व्यक्तिक सेवा कार्य का परिचय - Social Case Work Introduction In Hindi
भारतीय समाज में आरम्भ में वैयक्तिक आधार पर सहायता करने की परम्परा रही है। यहाँ पर निर्धनों को भिक्षा देने, असहायों की सहायता करने, निराश्रितों की सहायता करने, वृद्धों की देखभाल करने आदि कार्य किये जाते रहे हैं, जिन्हें समाज सेवा का नाम दिया जाता रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाये तो हम निश्चित रूप से यह कह सकते हैं कि भारत में भी अमेरिका, इंग्लैण्ड की भाँति शोषण का सरलतापूर्वक शिकार बनने वाले वर्गों की सहायता का प्रावधान प्राचीन काल से चला आ रहा है।
भारतीय समाज में आरम्भ में वैयक्तिक आधार पर सहायता करने की परम्परा रही है। यहाँ पर निर्धनों को भिक्षा देने, असहायों की सहायता करने, निराश्रितों की सहायता करने, वृद्धों की देखभाल करने आदि कार्य किये जाते रहे हैं, जिन्हें समाज सेवा का नाम दिया जाता रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाये तो हम निश्चित रूप से यह कह सकते हैं कि भारत में भी अमेरिका, इंग्लैण्ड की भाँति शोषण का सरलतापूर्वक शिकार बनने वाले वर्गों की सहायता का प्रावधान प्राचीन काल से चला आ रहा है।
पहले इस सहायता को समाज सेवा के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन धीरे-धीरे इसने अपना स्वरूप बदल लिया और उन्नीसवीं शताब्दी में समाज कार्य के रूप में सामने आयी। समाज कार्य की छः प्रणालियाँ हैं जिनका उपयोग करते हुए लोगों की सहायता की जाती है, इन्हें दो भागों में विभाजित किया गया है, पहली-प्राथमिक प्रणाली एवं दूसरी- सहायक प्रणाली। प्राथमिक प्रणाली में वैयक्तिक समाज कार्य, सामूहिक समाज कार्य तथा सामुदायिक संगठन, जबकि सहायक प्रणाली में समाज कल्याण प्रशासन, समाज कार्य शोध तथा सामाजिक क्रिया को रखा गया है।
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