वैयक्तिक सेवाकार्य में समस्या की प्रकृति - Nature of Problem In Social Case Work.
वैयक्तिक सेवाकार्य में समस्या की प्रकृति - Nature of Problem In Social Case Work.
वैयक्तिक सेवाकार्य के अन्तर्गत मनो-सामाजिक समस्याओं पर प्रकाश डाला जाता है। सामाजिक समस्याओं के निदान तथा उपचार पर जोर दिया जाता है। सन् 1941 ई0 में हैमिल्टन का दूसरा लेख “दि अण्डरलाइंग फिलासफी आफ सोशल केसवर्क“ प्रकाशित हुआ। जिसमें निदानात्मक तथा कार्यात्मक सम्प्रदायों में अन्तर स्पष्ट किया। उन्होंने अपने लेखों में मनोसामाजिक सिद्धान्त का उल्लेख किया। इस सिद्धान्त में निदान तथा उपचार का कार्य व्यक्ति की सम्पूर्ण स्थिति का अवलोकन निरीक्षण एवं परीक्षण के बाद किया जाता है। उसकी सम्पूर्ण स्थितियों का अध्ययन किया जाता है। इसके अनुसार जिस व्यक्ति की सहायता करनी है, उपचार करना है, उसकी बाह्य पर्यावरण के प्रति अन्तः क्रियाओं को समझना आवश्यक होगा। इसके साथ ही साथ बाह्य पर्यावरण के विषय में भी जिससे व्यक्ति सम्बन्धित है, ज्ञान प्राप्त करना होगा। यह उसका सम्पूर्ण परिवार हो सकता है, परिवार का कोई व्यक्ति विशेष हो सकता है। सामाजिक समूह, शिक्षा संस्था, कार्यस्थल या अन्य कोई सामाजिक व्यवस्था का अंग हो सकता है। परिवार व्यवस्था को सेवार्थी के रूप में देखा जाने लगा है। व्यक्ति के किसी एक व्यवस्था में परिवर्तन का प्रभाव अन्य व्यवस्थाओं में भी पड़ता है। मनोसामाजिक सिद्धान्त की दूसरी विशेषता उपचार संबंधी है। इस सिद्धान्त के अनुसार सेवार्थी की आवश्यकताओं के अनुरूप ही चिकित्सा प्रक्रिया होनी चाहिए, तथा आवश्यकताओं में परिवर्तन या अंतर होने पर चिकित्सा प्रक्रिया में भी अंतर होना चाहिए। कार्यकर्ता को सर्वप्रथम सेवार्थी की आवश्यकताओं का पता लगाना चाहिए तदुपरान्त वैयक्तिक रूप से सेवार्थी की आवश्यकताओं के अनुरूप करना चाहिए। वैयक्तिक सेवाकार्य उपचार तीन प्रकार का होता है:
(1) व्यक्ति में परिवर्तन
(2) सामाजिक या अन्तवैयक्तिक पर्यावरण में सुधार या परिवर्तन
(3) दोनों में परिवर्तन।
इस प्रक्रिया का प्रमुख कार्य सेवार्थी, कार्यकर्ता तथा दूसरे महत्वपूर्ण व्यक्ति के बीच होता है तथा कुछ निश्चित सेवाएँ प्रदान की जाती है। संचार प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। सेवार्थी अपनी समस्याओं को समझने तथा समाधान में हिस्सा ले। इस उद्देश्य की प्राप्ति करना कार्यकर्ता का उद्देश्य होता है। सेवार्थी के साथ कार्य करने का उद्देश्य सेवार्थी की परिस्थिति के ज्ञान में वृद्धि, दूसरों तथा अपने विषय में अधिक से अधिक ज्ञान, सम्बन्ध में सुधार कार्यकर्ता सेवार्थी का उद्देश्यपूर्ण संबंध स्थापन, उपचार प्रक्रिया के द्वारा चिन्ता, भय तथा उग्र भावनाओं का स्पष्टीकरण। निम्नलिखित प्रक्रिया को कार्यकर्ता अपनाता है जिससे सेवार्थी की समस्या का समाधान हो सके। प्रारम्भिक स्तर:- प्रारम्भिक स्तर में वैयक्तिक कार्यकर्ता का प्रमुख कार्यः -
1. सेवार्थी संस्था में क्यों आया है?
2. सेवार्थी से संबंध स्थापना जिससे वह कार्यकर्ता की सहायता का उपयोग कर सके।
3. सेवार्थी को उपचार कार्य में लगाना।
4. उपचार प्रारम्भ करना।
5. मनोसामाजिक निदान एवं उपचार के लिए आवश्यक सूचना एकत्र करना।
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