समाज कार्य में मूल्यांकन के प्रकार - Types Of Evaluation In Social Work.
1. आंतरिक मूल्यांकन : आतंरिक मूल्यांकन कार्यक्रम प्रबंधकों द्वारा आयोजित एवं पूर्ण किया जाता है। सकारात्मक विशेषतायें
1. कार्यक्रम लागू किये जाने के साथ ही आंतरिक मूल्यांकन करने से अधिक जानकारियां और सूचनायें मिलती है जो बाहरी तौर पर मूल्यांकन में प्राप्त नहीं हो पाती।
2. मूल्यांकन से प्राप्त परिणामों पर स्वामित्व रहता है जिससे कि प्राप्त नतीजों को सुधार के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
3. समस्याओं और सम्भावनाओं के बारे में बेहतर जानकारी मिलती है जिससे विश्लेषण और अनुशंसाये व्यावहारिक हो सकती है।
4. आंतरिक मूल्यांकन कम खर्चीला होता है और यह मॉनीटरिंग प्रक्रिया को भी समृद्ध करता है।
आंतरिक मूल्यांकन की कमियां
1. आंतरिक मूल्यांकन के अंतर्गत पहले से प्राप्त जानकारियों या पूर्वाग्रह के आधार पर विश्लेषण करने की प्रवृत्ति रहती है।
2. आंतरिक मूल्यांकन के अन्तर्गत अपनाई जा रही कार्ययोजनाओं को सही ठहराने की प्रवृत्ति आमतौर पर देखी जाती है।
2. बाहरी मूल्यांकन : मूल्यांकन अध्ययनों का अनुभव रखने वाली किसी एजेन्सी या व्यक्ति द्वारा किए जाते हैं।
सकारात्मक विशेषतायें
1. इससे कार्यक्रम के बारे में नई जानकारी मिलती है और इनमें पूर्वाग्रह की कोई संभावना नही होती। कार्यक्रम के बारे में बाहरी मूल्यांकन के अपने दृष्टिकोण हो सकते है परन्तु एक ही कार्यक्रम को अलग नजरिए से देखना लाभप्रद हो सकता है।
2. इससे उन समस्याओं और कारणों का भी पता चलता है जिस पर संभवतः आंतरिक मूल्यांकन के दौरान ध्यान न दिया गया हो।
3. अधिक उत्तरदायित्वपूर्ण प्रक्रिया है।
बाहरी मूल्यांकन की कमियां
1. यह प्रक्रिया अधिक मंहगी होती है।
2. इसमें उठाये गये विषय सीमित होते हैं।
3. यद्यपि विश्लेषण बहुत अधिक विस्तृत और विवेचनात्मक हो सकता है फिर भी यह आवश्यक नही कि दी गई अनुशंसायें अधिक व्यावहारिक विकल्प हों।
4. किसी बड़े कार्यक्रम में इस तरह के विषयों और कारणों पर अधिक ध्यान दिया जाता है और केवल उस समय उपलब्ध परिस्थितियों को ही ध्यान में रखा जाता है।
3. प्रक्रिया का मूल्यांकन : प्रक्रिया के मूल्यांकन में पूरी प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि प्रक्रिया को किस प्रकार बनाई गई योजना के अनुसार क्रियान्वित किया गया और इसकी गुणवत्ता कैसी थी।
4. परिणामों का मूल्यांकन : इसमें कार्यक्रम के परिणामों में ध्यान दिया जाता है और यह देखा जाता है कि क्या कार्यक्रम से वांछित परिणाम प्राप्त हुए और किस स्तर तक।
5. कार्यक्रम का मूल्यांकन : इसके अन्तर्गत कार्यक्रम की प्रक्रिया और नतीजों दोनों का ही मूल्यांकन किया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि क्या कार्यक्रम से वांछित परिणाम प्राप्त हुए और किस गुणवत्ता के साथ वे परिणाम मिल पाये। इसमें परिणामों को प्राप्त करने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया और जानकारियॉ भी कार्यक्रम के आंकलन का एक भाग होती है।
6. प्रभाव का मूल्यांकन : इसके अन्तर्गत कार्यक्रम के परिणामों का मूल्यांकन किया जाता है और यह देखा जाता है कि इस कार्यक्रम के उद्देश्य पूरे हो पाये अथवा नही। 7. समवर्ती मूल्यांकन, रचनात्मक मूल्यांकन : कार्यक्रम के दौरान बार-बार कई स्तरों पर यह मूल्यांकन किया जाता है ताकि इसका प्रभाव चलाये जा रहे कार्यक्रम पर पड़े। आमतौर पर समवर्ती मूल्यांकन बाहरी एजेन्सियों द्वारा किया जाता है।
यदि इसको आंतरिक तौर पर किया जाये तो इसको मॉनीटरिंग का ही एक भाग माना जायेगा। 8. कार्यक्रम के अंत में किया जाने वाला मूल्यांकन : इसे कार्यक्रम की समाप्ति के बाद किया जाता है ताकि कार्यक्रम के नये चरण को आरंभ करने से पहले वर्तमान कार्यक्रम के अनुभवों से सीखा जा सके या फिर इसी कार्यक्रम को दूसरे स्थान पर दोहराने की योजना तैयार की जा सके।

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