व्यावहारिक-परिष्कृत परिवर्तन उपागम - Social Work Practical-Sophisticated Change Approach.
व्यावहारिक-परिष्कृत परिवर्तन उपागम - Social Work Practical-Sophisticated Change Approach.
व्यावहारिक-परिष्कृत परिवर्तन उपागम
व्यावहारिक-परिष्कृत परिवर्तन उपागम सामाजिक वैयक्तिक सेवाकार्य में कार्यकर्ता का मूल रूप से कार्य सेवार्थी के व्यवहार में परिवर्तन लाना है। अतः व्यावहारिक परिष्कृत परिवर्तन प्रारूप का महत्व इस क्षेत्र में समझा जाने लगा। वर्तमान समय में प्रत्यक्ष उपचार के रूप में भी इसकी उपयोगिता को आंका गया तथा प्रयोग भी किया जाने लगा। व्यवहारवादी प्रारूप के प्रभाव के परिणामस्वरूप डोलार्ड मिलर, मोरर, शोवेन,ने सीखने की प्रक्रिया तथा मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त व्यक्तित्व विकास तथा मनोचिकित्सात्मक प्रयोग में संबंध को स्पष्ट किया। स्किनर तथा उनके अनुयायियों (लिंडसले, आइलोन, गोलडायमण्ड, अजरिन, प्रीमैक) के क्रियावादी व्यवहार पर अनुसंधान कार्य किया। वोल्पे के प्रयोग ने इस दिशा में विशेष योगदान प्रदान किया। व्यवहारवादी प्रारूप के विकास का श्रेय इवान पावलव को है लेकिन इसके विस्तार का श्रेय ई.एल थार्नडाइक तथा बी.एफ स्किनर को है।

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