Social Case Work Definitions In Hindi - व्यक्तिक सेवा कार्य की परिभाषाएँ
वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषायें वैयक्तिक समाज कार्य- समाज कार्य की प्राथमिक प्रणाली है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति विशेष की मनोसामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाता है। वैयक्तिक समाज कार्य सेवार्थी की अन्तर्दृष्टि को उकसाने वाली एक प्रक्रिया है, जो सेवार्थी के विभिन्न पहलुओं की जानकारी कराती है। इसके माध्यम से सेवार्थी के पर्यावरण में परिवर्तन लाने का प्रयास किया जाता है जिससे सेवार्थी की सोंच एवं क्षमताओं का विकास हो सके और वह अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सके तथा परिस्थितियों के साथ उचित समायोजन स्ािापित कर सके।
वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषायें वैयक्तिक समाज कार्य- समाज कार्य की प्राथमिक प्रणाली है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति विशेष की मनोसामाजिक समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाता है। वैयक्तिक समाज कार्य सेवार्थी की अन्तर्दृष्टि को उकसाने वाली एक प्रक्रिया है, जो सेवार्थी के विभिन्न पहलुओं की जानकारी कराती है। इसके माध्यम से सेवार्थी के पर्यावरण में परिवर्तन लाने का प्रयास किया जाता है जिससे सेवार्थी की सोंच एवं क्षमताओं का विकास हो सके और वह अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सके तथा परिस्थितियों के साथ उचित समायोजन स्ािापित कर सके।
मेरी रिचमन्ड (1915) ने वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषा करते हुए यह कहा है कि यह “विभिन्न व्यक्तियों के लिये उनके साथ मिलकर उनके सहयोग से विभिन्न प्रकार के कार्य करने की एक कला है। इसका उद्देश्य एक ही साथ व्यक्तियों और समाज की उन्नति करना हैं।“ टैफ्ट् (1920) के अनुसार वैयक्तिक समाज कार्य “समायोजन रहित व्यक्ति की सामाजिक चिकित्सा है जिसमें इस बात का प्रयास किया जाता है कि उसके व्यक्तित्व, व्यवहार, एवं सामाजिक सम्बन्धों को समझा जाए और उसकी सहायता की जाऐ मत एक उच्चतर सामाजिक एवं वैयक्तिक समायोजन प्राप्त कर सके।’’ मेरी रिचमण्ड (1922) के अनुसार, वैयक्तिक समाज कार्य का अर्थ है “वह प्रक्रियायें जो व्यक्तित्व के विकास के लिए एक एक करके व्यक्तियों और उनके सामाजिक पर्यावरण के बीच समायोजन स्ािापित करती है“। वाटसन (1922) के अनुसार, वैयक्तिक समाज कार्य, “असन्तुलित व्यक्तित्व को इस प्रकार सन्तुलित बनाने और उसका पुनर्निर्माण करने की एक कला है कि व्यक्ति अपने पर्यावरण से समायोजन प्राप्त कर सकें। क्वीन (1922) ने वैयक्तिक समाज कार्य को “वैयक्तिक सम्बन्धों में समायोजन लाने की एक कला“ के रूप में परिभाशित किया। ली (1923) नेे वैयक्तिक समाज कार्य को “मानवीय मनोवृत्तियों को परिवर्तित करने की एक कला के रूप में परिभाषित किया।“ रिनाॅल्ड्स (1932) ने वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषा इस प्रकार की, “यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सेवार्थी को एक ऐसी समस्या के विषय में परामर्श दिया जाता है जो विशेष प्रकार से उसी की समस्या है और जिसका सम्बन्ध सामाजिक सम्बन्धो की उन कठिनाइयों से है जिनका यह सामना कर रहा है।“ डखीनीज़ (1939) ने वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषा इस प्रकार की: “ऐसी प्रक्रियायें जो व्यक्तियों को सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा निश्चित नीतियों के अनुसार और वैयक्तिक आवश्यकताओं को सामने रखकर सेवा प्रदान करने, आर्थिक सहायता देने या वैयक्तिक परामर्श देने से सम्बद्ध है। स्वीथन बाॅवर्स (1949) ने कहा: “वैयक्तिक समाज कार्य एक कला है जिसमें मानवीय सम्बन्धों के विज्ञान के ज्ञान और सम्बन्धों में निपुणता का प्रयोग इस दृष्टि से किया जाता है कि व्यक्ति में उसकी योग्यताओं और समुदाय में साधनों को गतिमान किया जाए जिससे सेवार्थी और उसके पर्यावरण के कुछ या समस्त भागों के बीच उच्चतर समायोजन स्थापित हो सके।’’ सैनफोर्ड सोलेन्डर (1957) ने कहा “वैयक्तिक समाज कार्य एक ऐसी प्रणाली है जिसका प्रयोग समाजकार्यकर्ता व्यक्तियों की सहायता करने के लिये करते हैं मत
उन सामाजिक असामन्जस्य की समस्याओं का समाधान कर सकें जिनका सामना वे स्वयं संतोषजनक रूप से नही कर पा रहें है।“ पर्लमैन (1957) के अनुसार, “वैयक्तिक समाज कार्य एक प्रक्रिया है जिसका प्रयोग कुछ मानव कल्याण संस्थाएं करती हंै ताकि व्यक्तियों की सहायता की जाए मत सामाजिक कार्यात्मकता की समस्याओं का सामना उच्चतर प्रकार से कर सकें।“ होलिस के अनुसार, ‘‘वैयक्तिक समाज कार्य मानव व्यक्तित्व, सामाजिक मूल्यों एवं उद्देश्यों के प्रति कुछ मौलिक मान्यताओं पर आधारित है। वैयक्तिक समाज कार्य की यह मान्यता है कि सामाजिक संरचना का उद्देश्य व्यक्ति को इच्छित जीवन स्तर जीने के योग्य बनाना है। व्यक्ति राज्य के लिए नहीं वरन् राज्य व्यक्ति के कल्याण के लिए विनिर्मित हुआ है।
उपरिलिखित परिभाषाओं का अध्ययन एवं अवलोकन करने से यह स्पष्ट होता है कि वैयक्तिक समाज कार्य एक सहायता मूलक कार्य है यह ऐसे व्यक्ति को दी जाती है जो मनोसामाजिक समस्याओं से ग्रसित है तथा जिसके पर्यावरण में परिवर्तन की आवश्यकता है, जिससे कि उसकी क्षमताओं का विकास हो सके और वह समाज में अच्छा समायोजन स्ािापित कर सके।
मेरी रिचमन्ड (1915) ने वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषा करते हुए यह कहा है कि यह “विभिन्न व्यक्तियों के लिये उनके साथ मिलकर उनके सहयोग से विभिन्न प्रकार के कार्य करने की एक कला है। इसका उद्देश्य एक ही साथ व्यक्तियों और समाज की उन्नति करना हैं।“ टैफ्ट् (1920) के अनुसार वैयक्तिक समाज कार्य “समायोजन रहित व्यक्ति की सामाजिक चिकित्सा है जिसमें इस बात का प्रयास किया जाता है कि उसके व्यक्तित्व, व्यवहार, एवं सामाजिक सम्बन्धों को समझा जाए और उसकी सहायता की जाऐ मत एक उच्चतर सामाजिक एवं वैयक्तिक समायोजन प्राप्त कर सके।’’ मेरी रिचमण्ड (1922) के अनुसार, वैयक्तिक समाज कार्य का अर्थ है “वह प्रक्रियायें जो व्यक्तित्व के विकास के लिए एक एक करके व्यक्तियों और उनके सामाजिक पर्यावरण के बीच समायोजन स्ािापित करती है“। वाटसन (1922) के अनुसार, वैयक्तिक समाज कार्य, “असन्तुलित व्यक्तित्व को इस प्रकार सन्तुलित बनाने और उसका पुनर्निर्माण करने की एक कला है कि व्यक्ति अपने पर्यावरण से समायोजन प्राप्त कर सकें। क्वीन (1922) ने वैयक्तिक समाज कार्य को “वैयक्तिक सम्बन्धों में समायोजन लाने की एक कला“ के रूप में परिभाशित किया। ली (1923) नेे वैयक्तिक समाज कार्य को “मानवीय मनोवृत्तियों को परिवर्तित करने की एक कला के रूप में परिभाषित किया।“ रिनाॅल्ड्स (1932) ने वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषा इस प्रकार की, “यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सेवार्थी को एक ऐसी समस्या के विषय में परामर्श दिया जाता है जो विशेष प्रकार से उसी की समस्या है और जिसका सम्बन्ध सामाजिक सम्बन्धो की उन कठिनाइयों से है जिनका यह सामना कर रहा है।“ डखीनीज़ (1939) ने वैयक्तिक समाज कार्य की परिभाषा इस प्रकार की: “ऐसी प्रक्रियायें जो व्यक्तियों को सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा निश्चित नीतियों के अनुसार और वैयक्तिक आवश्यकताओं को सामने रखकर सेवा प्रदान करने, आर्थिक सहायता देने या वैयक्तिक परामर्श देने से सम्बद्ध है। स्वीथन बाॅवर्स (1949) ने कहा: “वैयक्तिक समाज कार्य एक कला है जिसमें मानवीय सम्बन्धों के विज्ञान के ज्ञान और सम्बन्धों में निपुणता का प्रयोग इस दृष्टि से किया जाता है कि व्यक्ति में उसकी योग्यताओं और समुदाय में साधनों को गतिमान किया जाए जिससे सेवार्थी और उसके पर्यावरण के कुछ या समस्त भागों के बीच उच्चतर समायोजन स्थापित हो सके।’’ सैनफोर्ड सोलेन्डर (1957) ने कहा “वैयक्तिक समाज कार्य एक ऐसी प्रणाली है जिसका प्रयोग समाजकार्यकर्ता व्यक्तियों की सहायता करने के लिये करते हैं मत
उन सामाजिक असामन्जस्य की समस्याओं का समाधान कर सकें जिनका सामना वे स्वयं संतोषजनक रूप से नही कर पा रहें है।“ पर्लमैन (1957) के अनुसार, “वैयक्तिक समाज कार्य एक प्रक्रिया है जिसका प्रयोग कुछ मानव कल्याण संस्थाएं करती हंै ताकि व्यक्तियों की सहायता की जाए मत सामाजिक कार्यात्मकता की समस्याओं का सामना उच्चतर प्रकार से कर सकें।“ होलिस के अनुसार, ‘‘वैयक्तिक समाज कार्य मानव व्यक्तित्व, सामाजिक मूल्यों एवं उद्देश्यों के प्रति कुछ मौलिक मान्यताओं पर आधारित है। वैयक्तिक समाज कार्य की यह मान्यता है कि सामाजिक संरचना का उद्देश्य व्यक्ति को इच्छित जीवन स्तर जीने के योग्य बनाना है। व्यक्ति राज्य के लिए नहीं वरन् राज्य व्यक्ति के कल्याण के लिए विनिर्मित हुआ है।
उपरिलिखित परिभाषाओं का अध्ययन एवं अवलोकन करने से यह स्पष्ट होता है कि वैयक्तिक समाज कार्य एक सहायता मूलक कार्य है यह ऐसे व्यक्ति को दी जाती है जो मनोसामाजिक समस्याओं से ग्रसित है तथा जिसके पर्यावरण में परिवर्तन की आवश्यकता है, जिससे कि उसकी क्षमताओं का विकास हो सके और वह समाज में अच्छा समायोजन स्ािापित कर सके।
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