समाज कार्य में निदान एवं मूल्यांकन में अन्तर्सम्बन्ध
निदान- समस्या के समुचित उपचार के लिए इसके कारणों की खोज ह,ै जबकि मूल्यांकन समस्या समाधान की दृष्टि से सेवार्थी की शक्तियों एवं कमियों का अन्वेषण है । इन दोनों में भिन्नतायें तथा समानतायें दोनो ही पायी जाती हैं । इन दोनो में निम्नलिखित अन्तर स्पष्ट होते हैं :-
1. निदान से सेवार्थी की मनो-सामाजिक समस्या के कारणों का ज्ञान प्राप्त होता है, जबकि मूल्यांकन से सेवार्थी की क्षमता, आन्तरिक तथा बाह्य स्रोतों तथा कार्यात्मकता का ज्ञान प्राप्त होता है ।
2. निदान की प्रक्रिया में प्रमुख रूप से समस्या का प्रत्यक्षीकरण किया जाता है जबकि मूल्यांकन में प्रमुख रूप से समस्याग्रस्त व्यक्ति का प्रयत्क्षीकरण किया जाता है।
3. मूल्यांकन का लक्ष्य सामाजिक है जबकि निदान का लक्ष्य इस सामाजिक उद्देश्य की प्राप्ति हेतू सेवार्थी की क्षमताओं का पता लगाना है ।
4. निदान सम्बन्धी निपुणता, कर्ता के मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक ज्ञान पर निर्भर करती है जबकि मूल्यांकन करने की निपुणता कर्ता के तार्किक विचारों तथा अनुभवों एवं भावनाओं पर निर्भर करती हैं ।
5. निदान तथा मूल्यांकन दोनों का उद्देश्य उपचार को प्रभावकारी बनाना है ।

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