समाज कार्य की निदान की प्रक्रिया - Social Work Process Of Diagnosis



वैयक्तिक सेवा कार्य में प्रत्येक सेवार्थी के विषय में वैयक्तिक कार्यकर्ता  को निश्चित करना पड़ता है कि किस प्रकार से उसकी समस्या को अधिकाधिक संतोष के साथ सुलझाया जा सकता है । इसके लिए वह उपलब्ध सूचनाओं का अध्ययन करता है तथा अपने व्यावसायिक ज्ञान द्वारा समस्या के कारणों की खोज करता है। खोज करने के पश्चात यह निश्चित करता है कि चिकित्सा प्रक्रिया का क्या स्वरूप हो। 

इस प्रकार निदान के अन्तर्गत निम्न तीन चरण होते हैं :-  

1. तथ्यों का मूल्यांकन   

अ. समस्या का मूल्यांकन   

ब. व्यक्तित्व का मूल्यांकन  

 स. सामाजिक पर्यावरण का मूल्यांकन  

2. कारणान्वेषण   

अ. समस्या का रूप   

ब. सामाजिक पर्यावरण का व्यक्तित्व पर प्रभाव  

स. समस्या उत्पत्ति के मुख्य कारक   

द. समस्या के उपचार के उपाय  

3. श्रेणीकरण   

अ. समस्या के आधार पर वर्गीकरण   

ब. संस्था की सेवा का महत्व   

इरिक सेन्सवरी के अनुसार निदान प्रक्रिया के चरण 

1. वैयक्तिक सेवा कार्य में सूचना का मुख्य स्रोत सेवार्थी होता है। कार्यकर्ता को समस्या का ज्ञान सेवार्थी से साक्षात्कार द्वारा होता है। साक्षात्कार के माध्यम से ही वह निश्चित करता है कि सेवार्थी समस्या को कैसा अनुभव कर रहा है तथा उसकी समस्या क्या है ? कौन सी संस्था उसकी समस्या के अनुकूल हैं जिसमें संदर्भित करना है।  

2. इस सूचना से कार्यकर्ता निश्चित तथ्यों तथा सेवार्थी की भावनाओं की प्रतिक्रिया को वर्णनात्मक स्वरूप संरचित करता है। वह निश्चित करता है कि कौन-कौन से कारक सेवार्थी के लिए विशेष महत्व के है ? और कौन-कौन से परिवार तथा समूह के सामान्य कारक हैं ? परिवार तथा समूह के प्रभाव को निश्चित करता है। यह भी निश्चित करता है कि समस्या क्षेत्र सीमित है और उसका प्रभाव सेवार्थी के किसी एक अंग पर पड़ रहा है अथवा सेवार्थी का सम्पूर्ण व्यक्तित्व तथा जीवन क्षेत्र इससे प्रभावित हो रहा है । यह निश्चित करने का प्रयत्न करता है कि सेवार्थी की भावनाएं समस्या के अनुरूप ही है अथवा उनमें अधिकता, कमी अथवा अवांछनीय है।  

3. समस्या या कठिनाई का स्वरूप एवं विस्तार निश्चित हो जाने पर कार्यकर्ता निश्चित करता है कि सेवार्थी के जीवन तथा अनुभव का कौन सा क्षेत्र क्रमानुगत अन्वेषण चाहता है। इसके अन्तर्गत परिवार की संरचना, संस्था के कार्यो से आशा, शिक्षा एवं रोजगार लेखा, स्वास्थ्य, आय तथा गृह कार्य संगठन आदि क्षेत्र आते हैं। यह निश्चित करता है कि किन-किन स्रोतां से सम्बन्धित निदान के लिए सूचना की आवश्यकता है या दूसरी संस्थाओ को इसके लिए कितनी आवश्यकता है।  

4. इस स्तर में वह उपलब्ध आंकड़ो का कार्यात्मक स्वरूप प्रदान करता है। आंकड़ो के अन्तर्गत विचार, भावनाएं, घटनाएं तथा प्रत्युत्तर सेवार्थी का अनुभव प्रभावपूर्ण कारक तथ्य तथा प्रतिक्रिया में सम्बन्ध आदि तत्व सम्मिलित होते है। सारांश में सेवार्थी की आन्तरिक एवं बाह्य तस्वीर आंकड़ो के अन्तर्गत होती है। विभिन्न कारणों की अन्तक्रिया को निश्चित करके समस्या के विशेष कारण को निश्चित करने का प्रयत्न किया जाता है।