कैदी (कारागृह अधिनियम 1894) - Prisoners (Prisons Act 1894)
कैदी (कारागृह अधिनियम 1894) - Prisoners (Prisons Act 1894)
कारागृह अधिनियम 1894 : इस अधिनियम का उद्देश्य है कैदियों के लिए उपयुक्त और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना या अधिनियम मांग करता है:
(a) निम्नलिखित के कारावास में पृथक स्थान की व्यवस्था की जाए:
(i) पुरुष और महिला कैदियों के लिए अलग-अलग,
(ii) 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष कैदियों के लिए अन्य पुरुष कैदियों से अग,
(iii) छीवानी कैदियों के लिए आपराधिक कैदियों से अलग,
(iv) गैर सजायाफता अपराधिक कैदियों के लिए सजायफता आपराधिक कैदियों से अलग
(b) एक दीवनी कैदी या गैर सजायफता आपराधिक कैदी को अपना रख-रखाव स्वयं करने की अनुमति दी जाए और वह अपने लिए भोजन, कपड़े, बिस्तार या अन्य आवश्यक वस्तुएं निजी स्रोतों से खरीद, सके,
(c) एक दीवानी कैदि या गैर सजायफता अपराधिक कैदी अगर निजी स्रोतों से आवश्यक कपड़े और बिस्तर की व्यवस्था नहीं कर सकते तो उन्हें इन वस्तुओं की आपूर्ति की जाए,
(d) छीवानी कैदियों को अपना व्यापार या पेशा रखने की इजाजत दी जाए;
(e) बीमार कैदियों के लिए किसी मेडिकल सबार्डिनेट द्वारा या अस्पताल में आवश्यक औषधियों और चिकित्सा की व्यवस्था की जाए।
इसके अतिरिक्त, बंधक अधिनियम 1900 की यह मांग है कि उन्मादी (पागल) कैदियों को किसी पागलखाने या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर रखा जाए।
निर्धनों के लिए कानूनी सहायता अधिवक्ता अधिनियम,1961 :- इस अधिनियम में बार काउंसिल ऑफ इंडिया और स्टेट बार काउंसिल स्थापित करने की व्यवस्था है जो प्राथमिक तौर पर भारत में कार्यरत वकीलों की कार्यवाही को नियमित करे और भारत में कानून के व्यवसाय के विकास और उत्थान का काम करें। इस क्षेत्र में बार काउंसिलों को कुछ खास सामाजिक जिम्मेदारियां भी सौंपी गई उनसे यह अपेक्षा की जाती है कि
(i) कानून के विषयों पर प्रसिद्ध विधि-येताओं के सहयोग से सेमिनार का आयोजन करे और सीधे बातचीत की व्यवस्था करे और कानूनी सहायता की व्यवस्था करें,
(ii) निर्धनों के लिए विनिर्दिष्ट तरीके में कानूनी सहायता की व्यवस्था करें
निम्नलिखित के लिए फंड स्थापित करें:
(a) दरिद्र, विकलांग या अन्य एडवोकेटों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के संचालन के लिए वित्तीय सहायता देना;
(b) कानूनी सहायता और परामर्श प्रदान करना इस संदर्भ में बने नियमों के अनुसार,
(c) कानूनी पुस्तकालयों की स्थापना करना;
(iii) एक या एक से अधिक कानूनी सहायता समितियां गठित करें।

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