बी एम आई (शरीर द्रव्यमान सूचकांक) का उपयोग, महत्व, लाभ, हानि एवं इतिहास - BMI Uses, Importance And History
बी एम आई
(शरीर द्रव्यमान सूचकांक)
∙
बॉडी मास इंडैक्स (एन्थ्रोपोमैट्रिक सूचकांक) अर्थात शरीर द्रव्यमान सूचकांक,
ये
बताता है कि शरीर का भार उसकी लंबाई के अनुपात में ठीक है या नहीं।
∙ बीएमआइ को किसी व्यक्ति की
लंबाई को दुगुना कर उसमें भार किलोग्राम से भाग देकर निकाला जाता है। वयस्कों में
मोटापे का निर्धारण करने के लिए सबसे पसंदीदा तरीका बी-एम-आई - बॉडी मास इंडेक्स
है। यह किसी व्यक्ति की ऊंचाई के आधार पर एक स्वस्थ शरीर के वज़न का आकलन करने के
लिए एक उपयोगी उपकरण हो सकता है।
∙ बी-एम-आई
ऊंचाई से वजन का संबंध कराने के लिए एक मुख्य सूचक है, एक
व्यक्ति का वज़न किलोग्राम में, उनकी ऊंचाई
मीटर में द्वारा विभाजन किया जाता है।
∙ बॉडी
मास इंडेक्स (बी-एम-आई) = kg/m2
बी-एम-आई
स्थिति
18.5 से नीचे
सामान्य
से कम वज़न
18.5 –
24.9 सामान्य
25 –
29.9 सामान्य से अधिक वज़न
30 –
34.9 मोटापा
35 –
39.9 अति मोटापा
>
40 अस्वस्थ
(रूग्ण) मोटापा
बी एम आई की विधि / उपकरण
बी एम आई करने के लिए ऊंचाई
तथा वजन का पता करना आवश्यक होता है और उसके लिए दो उपकरणों का एस्तेमाल किया जाता
है ।
1.
Heights : Anthropometer Rod
2.
Weight : Weight Machine
विधि
:- ऊंचाई का मापन –
जिस
व्यक्ति का BMI
मापना
होता है उसे अन्थ्रोपोमीटर रोड से सीधा खड़ा क्र उसके पैर जमीन से पूरे तरह से सटे
होने चाहिए तथा उसके शरीर की स्तिथि एकदम सीढ़ी होनी चाहिए । इस प्रकार ऊंचाई का
मापन किया जाता है।
वजन
का मापन :-
जिस
व्यक्ति का BMI
करना
होता है उसका वजन,वजन मापन यन्त्र द्वारा
लिया जाता है। वजन मापते समय व्यक्ति जूते व चप्पल नही पहने होना चाहिए ।
BMI
= Weight (kg)/ Height ( m2)
∙ बी एम आई के महत्व
:-
1.
बीएमआई शरीर की
लंबाई के आधार पर आदर्श वजन बताता है।
2.
बीएमआई शरीर की चर्बी
को नहीं नापता है।
3.
यह शरीर में
मोटापे की स्थिति के बारे में बताता है।
4.
यह आपके सामान्य
स्वास्थ का बारे में भी बताता है।
∙ बी एम आई चार्ट
|
श्रेणी |
बीएमआई रेंज - किलोग्राम प्रति
वर्ग मीटर (kg/m2) |
बीएमआई प्राइम |
इस BMI
के
साथ एक 1.8 मीटर (5 फीट
11 इंच)
व्यक्ति का द्रव्यमान (वजन) |
|
वजन
का अत्यधिक कम होना |
16.5
से
कम |
0.66
से
कम |
नीचे
53.5
किलोग्राम
(8.42 स्टोन;
118 पौंड) |
|
वजन
का जरुरत से कम होना |
16.5
से
18.5
तक |
0.66
से
0.74
तक |
के
बीच 53.5
और
60
किलोग्राम
(8.42
और
9.45 स्टोन;
118 और
132 पौंड) |
|
सामान्य |
18.5
से
25
तक |
0.74
से
1.0
तक |
के
बीच60
और
81
किलोग्राम
(9.4
और
12.8 स्टोन;
132 और
179 पौंड) |
|
वजन
का जरुरत से ज्यादा होना |
25
से
30
तक |
1.0
से
1.2
तक |
के
बीच 81
और
97
किलोग्राम
(12.8
और
15.3 स्टोन;
179 और
214 पौंड) |
|
मोटापा
वर्ग I |
30
से
35
तक |
1.2
से
1.4
तक |
के
बीच 97
और
113
किलोग्राम
(15.3
और
17.8 स्टोन;
214 और
249 पौंड) |
|
मोटापा
वर्ग II |
35
से
40
तक |
1.4
से
1.6
तक |
के
बीच 113
और
130
किलोग्राम
(17.8
और
20.5 स्टोन;
249 और
287 पौंड) |
|
मोटापा
वर्ग III |
40
से
अधिक |
1.6
से
अधिक |
से
अधिक 130
किलोग्राम
(20 स्टोन;
290 पौंड) |
बी
एम आई के लाभ :-
बी एम आई
को सही सीमा (<२३)
में बनाए रखने के कई लाभ होते हैं:-
1.
इससे मधुमेह नही
होती है,
व
यदि पहले से ही मधुमेह के रोगी हैं तो इससे रक्त
शर्करा का
स्तर बेहतर होता है और मधुमेह के लिए जो दवाएं ले रहे हैं, उनमें
भी कमी आएगी।
2.
इससे रक्तचाप में
कमी आती है और यदि पहले से ही उच्च
रक्तचाप हो
तो यह उसे नियंत्रित करता है और ली जा रही है । रक्तचाप संबंधी की दवाइयों में भी
कमी आती है
3.
इससे हृदय रोगों की संभावना में भी कमी आती है।
4.
इससे पक्षाघात कैंसर, ओस्टियोपोरोसिस (जोड़ों
के दर्द) आदि में भी रोकथाम लाता है ।
5.
कोलैस्ट्रोल के
स्तर को सामान्य बनाता है और अस्थिर हो चुके रक्त-वसा स्तर (लिपिड प्रोफाइल) को भी
सामान्य अवस्था में लाता है। इसके अलावा इसको बनाये रकने से ऊर्जा के
स्तर में भी काफ़ी सुधार आता है।
कम बीएमआई की हानि
:-
1.
युवा अवस्था में सामान्य से बहुत
कम और बहुत अधिक बीएमआई होने वाले युवाओं की आयु बढ़ने पर जनन-क्षमता कम हो जाती
है।
2.
शरीर का भार,
प्रजनन
और इससे संबंधित व्यवहार को प्रभावित करता है।
3.
इसके साथ ही गर्भावस्था के समय भी
कई समस्याएं आती हैं। कम बीएमआई के कारण हर उम्र की स्त्रियों को समस्याओं का
सामना करना पड़ता है।
4.
आवश्यकता से अधिक दुबली महिलाओं के
माहवारी में अनियमितता होती है। वहीं दुबले पुरुष की शुक्राणु गुणवत्ता
भी गिरी हुई पाई गई। अधिक मोटे लोगों में भी स्तंभन
दोष के
लक्षण देखे गए।
5.
वहीं दुबले लोगों के शरीर में गया
भोजन क्रमाकुंचन गति के लिए आवश्यक ऊर्जा में ही खत्म हो जाता है और अतिरिक्त
ऊर्जा के कमी के कारण कमजोरी लगती है।
इतिहास
:-
BMI के लिए सूत्र की खोज 19 वीं शताब्दी में हुई, लेकिन अनुपात के लिए शब्द "शरीर द्रव्यमान
सूचकांक" और इसकी लोकप्रियता 1972 में मानी जाती है, जिसका श्रेय एंकल कीज (Ancel Keys)के
द्वारा प्रकाशित एक पत्र को दिया जाता है, जिसने पाया कि BMI भार और ऊंचाई के अनुपातों के बीच शरीर की वसा की
प्रतिशतता के लिए सर्वोत्तम प्रोक्सी है। शरीर की वसा के
मापन के प्रति रूचि के बढ़ने का कारण है कि समृद्ध पश्चिमी समाजों में ओबेसिटी या
मोटापा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
कीज के द्वारा कहा गया कि BMI जनसंख्या अध्ययन के लिए स्पष्ट रूप से
उपयुक्त है और व्यक्तिगत निदान के लिए अनुपयुक्त है। फिर भी, इसकी सरलता के कारण, इसकी अनुपयुक्तता के बावजूद, व्यक्तिगत निदान के लिए इसका उपयोग बहुत व्यापक हो
गया है।
BMI का उपयोग
1. किसी व्यक्ति के "मोटापे" या
"पतलेपन" का एक साधारण आंकिक माप उपलब्ध कराता है, जिससे स्वास्थ्य पेशेवर को अपने रोगी के साथ
अतिरिक्त-भार और कम-भार की समस्या पर चर्चा करने में मदद मिलती है।
2. BMI विवादस्पद बन गया है क्योंकि चिकित्सकों सहित कई
लोग, चिकित्सकीय
निदान के लिए इसके आंकिक मान पर भरोसा करने लगे हैं ।
3. इसका
प्रयोग एक औसत शरीर संघटन से युक्त गतिहीन (भौतिक रूप से निष्क्रिय) व्यक्तियों के
वर्गीकरण के साधारण तरीकों के लिए किया जाता है।

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