सामाजिक वैक्तिक सेवा कार्य निदान - Social Case Work Diagnosis



निदान शब्द चिकित्साशास्त्र में अधिकांशतः प्रयोग किया जाता है जिसका तात्पर्य रोग के सम्पूर्ण ज्ञान से होता है। समाज कार्य में निदान का अर्थ न केवल समस्या के पूर्ण ज्ञान से होता है बल्कि सेवार्थी (व्यक्ति जो समस्या से ग्रसित है) व उसके सम्बन्ध में भी पूर्ण ज्ञान से होता है। निदान सेवार्थी द्वारा प्रस्तुत समस्या की वास्तविक प्रकृति से सम्बन्धित व्यवसायिक मत है वैयक्तिक कार्यकर्ता सेवार्थी से सम्बन्ध स्थापित करके उसकी समस्या के वास्तविक स्वरूप को निश्चित करता है। वैयक्तिक सेवा कार्य में निदान एक जटिल कार्य है क्योंकि जिस समस्या का निदान किया जाता है उसका सम्बन्ध व्यक्ति की गत्यात्मक मनोवृत्ति से होता है। व्यक्ति की अस्थिरता के कारण उसकी समस्याओं के महत्व प्रकृति तथा कारण में भी अन्तर होता रहता है अतः एक निश्चित कारण की खोज करना अत्यन्त दुष्कर कार्य है और इसकी सफलता वैयक्तिक कार्यकर्ता पर निर्भर होती है।

  मूल्यांकन  निर्णय करने वाली प्रक्रिया है जो निश्चित करती है कि सेवार्थी के प्रति कार्यकर्ता तथा संस्था का क्या उत्तरदायित्व है उनको पूरा करने की कितनी क्षमता है, क्या-क्या शक्तियॉ है तथा क्या-क्या कमजोरियॉ हैं, कौन से कार्य रचनात्मक सहयोग प्रदान करते हैं तथा कौन से कार्य समस्या को जटिल बनाते हैं । इस प्रकार मूल्यांकन उद्देश्य का दार्शनिक एवं नैतिक ज्ञान है। यह कार्यकर्ता को निर्णय पर पहुॅचने के लिए नकारात्मक कारको के विरूद्ध सकारात्मक कारको का संतुलन बनाये रखता है। 


 निदान के सम्बन्ध में सभी निदानात्मक सम्प्रदाय के विचारको ने अपने-अपने मत प्रस्तुत किये हैं परन्तु उन सभी मतो और विचारों का मूल अर्थ लगभग समान है। कुछ विद्वानों की परिभाषाओं एवं विचारों का उल्लेख निदान शब्द को स्पष्ट करने के लिए कर रहे हैं :-  मेरी रिचमण्ड (1917)  ‘‘सामाजिक निदान, जहॉ तक सम्भव हो एक सेवार्थी के व्यक्तित्व तथा सामाजिक स्थिति की एक यथार्थ परिभाषा पर पहुॅचने का प्रयत्न है ।’’ आप्टेकर, हरवर्ट एच0 (1955)  ‘‘निदान, जैसा कि निदानात्मक सम्प्रदाय ने देखा है, समस्या के कारणो की खोज है जो सेवार्थी को कार्यकर्ता के पास सहायता के लिए लाती है ।’’   

इस प्रकार निदान ऐसे मनोवैज्ञानिक अथवा व्यक्तित्व सम्बन्धी कारको जो सेवार्थी की कठिनाई के साथ कारणात्मक सम्बन्ध रखते हैं तथा सामाजिक अथवा पर्यावरणात्मक कारको जो इसे बनाये रखते हैं, दोनों को समझने से सम्बन्धित हैं।   निदान सेवार्थी की समस्या, उसके व्यक्तित्व तथा परिवेश को यथार्थ रूप को समझने के लिए किया गया प्रयास है । निदान की प्रक्रिया में समस्या से सम्बन्धित तथ्यो को एकत्रित किया जाता है । सेवार्थी की शारीरिक, मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक कार्यात्मकता का निरीक्षण एवं परीक्षण किया जाता है, पर्यावरण सम्बन्धी कारको को समस्या के संदर्भ मे देखा जाता है तथा सेवार्थी एवं पर्यावरण दोनो की एक साथ व्याख्या करते हुए समस्या के सम्बन्ध में कुछ निष्कर्ष निकाले जाते हैं । इसी निष्कर्ष को निदान के नाम से जाना जाता है।   मेरी रिचमण्ड जो सामाजिक वैयक्तिक सेवा कार्य की जन्मदात्री मानी जाती है । 

निदान के अन्तर्गत कार्यकर्ता के तीन महत्वपूर्ण कार्यो का उल्लेख किया है -  
1. कठिनाईयों की परिभाषा  

2. कारणात्मक कारक तथा  

3. उपलब्धियॉ तथा उत्तरदायित्व   

निदान एक ऐसा कार्य है जो सेवार्थी से सम्पर्क स्थापित करने के क्षण से चिकित्सा के अन्तिम चरण तक चलता रहता है परन्तु जिस प्रकार से चिकित्सा से वास्तविक लाभ प्राप्त करने के लिए कार्यकर्ता सेवार्थी सम्बन्ध की आवश्यकता होती है उसी प्रकार निदान की सफलता कार्यकर्ता और सेवार्थी दोनों पर निर्भर होती है । कार्यकर्ता निदान की निष्पक्षता को बनाये रखने के लिए समस्या के प्रति वस्तुगत रूख अपनाता है तथा अपनी भावनाओं को सेवार्थी की भावना से पृथक रखता है ।