गांधीवादी सामाजिक न्याय की अवधारणा - Gandhian Social Justice Concept

 


गांधीवादी सामाजिक न्याय की अवधारणा

गांधीवादी सामाजिक न्याय की अवधारणा- गांधीजी अपने आपको प्रगतिशील एवं आधुनिक मानते थे। वे आधुनिक न्याय प्रणाली को तो मानते थे लेकिन जातीय और धार्मिक ऊंच-नीच को भी मान्यता देते थे। वे ये तो मानते थे कि सभी जातियों को आपस में मिलने-बैठने का अधिकार होना चाहिए, छुआछूत नहीं होना चाहिए लेकिन जाति आधारित कार्य नही त्याग न चाहिए। इस परिप्रेक्ष्य में वे कहते कि यदि तुम अपनी जाति में निर्धारित जातिगत गंदे कामों को मन लगाकर करते हो तो तुम्हारा अगला जन्म ऊंची जाति में होगा। इस प्रकार वे पूर्नजन्म  में विश्वास करते थे। एक खास वर्ग के नेता गांधी के इस सिद्धांत को मानते हैं। अब इस सिद्धांत को दक्षिणपंथी विचारधारा के नाम से भी जाना जाता है।