समाज कार्य में निदान के चरण - Steps Of Diagnosis In Social Work.


निदान की प्रक्रिया में कार्यकर्ता विभिन्न चरणों से गुजरता हुआ समस्या के मूल में छिपे कारणों को जानने का प्रयास करता है। ये चरण निम्नलिखित हैं : 
(1) तथ्यों का संकलन - सेवार्थी से सूचनाएँ प्राप्त करने के लिए कार्यकर्ता क्षेत्रीय तथा प्रलेखीय स्र्रोतों का उपयोग करते हुए सेवार्थी की समस्या, उसके व्यक्तिगत तथा सामाजिक-सांस्कृतिक पक्ष का अध्ययन करता है। सेवार्थी से सम्बन्धित प्रतिवेदनों, संस्था के अभिलेखों, मनोचिकित्सकों तथा मनोवैज्ञानिकों के प्रतिवेदनों, सेवार्थी के सगे सम्बन्धियों,  पड़ोसियों तथा मित्रों इत्यादि से प्राप्त सूचनाओं को कार्यकर्ता द्वारा संकलित किया जाता है। 

(2) तथ्यों का मूल्यांकन - वैयक्तिक समाज कार्य में सेवार्थी से सम्बन्धित संकलित किये गये तथ्यों का मूल्यांकन कार्यकर्ता तीन प्रकार से करता है : 
 समस्या का मूल्यांकन समस्या के स्वरूप के विषय में सर्वप्रथम कार्यकर्ता जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करता है। वह यह जानने का प्रयत्न करता है कि समस्या मनोवैज्ञानिक, शारीरिक, सामाजिक अथवा सामन्जस्य से सम्बन्धित है। समस्या का मूल्यांकन करते समय सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात कार्यकर्ता के लिए यह है कि सेवार्थी किस प्रकार समस्या से ग्रसित है, उसकी समस्या का जन्म कब हुआ, समस्या-समाधान हेतु कब-कब और क्या-क्या प्रयास किये गये, इन प्रयत्नों से सफलता मिली अथवा नहीं, आदि की जानकारी करना तथा मूल्यांकन करना। 

व्यक्तित्व का मूल्यांकन - वैयक्तिक समाज कार्यकर्ता सेवार्थी की आन्तरिक एवं वाह्य शक्ति का मूल्यांकन करता है, ऐसा वह सेवार्थी की समस्या अथवा रोग प्रतिरोधक क्षमता का ऑकलन करने के लिए करता है, साथ ही कार्यकर्ता यह भी जानने का प्रयास करता है कि उसके अतीत के अनुभव कैसे रहे हैं, उसमें स्वयं निर्णय लेने की क्षमता है अथवा नहीं, अप्रत्याशित घटनाओं को सहजता से लेते हुए उसके लिये निर्णय लेने में वह कितना कुशल है, आदि। 

 पर्यावरण का मूल्यांकन - वैयक्तिक समाज कार्यकर्ता सेवार्थी के परिवार, पड़ोस, सगे-सम्बन्धियों, इष्टमित्रों, विद्यालय, धार्मिक, आर्थिक एवं राजनैतिक संस्थाओं, मनोरंजनात्मक संस्थाओं इत्यादि के विषय में मूल्यांकन करता है। इस तरह का मूल्यांकन करते समय वह अनेक प्रकार की संस्थाओं के साथ सेवार्थी के सम्बन्धों, इन संस्थाओं द्वारा सेवार्थी पर डाले गये प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रभावों तथा इन संस्थाओं के सन्दर्भ में सेवार्थी द्वारा प्रतिपादित की गयी भूमिकाओं और इनके उद्देश्यों की प्राप्ति में सेवार्थी द्वारा प्रदान किये गये योगदान का मूल्यांकन करता है।

 1. कारणात्मक कारकों की खोज वैयक्तिक समाज कार्यकर्ता इस चरण में यह निश्चित करने का प्रयास करता है कि समस्या का स्वरूप कैसा है, सेवार्थी के व्यक्तित्व पर सामाजिक पर्यावरण का क्या प्रभाव पड़ा, तथा कौन-कौन से कारक हैं जो मुख्य रूप से समस्या की उत्पत्ति में उत्तरदायी हैं। 

2. वर्गीकरण इस चरण में वैयक्तिक समाज कार्यकर्ता समस्या का उसके प्रकार, कारकों, समाधान के लिए अपेक्षित उपायों, इत्यादि के आधार पर वर्गीकरण करता है।