तामसवारा गांव का जमीनी स्तर पर अवलोकन - Tamaswada Village





भूमिका- भारत की आजादी के पहले से ही भारत के आय के श्रोत कृषि ही रहे है। और वर्तमान मे भी भारत एक कृषि प्रधान देश के नाम से जाना भी जाता है। आज मैंने जिस गांव का अवलोकन किया है, उस गांव का भरपूर योगदान है कृषि के क्षेत्र मे। मैं जिस गांव की बात कर रहा हूँ, उस गांव का नाम तामसवारा है, जो की जिला वर्धा, तहसील सेलू और महाराष्ट्र राज्य के अंतर्गत आता है। और ये गांव कपास की खेती गन्ने की खेती के लिए मशहूर है। और देखा जाये तो महाराष्ट्र गन्ने और कपास की खेती के लिए मशहूर है, और इस कारण से यहाँ कई गन्ने, और कपास की फैक्ट्री भी है, यहाँ से उत्पादित की गयी वस्तु  पुरे भारत मे चीनी और कॉटन से बनी सामग्री की पूर्ति करने मे बहुत बड़ा योगदान निभाती है। महाराष्ट्र वाइट सोना के उत्पादन के नाम भी जाना जाता है। ( वाइट सोना का तात्पर्य कपास से है।)


प्रशाशनिक व्यवस्था-
तमसवारा हेटी, आमगांवरायपुरतामसवारा ये चार गांव का एक सरपंच नियुक्त किया है, जो की वर्तमान मे सुरेश राव चावरे है। और ये आमगांव मे रहते है।
एक उपसरपंच की भी नियुक्ति भी है, जिनका नाम छाया राव कोहराम है, ये भी आमगांव मे ही रहते है।
तमसवारा गांव मे सरपंच कमिटी के सदस्य रहते है, जो की हर महीने की आखरी तारीख मे सरपंच से मिलते है, और सारी जानकारी,समस्या आदि सभी संदर्भों का विवरण देते है।
ब्लाक/ तेहसिल इस गांव का सेलू है, इस गांव के सारे निवासी सरे कानूनी काम सेलू से ही करते है।


गांव की प्राथमिक समस्या-
नाली की समस्या, रोड की समस्या, पिने के पानी की समस्या, रोजगार की समस्या और कई प्रकार की द्वितीय समस्याये भी देखी गयी। ये जितने समस्याओं का जिक्र ऊपर किया गया है, वो भारत देश की भी प्राथमिक समस्याएं भी है, क्योंकी भारत की आधी से ज्यदा आबादी तो गांव मे ही रहती है। इसलिए ये समस्याएं काफी अहम है।

जनसँख्या-
तमसवारा गांव मे लग्भग 60 घर हैलग्भग 456 लोगोँ की जनसँख्या है।( वहां के निवासियो के कथन के अनुसार)

उपलब्ध सुविधाए-
बिजली, हैंडपंप, शौचालय, आवास,सड़क, नाली और कई अन्य सुविधाए सरकार के द्वारा उपलब्ध कराई गयी है, लेकिन ये सुविधाए प्रचुर मात्र मे उपलब्ध नहीं है। जिस कारण वहां के निवासियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
छोटे बच्चे के पढ़ाई और अन्य सेवा के लिए आंगनवाड़ी की सुविधा उपलब्ध है इस गांव मे।
चिकित्सा से संबंधी सुविधाए गांव से 5-6 km की दुरी पर उपलब्ध है।


कृषि से सम्बंधित सिचाई की जानकारी –
फसलो की सिचाई पूरी तरह से वाटर मोटर्स के माध्यम से की जाती है.  वर्षा के पानी को संचय करने के लिए कुए का निर्माण किया गया है. और इस पानी के माध्यम से भी खेतो की सिचाई की जाती है. 


निष्कर्ष-
इस गांव मे अगर ऊपर ऊपर देखे तो हर गांव की तरह जो छवि हमारे मन मे बनी हुई है, उसी प्रकार की छवि इस गांव की भी है। चारो तरफ हरियाली ही हरियाली।
हरयाली हरयाली ही हरयाली से तात्पर्य यह है, की गांव पूरी तरह चारो और से फसलों से घिरा हुआ है। कपास की खेती सबसे ज्यादा मात्रा मे तमसवारा गांव मे उपजाई जाती हुई दिखी। और अन्य फसल जैसे गन्ने की खेती भी प्रचुर मात्रा मे होती है।
और भारत की 68.84आबादी तो गांव मे ही निवास करती है, और भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने तो यह तक कहा है, की "भारत की आत्मा गावों मे ही वास करती है।"

                                  धन्यवाद।
                                 गौरव कुमार

                         (बी.एस.डब्लू – पंचम छमाही)