परियोजना प्रबन्धन के 7 एस एवं परियोजना की सफलता के निर्धारण हेतु निम्न महत्वपूर्ण कारक - The 7s of Project Management and the following important Factors to Determine the Success of the Project
परियोजना प्रबन्धन के 7 एस एवं परियोजना की सफलता के निर्धारण हेतु निम्न महत्वपूर्ण कारक - The 7s of Project Management and the following important Factors to Determine the Success of the Project
परियोजना प्रबन्धन के 7 एस
प्रबन्धन के मुददों को 7 एस ढांचा के तहत समझा जा सकता है इस को मैककिन्जी और कम्पनी ने विस्तार दिया। परियोजना प्रबन्धन के तत्वों को 7-एस को माध्यम से निम्न रूप से व्याख्यायित कर सकते हैं।
1. Strategy ( रणनीति) - परियोजना की आवश्यकता और उसे किस प्रकार सम्पन्न किया जाएगा।
2. Structure ( संरचना) - परियोजना के क्रियान्वयन हेतु संगठनात्मक ढांचा का उपयोग।
3. System (प्रणाली) - गतिविधियों की रूपरेखा, अनुरक्षण और नियंत्रण हेतु अपनायी जानेवाली प्रणाली।
4. Staff (कर्मचारी)- परियोजना में जो लोग काम करेगें उनका चयन, नियुक्ति प्रबन्धन और नेतृत्व प्रदान करना।
5. Skills (निपुणताएं) - प्रबन्धकीय और प्रविधि सम्बन्धी निपुणताए जो कि परियोजना प्रबन्धक और कर्मचारियों में होनी चाहिए।
6 Style (तरीका, ढंग) - लोगों में सामूहिकता की भावना से कार्य करना तथा यह महसूस करना कि वे दल के महत्वपूर्ण सदस्य है।
7. Stakeholder (लाभग्राही) - व्यक्ति और समूह जिनकी परियोजना प्रक्रिया में रूचि है या भाग ले रहें तथा उससे होने वाली प्राप्तियों से सम्बन्धित है।
सन्दर्भ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट द्वारा हार्वे मेयलर, पिर्यसन एडयूकेशन, एरिया
इस प्रकार में देखते हैं 7 एस का ढांचा प्रबन्धन से सम्बन्धित उन मुददों को इंगित करना है जिन पर हमें गौर करना चाहिए।
परियोजना प्रबंधन की सफलता को निर्धारित करने वाले कारक
सामान्यतः परियोजना की सफलता निर्धारित समय निर्धारित लागत में तकनीकी विशिष्टताओं के आधार पर आंकी जाती है । परन्तु कुछ शोधों से यह पता चला है कि परियोजना की सफलता का आंकलन उसके उद्देश्यों की प्राप्ति एवं उससे सम्बन्धित विभिन्न लोगों के अनुभवों के आधार पर भी किया जाता है।
किसी परियोजना की सफलता के निर्धारण हेतु निम्न महत्वपूर्ण कारक हैं :
1) परियोजना की व्यवहार्यता का गहन अध्ययन जिससे कोई भी महत्वपूर्ण तत्व अनदेखा न रहे जाये।
2) विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सम्बन्धित संस्था द्वारा परियोजना के क्रियान्वयन के पहले स्वीकृत की जाए।
3) परियोजना के विभिन्न चरणों में परियोजना प्रबंधक तथा उसके दल कि सक्रिय भागीदारी हो ।
4) एक ऐसा संगठन जिसमें संचार तथा नियंत्रण प्रणाली चुस्त हो।
5) परियोजना से सम्बन्धित विभिन्न अभिकरणों के मध्य उसकी परस्पर भूमिकाओं, दायित्वों सीमाओं की स्पष्ट समझ।
6) कोई असंतोष यदि है तो उसकी जल्द पहचान तथा परियोजना के दौरान उसका निस्तारण।
7) पर्याप्त एवं समय पर वित्त की उपलब्धता।
8) यदि परियोजना के आरम्भ से अंत तक लक्ष्यों से कोई भटकाव या विलगाव होता. है तो इस हेतु उपयुक्त क्रियाओं को करना चाहिए तथा आवश्यक है नियमित रूप से अपने को आद्यतन रखना चाहिए ।

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