समाज कार्य में मूल्यांकन - Evaluation In Social Work


निदान की भांति मूल्यांकन, सेवार्थी के संस्था में आने के साथ से ही प्रारम्भ हो जाता है और अन्त तक चलता रहता है। वैयक्तिक सेवा कार्य में निदान की आवश्यकता के साथ-साथ इसकी भी आवश्यकता का अनुभव होता है क्योंकि वैयक्तिक सेवा कार्य का सम्बन्ध समस्या समाधान करने, उसका कल्याण तथा विकास करना है। सामाजिक कार्यकर्ता का यह कर्तव्य होता है कि वह अपनी सेवार्थी की तथा संस्था की क्षमताओं का मूल्यांकन, समस्या के सन्दर्भ में करें जिससे उपचार प्रक्रिया का निर्धारण वास्तविक तथ्यों पर आधारित हो सके ।  

मूल्यांकन का अर्थ - निदान तथा मूल्यांकन सेवार्थी को समझने तथा चिकित्सात्मक सुझाव प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक होते हैं। दोनो ही प्रक्रियाएं अन्तर्ग्रहण के समय से ही प्रारम्भ हो जाती हैं तथा सम्बन्ध के अन्तिम चरण तक चलती रहती है अन्तर्गहण के समय सेवार्थी की शिकायत के आधार पर अनिश्चित निर्णय लेते हैं जिसे निदान का प्रारम्भिक रूप कह सकते हैं परन्तु इसके साथ ही साथ उस व्यक्ति की क्षमताओं, असमताओं, सहायता के उपयोग की इच्छा अनिच्छा, सांस्कृतिक कारक आदि के सम्बन्ध में कुछ अनुमान लगाते हुए निर्णय लेते हैं और इन सामाजिक निर्णयों को मूल्यांकन माना जाता है।   हैमिल्टन के अनुसार - जब व्याख्या समस्या को परिभाषित करने की ओर निर्देशित न होकर, व्यक्ति किस प्रकार अपनी समस्या का सामना कर रहा है ,की ओर निर्देशित होती है, तब जो परिणाम प्राप्त होता है वह निदान न होकर मूल्यांकन होता है ।    मूल्यांकन द्वारा वैयक्तिक कार्यकर्ता यह जानने का प्रयास करता है कि व्यक्ति (सेवार्थी) ने उद्देश्य प्राप्त करने, या समस्या का समाधान , कितना तथा क्या प्रयत्न किया है ?

 वह समस्या को किस प्रकार अनुभव कर रहा है ? किस सीमा तक वह सहायता लेने का इच्छुक है तथा वह संस्था किस सीमा तक सहायता देने की योग्यता एवं क्षमता रखती है। कार्यकर्ता चिकित्सा पद्धति के प्रभाव का भी मूल्यांकन करता है जिससे पद्धति के समुचित नियोजन, नियंत्रण तथा परिमार्जन की सुविधा होती है। मूल्यांकन के द्वारा कार्यकर्ता को अपने विषय में भी ज्ञान हो जाता है अतः उसके अपने व्यवहार तथा कार्य में सुधार करने का अवसर मिलता है ।