साक्षात्कार के लाभ एवं परिसीमायें - Advantages and Limitations of Interview
साक्षात्कार के लाभ एवं परिसीमायें
साक्षात्कार के लाभ
साक्षात्कार के लाभ
निम्नलिखित हैं -
1. साक्षात्कार
विधि को प्रयोग में लाना सरल है।
2. छात्रों
की अन्तर्दृष्टि को विकसित करने में सहायक होती है।
3. सम्पूर्ण
व्यक्ति को समझने में यह विधि उत्तम है। व्यक्ति की अभिवृत्ति, संवेग विचार आदि सभी का अध्ययन होता है।
4. साक्षात्कार
देने वाले को अपनी समस्याएं प्रकट करने का साक्षात्कार अच्छा अवसर प्रदान करता है।
5.निषेधात्मक
भावनाओं को स्वीकार करने तथा उनको स्पष्ट करने का अवसर साक्षात्कार में प्राप्त
होता है।
6. विभिन्न
दशाओं और परिस्थितियों में साक्षात्कार का प्रयोग करने के लिए उसे लचकदार बनाया जा
सकता है।
7. साक्षात्कार
की प्रकृति लचीली होती है। किसी महत्वपूर्ण बात को ध्यान में रखकर आगे बढ़ा जा
सकता है। इस प्रकार व्यक्तित्व के किसी विशिष्ट पक्ष के बारे में जानकारी प्राप्त
की जा सकती है।
8. इस विधि
के दौरान ऐसे प्रश्नों को स्पष्ट किया जा सकता है जो व्यक्ति के समझ में न आ रहे
हों।
9. इसी
प्रकार ऐसे उत्तरों के विषय में स्पष्टीकरण प्राप्त किया जा सकता है जो
साक्षात्कारकर्ता के समझ में न आ रहा हो।
10. इसके
द्वारा व्यक्तियों से ऐसी सूचनाएं प्राप्त की जा सकती है जो लिखित रूप से प्राप्त
करना सम्भव न हो।
11. बातचीत
के दौरान साक्षात्कारकर्ता व्यक्ति की अनिच्छा असहयोग, इत्यादि
मनोभावों का भी अवलोकन कर सकता है, जिनके आधार पर उत्तरों की
वैधता जान सकता है।
साक्षात्कार की परिसीमाएं
-
साक्षात्कार की कुछ
कमियां भी पायी जाती है, जो निम्नलिखित है।
1.यह एक
आत्मनिष्ठ विधि है जिससे परिणामों में संगतता होने की सम्भावना में कमी आती है।
2. आवश्यक
प्रशिक्षण के अभाव में साक्षात्कारकर्ता को सही तरीके से व्यक्तित्व मूल्यांकन के
लिए तथ्य एकत्रित करने में कठिनाई का अनुभव करता है।
3.साक्षात्कार
प्रदाता अपने उत्तरों को देते समय साक्षात्कारकर्ता की जाति, पद, लिंग, आदि का ध्यान रखता
है, इस कारण उसके उत्तर स्वाभाविक न रहकर कृत्रिम एवं
साक्षात्कारकर्ता को प्रसन्न करने वाले बन जाते हैं।
4. जब अनेक
व्यक्तियों से सूचनाएं एकत्रित करनी हो या एक ही व्यक्ति के व्यक्तित्व के अनेक
पक्षों का मूल्यांकन करना हो तो इस प्रविधि को अपनाने में बहुत अधिक समय खर्च होता
है।
5.विभिन्न
माध्यम व अन्तक्रियाएँ भी साक्षात्कारकर्ता को प्रभावित करती हैं। सभी व्यक्तियों
पर अपने समाज के मान्यताओं, धारणाओं एवं विश्वासों का प्रभाव
रहता है और यदि साक्षात्कारकर्ता तथा साक्षात्कार प्रदाता की सामाजिक पृष्ठभूमि
में अन्तर हो तो इसके परिणामों की वैधता में कमी आती है।
6. साक्षात्कारकर्ता
द्वारा वार्तालाप को लिपिबद्ध करने के कारण व्यक्ति उत्तर देते समय अपने कथनों के
द्वारा प्रत्यक्ष समर्थन प्रकट नहीं करता। वह गोल-गोल उत्तरों के माध्यम से स्वयं
को एक सुरक्षित स्थिति में रखने की कोशिश करता है।
वार्तालाप में शामिल हों