सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य के उपागम - Social social service approach

सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य के उपागम - Social social service approach


 सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य के मुख्य उपागम के बारे में विस्तार से बताया गया है तथा चिकित्सीय समाज कार्य एवं मनोचिकित्सीय समाज कार्य की जानकारी दी गई है। वैयक्तिक सेवा कार्य में समस्या की प्रकृति को समझाया गया है एवं सेवार्थी के मनोविश्लेषणात्मक अध्ययन की व्याख्या की गई है। सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य में निदान तथा उपचार के चरणों की भी विवेचना है।


    व्यक्तिगत समाज कार्य में उपचार की प्रक्रिया के विकास में बहुत से सिद्धान्तों का प्रतिपादन होता आया है। इन सिद्धान्तों का आधार विभिन्न समाज विज्ञानियों के विचार हैं जो समय- समय पर सामने आते रहे है। मनोविज्ञान, मनोरोगाविज्ञान, समाजशास्त्र के सिद्धान्तों से प्रभावित होकर समाज कार्य के अभ्यासकर्ताओं ने अपने क्षेत्रीय अनुभवों और अनुसंधान कार्य के प्रयोग के बाद इन सिद्धान्तों को विकसित किया है। इन सिद्धान्तों  के विकास में उस समय की प्रचलित विचारधाराओं का प्रभाव भी देखने में आता है। विभिन्न विचारकों के आपसी मतभेद भी सिद्धान्तों के विकास में अपनी भूमिका निभाते आये हैं। प्रत्येक सामाजिक विज्ञान के ज्ञान में समय के अनुसार वृद्धि ने भी सिद्धान्तों को प्रभावित किया है। व्यक्तिगत समाज कार्य के उपचार के यह सब उपागम या दृष्टिकोण या शैलियां समय-समय पर प्रतिपादित इन्हीं सिद्धान्तों  पर आधारित है। ये सिद्धान्त या उपागम निम्नलिखित है।