गैर सरकारी संगठन के प्रकार्य (Functions of NGO )

 



गैर सरकारी संगठन के प्रकार्य (Functions of NGO)


सरकार में अपनी राज्य नीति के निर्देशित सिद्धांतों के तहत राज्य को कल्याणकारी राज्य का दर्जा दिया है। निश्चित रूप से सोसाइटी और सामाजिक संगठनों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि ये भी अनाथ, दलित और कमजोर वर्गों महिला और बच्चों की समस्याओं को हल करने के लिए उनकी मूलभूत आवश्और सुविधाओं को प्रदान करने के लिए अपनी विशेष भूमिका निभाएं सरकार में नागरिकों के जीवन स्तर और उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ योजनाएं निर्धारित की है, जिनमें (एन.जी.ओ) गैर सरकारी संगठन और स्वयं सेवी संगठन अपना योगदान दे सकते हैं। इनका विस्तृत उल्लेख नीचे किया है


1. वृद्धों का संरक्षण


2. कृषि


3. पशु कल्याण


4. कला 


5. दस्तकारी


6. शहर और नगर 


7. संस्कृति और धरोहर


8. विकलांगता


9. शिक्षा


10. मानव संसाधन


11. स्वास्थ्य


12. पर्यावरण


13 ग्रामीण विकास







14. जनजातीय लोग


15. कूड़े कर्कट का नियंत्रण


16. महिला विकास


17. अन्य सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां और भी कई अन्य क्षेत्र ऐसे है। कि एन.जी.ओ के कार्यों के तहत आते हैं। वस्तुत: समाज के कल्याण हेतु हर एक क्षेत्र ही गैरसरकारी संगठनों के कार्यों व उद्देश्यों के तहत आते है। मुख्य रूप से निम्न कार्यों को गैरसरकारी संगठनों के प्रकार्यों के रूप में

अपेक्षा की जाती है -


गैरसरकारी संगठन


1. जन-संस्कृति के साथ तालमेल को तत्पर रहते हैं।


2. खुद को जनता का हिस्सा मानते है जन मनोविज्ञान को समझने की चेष्टा करते हैं।


3. अपने कार्यकाल से उनका उतना ही सरोकार होता है, जितना रिकार्ड रजिस्टर आदि के संधारण के लिए आवश्यक होता है।


4. वे किसी कार्यविधि के अधीन नहीं होते।


5. विकास की समग्रता व नियंता डी उनका सबसे बड़ा मुद्दा होता है।


6. मशीनी प्रक्रिया और पर आधारित कार्य उनके लिये अश्पृश्य होते हैं। 


7. उनके मन में सामाजिक मूल्य तथा विशेष अवधारणाएं होती है। इन्हीं की स्थापनाओं के लिए वे कार्य करते हैं।


8 ये उन्ही परियोजनाओं का चुनाव करते हैं जो उनके मूल उद्देश्यों और अवधारणाओं के अनुकूल हो


9. अपने कार्यों में लोकतांत्रिक पद्धति तो अपना ही है, संगठन में उस वरीयता देते हैं।


10 सामूहिक चर्चाओं और विचार-विमर्श से निष्पादित निर्णयों को ही अंगीकृत करते हैं।


11. पारदर्शिता और सुचिता उनकी कसौटी होते हैं।


12 ये लोकप्रियता की बजाय जन आस्था से भरपूर होते हैं। 


13 वे राष्ट्रीय नीतियों और अंतरराष्ट्रीय रुझानों को भी ध्यान में रखते हैं।






14 नैसर्गिक न्याय समतामूलक समाज के निर्माण में आस्था रखते हैं। 


15. धर्म, लिंग जातिगत भेदभाव से दूर होते हैं।


16 जन अधिकारों के प्रति सजग रहना उनका प्रकार्य व दायित्व होता है। 


17 अपने ज्ञान व कौशल को सदैव परिभाषित करते रहते हैं।


18.अध्ययन और सहचित जीवन का अभिन्न अंग होता है।


इन सभी प्रकार्यों के साथ कुछ अनकहे व अनजाने कार्य भी आवश्यकताओं पर निर्भर हो कर गैर सरकारी संगठनों के प्रकार्यों में शामिल हो जाते है। और असल में आवश्यकताएं ही गैर सरकारी संगठन के कार्यों की जननी है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण निम्नलिखित है - 


तरुण भारत संघ एक ऐसी ही संस्था है, जिसके जन्मदाता राजेन्द्र सिंह है। उन्होंने राजस्थान के गांवों में पानी के संकट से ग्रस्त ग्रामीणों को राहत पहुंचाने और पानी को प्रबंधन व्यवस्था कराने का जिम्मा लिया और पूरा किया शुरू में उन्हें लोगों के अविश्वास असहयोग का सामना करना पड़ा। तरुण भारत संघ जैसी स्वयंसेवी संस्था ने यहाँ (राजस्थान) में जोहड जैसी जल संचय परंपरा को ही पुनर्जीवित किया और मरुभूमि की तकदीर बदल दी। जोहड़ को इस तरह से समझा जा सकता है कि यह वर्षा के जल को एकत्र करनेवाला ऐसा बांध है, जहां वर्षा के पश्चात इसी भूमि पर खेती की जाती है।





इस संस्था के संचालक ने बिना सरकारी मदद लिए (शुरु में) यह कार्य आरम्भ किया और सफलता पूर्वक सम्पन्न किया। राजेन्द्र सिंह के शब्दों में अलवर जिले में 1985 और 1985 में सूखे की मुश्किल मार झेली। औरतों को पीने का पानी लाने के लिए 2 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था और कुवों के पानी की राशनिंग थी। लोग कुपोषण का शिकार बने और बड़ी संख्या में जानवर मरे। पारंपरिक रूप से यहां के लोग सिचाई का पानी जमा करने के लिए जो का निर्माण करते थे, लेकिन आधुनिक और सामुदायिक कामों में भागीदारी कम होने के चलते इस प्रणाली का चलन कम हो गया। मुश्किलों के पश्चात् कुछ गांव के परिवार तरुण भारत संघ के विचार से जुड़ने को तैयार हो ही गए और बिना किसी बाहरी सुविधा तथा सहायता के तकनीकि सहायता बगैर साढ़े चार मीटर लंबे तीन बाघ बना डालें। बरसात आयी पानी बरना और जोड़ों ने वर्षा जल को रोक लिया इससे भूमिगत जल का स्तर बढ़ गया कुओं में पानी धमा और खेती के लिए नमी मिली। नालों को बंद करने से उपजाऊ मिट्टी को बहकर जाना भी ठहर गया इस आंखों देखे चमत्कार ने लोगों को मोह लिया उन्हें अपनी तकदीर की कुंजी मिलगयी। यह कुजी राजेन्द्र सिंह जैसे "जल पुरोधा" और तरुण भारत संघ ने उन्हें खोज कर दी थी, जो कि शुरु से उनके पास थी परन्तु दिशा दिखाने वाला कोई ना कह सकते है "मोको कहीं दूढे बंदे, मैं तो मेरे पास में इस उदाहरण से गैर सरकारी संगठनों के प्रकार्यों की व्याख्या उनके समाज हेतु हितायकारी उद्देश्यों को देखते हुए की जा सकती है।