हिन्दू दत्तक ग्रहण और संरक्षण अधिनियम 1956:- Hindu Adoption and Protection Act 1956



हिन्दू दत्तक ग्रहण और संरक्षण अधिनियम 1956:- Hindu Adoption and Protection Act 1956


हिन्दू दत्तक ग्रहण और संरक्षण अधिनियम 1956:- इस अधिनियम की धारा 20 के अनुसार प्रत्येक हिन्दू व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अपने बूढ़े या असहाय माता पिता की देखभाल करे, ऐसी हालत में अवश्य हीरू जब वे अपनी आय या अपनी संपत्ति से अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हो। 'माँ-बाप' शब्द में वह सौतेली माँ भी आती है जिसका कोई अपना बच्चा न हो। देखमाल में भोजन, कपड़े, आवास, शिक्षा और चिकित्सा सहायता और उपचार आदि सभी शामिल हैं। पालन-पोषण करने के लिए रकम का निर्णय अदालत द्वारा उनकी स्थिति एवं प्रतिष्ठा, माता-पिता की उपयुक्त आवश्यकताओं, उनकी संपत्ति का मूल्य और उससे प्राप्त होने वाली आय आदि को ध्यान में रखकर किया जाएगा।


आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 :-


कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर 1973 की धारा 125 एक जुडीशियल मजिस्ट्रेट को यह अधिकार प्रदान करती है कि वह पत्नी, बच्चों, या माँ बाप के लिए, जो अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ हो, के पालन-पोषण करने के नियमित आदेश जारी करें। इस प्रावधान के तहत दी जाने वाली राहत दीवानी प्रकार की है तथा आपराधिक प्रक्रिया इसलिये अपनायी जाती है ताकि बेसहारा पत्नी और बच्चे या माँ बाप को सड़क पर न डाल दिया जाए। यह आदेश बेटों को दिया जा सकता है, बशर्ते उनके पार भरण-पोषण की रकम देने के लिए पर्याप्त साधन हो भरण-पोषण भत्ते के रूप में अधिक से अधिक 500 रूपये प्रति माह की रकम का फैसला दिया जा सकता है। 






मानसिक तौर पर रोगी व्यक्ति 


मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम 1987 :-. इस अधिनियम में मानसिक तौर पर रोगी व्यक्तियों के इलाज और उनकी देखभाल की व्यवस्था करने, उनकी संपत्ति और मामलों तथा इससे संबंधित मामलों के लिए प्रावधान है। इस अधिनियम के तहत पुलिस चौकी का इंचार्ज प्रत्येक अधिकारी (थानेदार) निम्नलिखित को सुरक्षा प्रदान करने के अधिकार रखता है।


(a) कोई व्यक्ति जो उसकी पुलिस चौकी के इलाके की सीमाओं में घूमता फिरता हुआ नजर आये और जिसके बारे में उसे यह विश्वास करने के कारण हों कि वह मानसिक तौर पर रोगी है और अपनी देखभाल स्वयं नहीं कर सकता और 


(b) कोई व्यक्ति जो उसकी पुलिस चौकी की सीमाओं है जिसके बारे में उसे यह विश्वास करने के कारण हो कि वह मानसिक रोगी होने के कारण खतरनाक हो सकता है।

इस प्रकार रोक के रखे गए व्यक्ति को 24 घंटों के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति की समझ बूझ की जाँच करेगा और चिकित्सा अधिकारी से उसकी जाँच करायेगा और आवश्यक पूछताछ करेगा मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को अंतरंग रोगी के रूप में इलाज कराने के लिए किसी मानस रोग अस्पताल या नर्सिंग होम में दाखिल करने का जारी सकता है।

इसके अतिरिक्त अगर किसी व्यक्ति को किन्हीं कारणों से यह विश्वास हो जाता है कि अमुक व्यक्ति मानसिक रोगी है, और वह उचित देखभाल और नियंत्रण में नहीं है, या उसके रिश्तेदार उसके साथ दुर्व्यवहार करते है या उस की परवाह नहीं करते तो वह ऐसे व्यक्ति के बारे में अपने इलाके के मजिस्ट्रेट को, जिसके अधिकार क्षेत्र में वह इलाका आता है, इसकी रिपोर्ट कर सकता है।