पंचम पीढ़ी के कम्प्यूटर (1989 से वर्तमान) - Fifth Generation of Computers
पंचम पीढ़ी के कम्प्यूटर (1989 से वर्तमान)
इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों के निर्माण में लगातार वृद्धि हुआ जिससे Utra Large Scale Integration (ULSI) तकनीक का विकाश पंचम पीढ़ी में हुआ ULSI में लगभग 10 मिलियन इलेक्ट्रॉनिक्स सर्किट्स का एकीकरण किया गया. इससे माइक्रोप्रोसेसर की क्षमता में वृद्धि हुई लगभग प्रतेक वर्ष माइक्रोप्रोसेसर की तेजी तथा मेमोरी के धारिता में दो गुणे से वृद्धि होता था तृतीय और चतुर्थ पिधि से मेन फ्रेम कंप्यूटर के CPU के बराबर पंचम पीढ़ी के माइक्रोप्रोसेसर की क्षमता होती थी. कंप्यूटर टेक्नोलॉजी में तेजी से परिवर्तन होने से कंप्यूटर का आकर छोटा होता गया और इसकी कीमत भी साल दर साल कम होता गया,
पंचम पीढ़ी में प्रकाशीय डिस्क (optical Disk) का प्रयोग पोर्टेबल मास भंडारण (Portable Mass Storage)
के रूप में किया जाता था.
पंचम पीढ़ी में कंप्यूटर नेटवर्क में भी बहुत परिवर्तन आया था कंप्यूटर नेटवर्क में ज्यादा से ज्यादा कंप्यूटर जुड़ रहे थे. इससे इन्टरनेट और इससे संबंधित टेक्नोलॉजी की लोकप्रियता मा इजाफा दिन-ब-दिन हो रहा था इन्टरनेट के कारण पुरे विश्व में कहीं से बैठ कर आप किसी अन्य कोने में बैठ कंप्यूटर यूजर से इलेक्ट्रोनिक मेल (ई-मेल) के माध्यम से आप बात कर सकते थे, वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) जसे www के नाम से जाना जाता है का गठन टीम बर्नर ली के द्वारा १९०० में किया था. इससे वेब साईट का निर्माण किया जा सकता था जिस पर किसी भी प्रकार के सूचनाओं तथा कितनी बड़ी सूचनाओं को रखा जा सकता था जिसे किसी के द्वारा विश्व
पंचम पौड़ी में मल्टीमीडिया टेक्नोलॉजी का विकास गुआ था. इसमें सूचनाओं को बनाने के लिए टेक्स्ट, ग्राफ़िक्स, एनीमेशन, ऑडियो, पीडियो का सहारा लिया जाना संभव हो सका था
पंचम पीढ़ी के कंप्यूटर की विशेषताएँ
● पोर्टेबल पीसी (Portable PC) जिसे नोटबुक भी कहा जाता है जिसका आकार चतुर्थ पीढ़ी के पर्सनल कंप्यूटर से कम था, यह इतना छोटा होता था कि इसे किसी अत्तैची में भी रखा जा सकता था. इसका उपयोग आप यात्रा करने के दौरान भी कर सकते हैं।
● पंचम पीढ़ी के पर्सनल कंप्यूटर चतुर्थ पीढ़ी के पर्सनल कंप्यूटर के तुलना में बहुत तेजी से काम करते थे, नोटबुक, डेस्कटॉप कंप्यूटर और वर्क स्टेशन कंप्यूटर को सामान्यतौर पर वातानुकूलित की आवश्यक नहीं होती थी,
● ये कंप्यूटर बहुत कम इलेक्ट्रिसिटी लेता था,
• ये बहुत विश्वनीय और इसमें हार्डवेयर में खराबी की संभावनाएं न के बराबर थी.
● इसके पास बहुत तेजी से काम करने वाला और अधिक मात्रा में प्रथिमिक और प्रतियक मेमोरी होती थी.
● ये कंप्यूटर सामान्य उद्देशीय के होते थे.
• इस पौदों के कंप्यूटर के निर्माण में VLSI एकीकरण पद्धति का उपयोग किया जाता था जिसके कारण कंप्यूटर को निमार्ण में लगाने वाले समय की बचत होती थी और कंप्यूटर के मूल्य के बहुत अधिक म आई थी.
• उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा का समानीकरण किये जाने से एक कंप्यूटर पर लिखे प्रोग्राम को किसी अन्य कंप्यूटर पर भी रन किया जा सकता था
● प्रयोक्ता से अनुरूप मल्टीमीडिया इंटरफ़ेस का निर्माण किया जाने लगा जससे कंप्यूटर पर काम करना पाहिले के तुलन और आसान हो गया.
• इन्टरनेट के विकास के कारण अनेक तरह के इन्वेनेट आधारित एप्लीकेशन लिखे जाने लगे।
● कंप्यूटर का उपयोग में तेजी आने से हरेक के जरूरतों के अनुसार कंप्यूटर का निर्माण प्रारंभ हुआ इससे
बहुत प्रकार के कंप्यूटर बहुत तरह के मूल्यों में बाजार में उपलब्ध था,
पंचम पीढ़ी के कम्प्यूटर को परिभाषित करना कुछ कठिन होगा। इस पीढ़ी के कम्प्यूटर लेखक सी क्लार्क के द्वारा लिखे उपन्यास अ स्पेस ओडिसी में वर्णित HAL 9000 के समान ही है ये रियल लाइफ कम्प्यूटर होंगे जिसमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस होगा आधुनिक टेक्नॉलाजी एवं विज्ञान का उपयोग करके इसका निर्माण किया जाएगा जिसमें एक एकल सी. पी. यू. की जगह समानान्तर प्रोसेसिंग होगी तथा इसमे सेमीकंडकटर टेक्नॉलाजी का उपयोग किया जाएगा जिसमें बिना किसी प्रतिरोध के विद्युत का बहाब होगा जिससे सूचना के बहाव की गति बढ़ेगी।
सारांश
कंप्यूटर की इतिहास की की विस्तार से जानकारी उपलब्ध कराया गया है। चार्ल्स बैबेज को संगणक का पिता कहा जाट है क्योकि आधुनिक संगणक की कार्यविधि का सैधानिक प्रारूप चार्ल्स में दिया था। कंप्यूटर के पीढ़ी को पांच भागों विभक्त कर बताया गया है। इन पौदी में किस प्रकार के प्रद्योगिकी का उपयोग किया जाता था. इसकी जानकारी उपलब्ध कराया गया है। प्रत्येक पीढ़ी की विशेषताएँ और कमियों की जानकारी दी गयी है।

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