवसर प्रदान किए गए।
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ž- इन संस्‍तुतियों के आधार पर 1834 में नया निर्धन कानून बनाया गया। इससे पहले सहायता की विरोधता कंगाली में वृद्धि एवं निर्धन कर के बोझ के कारण 1832 में एक आयोग संगठित किया गया जिसने दो वर्षों तक निर्धन कानून के प्रशासन का एक विस्‍तृत सर्वेक्षण करके 6 मुख्‍य सिफारिशें की –


निर्धन कानून के प्रशासन का एक विस्‍तृत सर्वेक्षण करके 6 मुख्‍य सिफारिशें की

žआंशिक दान की समाप्ति।
žसभी स्‍वस्‍थ शरीर सहायता प्रार्थियों को कार्य गृहों में रखा जाना।
žबीमार, अपंग एवं छोटे बच्‍चों वाली विधवाओं के लिए outdoor relief प्रदान करना ।
žगाँवों के सहायता कार्यों को मिलाकर poor law union में पुन: संगठित करना।
žनिर्धन सहायता पाने वालों की दशाओं को समुदाय में कार्य करने वाले व्‍यक्तियों की दशाओं से कम आ‍कर्षित बनाना। (Principle of less eligibility)
žनियंत्रण के लिए एक केन्‍द्रीय मण्‍डल की स्‍थापना।

ž- अन्‍तत: इन सिफारिशों के आधार पर एक नया कानून बनाया गया जो एक सौ साल तक चलता रहा। यह कानून The New Poor Law के नाम से जाना जाता है। इस कानून के आधार पर निर्धन सहायता व्‍यय को ½ कम कर दिया। 200 कार्य गृह स्‍थापित किए गए एवं पुराने गृहों में सुधार किया गया। निर्धनों के पूरे परिवारों को इन कार्य गृहों में रखा गया। सभी प्रकार के व्‍यक्तियों को एक ही संस्‍था में रखा जाने लगा। अनुशासन का कठोरता से पालन होने लगा जिससे इन गृहों की लोकप्रियता समाप्‍त हो गई।
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The Poor Law Commission of 1905

žबीसवीं शताब्‍दी के आरम्‍भ में इंग्‍लैड़ में बेरोजगारी बहुत बढ़ गई। मुख्‍य रूप से कोयला खानों के श्रमिकों एवं उनके परिवारों ने निर्धन सहायता माँगना आरम्‍भ कर दिया। अत: 1905 में लार्ड जार्ज हेमिल्‍टन की अध्‍यक्षता में निर्धन कानून एवं दु:ख निवारण शाही आयोग (Royal Commission on Poor Law and Relief of Distress) का गठ़न किया गया। इस आयोग ने 4 सिफारिशें की –
žThe Poor Law एवं संरक्षकों के मण्‍डल के स्‍थान पर काउण्‍ट्री कौन्सिल स्‍थापित की जाए जिससे स्‍थानीय प्रशासन को ¾ तक कम किया जा सके।
žनिर्धन सहायता के दण्‍डात्‍मक पक्ष को समाप्‍त करके उसके स्‍थान पर मानवीय जन सहायक कार्यक्रम का दुष्टिकोन रखा जाए ।
žमिश्रित भिक्षा गृह समाप्‍त कर दिया जाए। मानसिक रोगियों का चिकित्‍सालयों में उपचार किया जाए एवं बच्‍चों को पालन-गृहों या आवासीय विद्यालयों में रखा जाए।
žवृद्धोंके लिए राष्‍ट्रीय पेंशन, निर्धनों के लिए चिकित्‍सालयों में नि:शुल्‍क उपचार सार्वजनिक रोजगार की सेवाएँ एवं बेरोजगारी एवं अशक्‍तता की सुविधाओं के साथ सामाजिक बीमा का एक कार्यक्रम आरम्‍भ किया जाए।