वैयक्तिक समाज कार्य के अंगभूत Components of Social Case Work In Hindi
समाज कार्यकर्ता सेवार्थी से मधुर सम्बन्धों की स्थापना करता है तत्पश्चात् उसके पारिवारिक, व्यक्तिगत इतिहास की जानकारी करता है, उसकी समस्याओं को जानने का प्रयास करता है फिर समस्याओं का सामाजिक निदान करने के उपरान्त उपयुक्त उपचार योजना बनाता है तथा मूल्यांकन करता है, यह सब एक प्रक्रिया के माध्यम से होता है।
वैयक्तिक समाज कार्य के अंगभूत
ॅवताद्ध पर्लमैन (1957) के द्वारा दी गई परिभाषा यह है कि ‘‘वैयक्तिक समाज कार्य एक प्रक्रिया है जिसका प्रयोग मानव कल्याण संस्थाएं करती हैं ताकि व्यक्तियों की सहायता की जा सके जिससे वे अपनी समस्याओं का सामाजिक कार्यात्मकता से सामना कर सकें।’’ उपयुकर््त परिभाषा में वैयक्तिक समाज कार्य के चार अंगभूतों का उल्लेख किया गया है जो हैं: (1) व्यक्ति ;च्मतेवदद्ध (2) समस्या ;च्तवइसमउद्ध (3) स्थान ;च्संबमद्ध (4) प्रक्रिया ;च्तवबमेेद्ध वैयक्तिक समाज कार्य में व्यक्ति से तात्पर्य ऐसे सेवार्थी से है जो मनोसामाजिक समस्याओं से ग्रसित है, यह व्यक्ति एक पुरूष, स्त्री, बच्चा अथवा वृद्ध कोई भी हो सकता है। अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जो भी व्यक्ति स्पष्टतया सहायता चाहता है, वैयक्तिक समाज कार्य उसको सहायता उपलब्ध कराता है। कोई भी समस्या व्यक्ति के सामाजिक समायोजन को प्रभावित करती है इसका स्वरूप कैसा भी क्यों न हो। समस्या शारीरिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक या मनोवैज्ञानिक इत्यादि प्रकृति की हो सकती है। वस्तुतः वैयक्तिक समाज कार्य में समस्या वही आती हैं जो व्यक्ति की सामाजिक क्रिया को गम्भीर रूप से प्रभावित करती हैं। उन समस्याओं के कारण व्यक्ति का सामाजिक सन्तुलन बिगड़ जाता है और वह समस्या से ग्रसित हो जाता है। वैयक्तिक समाज कार्य इसी असन्तुलन को समाप्त करने का प्रयास करता है। स्ािान से तात्पर्य ऐसी संस्था से है जिसके तत्वावधान में व्यक्ति की सहायता की जाती है। यह संस्था सरकारी या गैर-सरकारी हो सकती है। सेवार्थी को विषेश सहायता इन्हीं संस्थाओं के तत्वावधान में अथवा संस्था के बाहर कार्यकर्ता द्वारा उपलब्ध करायी जाती है। वैयक्तिक समाज कार्य में संस्था ऐसी घटक होती है जो सेवार्थियों की सहायता करने में प्रमुख भूमिका का निर्वहन करती है। वैयक्तिक समाज कार्य मंे प्रक्रिया से तात्पर्य उस व्यवस्था से है जिसके माध्यम से सेवार्थी की सहायता की जाती है। इस सहायता प्रक्रिया में सर्वप्रथम वैयक्तिक
समाज कार्यकर्ता सेवार्थी से मधुर सम्बन्धों की स्थापना करता है तत्पश्चात् उसके पारिवारिक, व्यक्तिगत इतिहास की जानकारी करता है, उसकी समस्याओं को जानने का प्रयास करता है फिर समस्याओं का सामाजिक निदान करने के उपरान्त उपयुक्त उपचार योजना बनाता है तथा मूल्यांकन करता है, यह सब एक प्रक्रिया के माध्यम से होता है।
ॅवताद्ध पर्लमैन (1957) के द्वारा दी गई परिभाषा यह है कि ‘‘वैयक्तिक समाज कार्य एक प्रक्रिया है जिसका प्रयोग मानव कल्याण संस्थाएं करती हैं ताकि व्यक्तियों की सहायता की जा सके जिससे वे अपनी समस्याओं का सामाजिक कार्यात्मकता से सामना कर सकें।’’ उपयुकर््त परिभाषा में वैयक्तिक समाज कार्य के चार अंगभूतों का उल्लेख किया गया है जो हैं: (1) व्यक्ति ;च्मतेवदद्ध (2) समस्या ;च्तवइसमउद्ध (3) स्थान ;च्संबमद्ध (4) प्रक्रिया ;च्तवबमेेद्ध वैयक्तिक समाज कार्य में व्यक्ति से तात्पर्य ऐसे सेवार्थी से है जो मनोसामाजिक समस्याओं से ग्रसित है, यह व्यक्ति एक पुरूष, स्त्री, बच्चा अथवा वृद्ध कोई भी हो सकता है। अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जो भी व्यक्ति स्पष्टतया सहायता चाहता है, वैयक्तिक समाज कार्य उसको सहायता उपलब्ध कराता है। कोई भी समस्या व्यक्ति के सामाजिक समायोजन को प्रभावित करती है इसका स्वरूप कैसा भी क्यों न हो। समस्या शारीरिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक या मनोवैज्ञानिक इत्यादि प्रकृति की हो सकती है। वस्तुतः वैयक्तिक समाज कार्य में समस्या वही आती हैं जो व्यक्ति की सामाजिक क्रिया को गम्भीर रूप से प्रभावित करती हैं। उन समस्याओं के कारण व्यक्ति का सामाजिक सन्तुलन बिगड़ जाता है और वह समस्या से ग्रसित हो जाता है। वैयक्तिक समाज कार्य इसी असन्तुलन को समाप्त करने का प्रयास करता है। स्ािान से तात्पर्य ऐसी संस्था से है जिसके तत्वावधान में व्यक्ति की सहायता की जाती है। यह संस्था सरकारी या गैर-सरकारी हो सकती है। सेवार्थी को विषेश सहायता इन्हीं संस्थाओं के तत्वावधान में अथवा संस्था के बाहर कार्यकर्ता द्वारा उपलब्ध करायी जाती है। वैयक्तिक समाज कार्य में संस्था ऐसी घटक होती है जो सेवार्थियों की सहायता करने में प्रमुख भूमिका का निर्वहन करती है। वैयक्तिक समाज कार्य मंे प्रक्रिया से तात्पर्य उस व्यवस्था से है जिसके माध्यम से सेवार्थी की सहायता की जाती है। इस सहायता प्रक्रिया में सर्वप्रथम वैयक्तिक
समाज कार्यकर्ता सेवार्थी से मधुर सम्बन्धों की स्थापना करता है तत्पश्चात् उसके पारिवारिक, व्यक्तिगत इतिहास की जानकारी करता है, उसकी समस्याओं को जानने का प्रयास करता है फिर समस्याओं का सामाजिक निदान करने के उपरान्त उपयुक्त उपचार योजना बनाता है तथा मूल्यांकन करता है, यह सब एक प्रक्रिया के माध्यम से होता है।
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