समाज कार्य में मूल्यांकन की तकनीक - Social Work Techniques Of Evaluation.
विभिन्न प्रक्रियाओं को समझने के लिए अलग-अलग तरह के मूल्यांकन तकनीकों की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए प्रशिक्षण का मूल्यांकन, बीसीसी गतिविधियों के परिणामों का मूल्यांकन, सामुदायिक संगठन/सामुदायिक सहभागागिता का मूल्यांकन, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मूल्यांकन, ग्राहकों की संतुष्टि का मूल्यांकन। इस तरह कार्यक्रम का मूल्यांकन करते समय प्रशिक्षण मूल्यांकन एवं सामुदायिक संगठन के मूल्यांकन की जानकारी होना आवश्यक है। किसी राज्य संसाधन ईकाई के मूल्यांकन के लिए संतुष्टि और कार्यक्रम के मूल्यांकन के कौशल का होना आवश्यक है। बीसीसी कार्यक्रमों के मूल्यांकन के लिए आम तौर पर एक अलग तरह के कौशल और योग्यताओं की आवश्यकता होती है। अक्सर किसी योजना का मूल्यांकन करते समय या विश्लेषकों का चयन करते समय हम इन अंतरों में भेद नहीं कर पाते जिससे हमारे मूल्यांकन के नतीजों पर बुरा असर पड़ता है।
अवबोधन (अनुश्रवण) तथा मूल्यांकन में अन्तर
अवबोधन मूल्यांकन = परियोजना की प्रगति के साथ-साथ जानकारियों को व्यवस्थित रूप से एकत्रित कर विश्लेषण करने को अवबोधन कहते हैं।
मूल्यांकन की प्रक्रिया में कार्यक्रम की योजना और इसके वास्तविक प्रभावों की तुलना की जाती है। इसके अंतर्गत यह देखा जाता है कि आपने क्या लक्ष्य रखे थे, तथा क्या परिणाम प्राप्त किए और किस तरह से।
अवबोधन का उद्देश्य किसी परियोजना या विभाग के परिणामों
मूल्यांकन की प्रक्रिया रचनात्मक हो सकती है जिसका उद्देश्य की कार्यकुशलता और प्रभावशीलता को बढ़ाना होता है।
कार्ययोजना में सुधार लाना या स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना हो सकता है। इसे समवर्ती मूल्यांकन भी कहा जाता है।
अवबोधन किसी भी कार्यक्रम की योजना तैयार करते समय निर्धारित लक्ष्यों और नियोजित गतिविधियों पर आधारित होती है।
मूल्यांकन की प्रक्रिया के अंतर्गत पूरे हुए किसी कार्यक्रम के अनुभवों के आधार पर जानकारियों का सारांश तैयार किया जाता है।
अवबोधन के अंतर्गत कार्यक्रम की प्रगति का समय-समय पर आंकलन किया जाता है, जिससे कि कार्यक्रम अपनी निश्चित दिशा में प्रगति करता है और कोई भी कमी या त्रुटि होने पर प्रबंधकों को इसकी जानकारी मिल जाती है।
मूल्यांकन द्वारा परियोजना में हुये सभी प्रकार के कार्यक्रमों की प्रगति तथा कार्यक्रमों की रूपरेखा की वस्तु स्थिति का पता चलता है।
इससे प्रबंधकों को यह निर्धारित करने में सहायता मिलती है कि क्या कार्यक्रम के लिए उपलब्ध संसाधन पर्याप्त हैं और उनका उचित प्रयोग किया जा रहा है। उन्हें यह भी पता चलता है कि क्या उपलब्ध क्षमतायें पर्याप्त व उचित हैं और क्या यह योजनानुसार प्रगति कर रहा है।
मूल्यांकन द्वारा प्रबन्धकों को पता चलता है कि जो संसाधन प्रयोग किये गये थे उनका कहां-कहां पर उचित उपयोग नही हुआ तथा किन-किन कारणों से परियोजना सफल हुई अथवा असफल हुई।
अवबोधन से मूल्यांकन गतिविधियों के लिए सहायक आधार प्राप्त होता है।
मूल्यांकन किसी भी परियोजना का अंतिम चरण होता है। इसी के आधार पर वित्तीय स्थिति का पूर्वानुमान किया जाता है।

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