विज्ञापन की अपील - Advertising Appeal
विज्ञापन की अपील - Advertising Appeal
विज्ञापन की अपील से तात्पर्य संदेश रचना में निहित मूल कथन से है। विज्ञापन की दुनिया में उपभोक्ता की सत्ता महत्वपूर्ण होती है। उसकी इच्छाओं को प्रभावित करने के लिए विज्ञापन संदेश के द्वारा उससे अपील की जाती है। अपील के जरिये उपभोक्ता की मनोवृत्तियों को प्रभावित कर स्वपक्ष में उसे अनुकूल मोड़ दिया जाता है। प्रत्येक विज्ञापन ही अपने आप में अपील होता है। वस्तुतः विज्ञापन एक ऐसी अभ्यर्थना अथवा अपील है जो किसी वस्तु के क्रय हेतु अथवा किसी सेवा विशेष हेतु अथवा जनसाधारण में विश्वसनीयता प्राप्त करने के लिए वस्तु के गुणों, उपयोगों, प्रकार्यों तथा लाभों का प्रचार करने हेतु अथवा अभिसूचित करने हेतु समूल्य की जाती है।" विज्ञापन की कॉपी में अंतर्निहित केंद्रीय प्रेरणा भाव या विचार उपभोक्ता को उत्पाद के प्रति प्रेरित करते हैं। उपभोक्ता द्वारा उत्पाद को खरीदने के पीछे उसकी आवश्यकता या उसकी इच्छा से जुड़े कई कारण हो सकते हैं। कई तरह की प्रेरणाएँ उत्पाद को खरीदने का कारण बनती हैं। विज्ञापन का कार्य वस्तुतः उपभोक्ता में विज्ञापित वस्तु को खरीदने की प्रेरणा जगाना है। यह कार्य विज्ञापन की कॉपी अपील करती है। कॉपी अपील में बड़ी शक्ति होती है। प्रभावी कॉपी अपील ही उत्पाद या वस्तु के प्रति उपभोक्ताओं की रुचि को जाग्रत कर सकती है, क्रय की इच्छा शक्ति जगा सकती है और सेवाओं या उत्पाद के प्रति उनमें एक सकारात्मक सोच पैदा कर सकती है।
मनोवैज्ञानिक आधार पर जो प्रेरणाएँ उपभोक्ता को उत्पाद खरीदने के लिए या किसी भाव अथवा विचार को अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं उसकी कई श्रेणियाँ हैं। कुछ प्रेरणाएँ जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ी हैं, कुछ मनोवैज्ञानिक रूप से व्यक्ति को मानसिक संतोष देती हैं जैसे आधुनिक वस्त्र, आभूषण, साज-सज्जा के आधुनिक उपकरण आदि। कुछ प्रेरणाएँ भावनात्मक अपील के अंतर्गत श्रेणीगत की जा सकती हैं, जैसे-गौरव, स्वाभिमान, सम्मान, प्रेम, वात्सल्य, मातृत्व, रोमांस आदि की अपील सुरक्षा अधिक लाभ, आकर्षक छूट, बचत आदि की अपील को तार्किक अपील के अंतर्गत रखा जा सकता है। इस अपील में उन कारणों को प्रमुखता से उभारा जाता है, जिनके कारण उपभोक्ता उत्पाद को खरीदने के लिए प्रेरित होता है। कॉपी अपील में कई बार उत्पाद के गुणों, मूल्यों, सेवा आदि को प्रमुखता दी जाती है, तो कभी उपभोक्ता के हित को उभारा जाता है। यह अपील कभी तार्किक होती है तो कभी भावनात्मक तार्किक अपील तक के द्वारा उपभाक्ता की विचार प्रक्रिया को प्रभावित करती है। भावनात्मक अपील के जरिये मनुष्य के अंतरमन की गहराईयों में छिपी हुई तमाम भावनाओं को जगाकर उपभोक्ता का मनोवैज्ञानिक ढंग दोहन करने की कोशिश की जाती है।
विज्ञापनों में अपील का प्रयोग केवल संदेश तैयार करने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि विज्ञापन के दृश्यों और चित्रों में भी अपील का प्रयोग किया जाने लगा है। दृश्य और चित्रों की यह अपील कभी सकारात्मक होती है तो कभी नकारात्मक सकारात्मक अपील के साथ-साथ नकारात्मक अपीलों का प्रयोग भी किया जाने लगा है। तरह-तरह की पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित विज्ञापनों तथा टी.वी. के परदे पर सिनेमाघरों में प्रदर्शित किए जाने वाले विज्ञापनों में अनावश्यक रूप से नग्न और अर्धनग्न चित्रों की भरमार रहती है। राष्ट्रीय बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने सौंदर्य प्रसाधनों, वस्त्र आदि के विज्ञापनों में स्त्री को सेक्स सिंबल के रूप में इस्तेमाल करके कामुक अपील के जरिए उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। व्यावसायिक संस्थानों से निकलने वाले समाचार पत्र पत्रिकाओं और टी.वी. के प्रायोजित कार्यक्रमों के दौरान प्रदर्शित किए जाने वाले विज्ञापनों में कामुक अपील प्रमुखता से देखी जा सकती हैं। विज्ञापनों में पर्सनैलिटी अपील का प्रयोग भी जमकर किया जाता है। विज्ञापक अपने उत्पाद का विज्ञापन किसी क्षेत्र में प्रसिद्ध प्रमुख हस्ती, स्टार, महत्वपूर्ण व्यक्ति आदि से कराता है। इस तरह के विज्ञापनों में उत्पाद, उत्पाद के गुण और विशिष्टताओं से अधिक प्रभाव विज्ञापन करने वाले महत्वपूर्ण व्यक्ति के व्यक्तित्व का होता है। क्रिकेट के खिलाड़ी बड़े फिल्म कलाकार आदि जब विज्ञापन करते हैं तो उनके व्यक्तित्व की अपील भी विज्ञापन की अपील बन जाती है।
विज्ञापन में उपभोक्ता व्यवहार के तीन पक्षों संज्ञानात्मक भावात्मक और क्रियात्मक को प्रभावित करने की शक्ति होती है। संज्ञानात्मक स्तर पर बौद्धिक, मानसिक और तार्किक स्थिति में वह संदेश के द्वारा उत्पाद पर विचार करता है। भावनात्मक स्तर पर संदेश को ग्रहण करता है। क्रियात्मक स्तर पर संदेश के अनुरूप कार्य करता है जनसंचार के संज्ञानात्मक एवं व्यावहारिक सिद्धांतों के अंतर्गत माना जाता है कि प्रायः लोगों की बोध या संज्ञान करने की प्रवृत्ति उनकी आवश्यकताओं, दृष्टि और अन्य मनोवैज्ञानिक कारकों से प्रभावित होती है। व्यक्ति किसी संदेश के उस भाग को आसानी से ग्रहण कर लेता है जो उसके दृढ़ दृष्टिकोण, विश्वास व्यवहार के अनुरूप होते हैं। वह संदेश के उस भाग की उपेक्षा कर देता है जो उसके दृढ़ दृष्टिकोण विश्वास और व्यवहार के प्रतिकूल होते हैं। इस तरह मनोविज्ञान ही मानव जीवन के संज्ञानात्मक और व्यावहारिक सिद्धांत का प्रथम आधार है। इन्हीं आधारों को कॉपी अपील के निर्माण में ग्रहण किया जाता है। इनका इस्तेमाल बहुत चतुरता के साथ किया जाता है। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से कॉपी लेखक पाठ्यसामग्री का इस्तेमाल करता है। पाठ्यसामग्री के निर्माण में तरह-तरह की क्रय प्रेरणाओं या अपीलों का प्रयोग कॉपी लेखक द्वारा किया जाता है। कुछ प्रमुख क्रय प्रेरणाएँ अथवा अपील इस प्रकार हैं
उपयोगिता अपील: उत्पाद की उपयोगिता और गुणवत्ता ही उपभोक्ता के क्रय निर्णय को प्रेरित करती है। उत्पाद के विज्ञापनों में उपयोगिता अपील का प्रमुखता से इस्तेमाल किया जाता है। उत्पाद के विज्ञापन की कॉपी अपील उत्पाद की उपयोगिता को इस तरह से संकेतित, चित्रित या वर्णित करती है, जिससे उपभोक्ता उसे खरीदने के लिए तत्पर हो उठे, उपयोगिता अपील में उत्पाद की अनूठी विशेषताओं को आधार बनाया जाता है।
सुरक्षात्मक अपीलः हर व्यक्ति अपने जीवन में अनेक स्तरों पर सुरक्षा पाना चाहता है। चोरी, दुर्घटना बीमारियों आदि से हर व्यक्ति सुरक्षित रहना चाहता है। वित्तीय विज्ञापनों तथा बीमा कंपनियों के विज्ञापन में प्रायः सुरक्षात्मक अपील का प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेदिक औषधियों, दवाइयों, साबुन, पेस्ट आदि के प्रयोग को लेकर भी लोग आशंकित रहते हैं। इन सबके विज्ञापनों में भी सुरक्षात्मक अपील की जाती है।
भौतिक सुख-सुविधा संबंधी अपीलः आज के उपभोक्तावादी दौर में विकसित और विकासशील देशों के बाजार भौतिक सुख-सुविधाओं के सामानों से अटे पड़े हैं। इस तरह के सामानों के विज्ञापनों में भौतिक सुख-सुविधा संबंधी अपील का प्रयोग किया जाता है। टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, कूलर, पंखे आदि के विज्ञापन इसी अपील के माध्यम से उपभोक्ताओं को आकर्षित करते हैं।
बचत और लाभ की अपील:- व्यावसायिक कंपनियां बिक्री बढ़ाने के इरादे से उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए कभी-कभी कीमतें घटाती हैं। कीमतें घटाने की धुआंधार प्रतियोगिता बाजार में देखी जा सकती है। उपभोक्ताओं की भीड़ को खींचने के लिए कंपनियों का दावा यह होता है कि वे सुविधाजनक दाम पर भी पहले जैसी ही गुणवत्ता दे रहे हैं। बचत और लाभ की अपील हर व्यक्ति को प्रभावित करती है। 'सेल' के मौसम में उत्पाद के दामों में कई-कई प्रतिशत तक की छूट की अपील उपभोक्ताओं को खूब प्रभावित करती हैं। ऐसे विज्ञापन समाचार पत्र पत्रिकाओं में भरे रहते हैं।
स्वास्थ्य अपीलः स्वास्थ्य की अपील हर व्यक्ति के लिए होती है। वह वहीं चीज खाना-पीना चाहता है जो उसके स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और लाभप्रद होती है। उन्हीं सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करना चाहता है, जिसके इस्तेमाल से उसके स्वास्थ्य को खतरा न हो इसलिए खाद्य पदार्थों, टॉनिकों, सौंदर्य प्रसाधनों, दवाइयों के विज्ञापनों में स्वास्थ्य अपील का प्रयोग किया जाता है।
भय और असुरक्षा की अपीलः व्यक्ति में भय और असुरक्षा की भावना जगाकर भी किसी उत्पाद के क्रय के लिए उसे प्रेरित किया जा सकता है। टी.वी. विज्ञापनों में बीमा कंपनियों तथा औषधियों के विज्ञापन में इस तरह की अपीलों का प्रयोग किया जाता है।
मातृत्व या वात्सल्य अपीलः महिला उपभोक्ताओं में मातृत्व की भावनाओं को जगाकर उनके वात्सल्य भाव को जगाकर उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता है। बेबी क्रीम, डायपर, दूध, बेबी सोप, आदि ऐसे अनेक विषय हैं जिनमें इस अपील का प्रयोग होता है।
सौंदर्य अपीलः सौंदर्य प्रसाधन, आभूषण और वस्त्रों परिधान आदि के विज्ञापनों में सौंदर्य अपील का प्रयोग किया जाता है। इस तरह की अपील में इस तरह का संदेश निहित रहता है कि यदि व्यक्ति को सुंदर दिखना हो तो उसे विज्ञापित उत्पाद को अवश्य खरीदना चाहिए।
तुलनात्मक अपीलः बाजार में उपलब्ध विभिन्न ब्रांडों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण उनके विज्ञापनों में प्रायः तुलनात्मक अपील के द्वारा अपने अपने ब्रांड की सर्वोत्कृष्टता का दावा किया जाता है। तुलनात्मक विज्ञापन में अपने प्रतिस्पर्धी ब्रांड के द्वारा घोषित गुणों को अपने विज्ञापन की संदेश रचना में शामिल कर लिया जाता है। जैसे यदि किसी कपड़े धोने के साबुन या बर्तन साफ करने के साबुन या पाउडर में नीबू का गुण मौजूद बताए जाएंगे तो दूसरा ब्रांड भी उन्हीं गुणों को अपने उत्पाद के विज्ञापन में प्रदर्शित कर देता है।
मौज मस्ती की अपीलः जरदा, पान मसाला, कोल्ड ड्रिंक तथा 'फन एंड फूड' के लिए खोले गए रेस्तरां, मनोरंजन के लिए बनाए गए स्थलों आदि के विज्ञापनों में अक्सर मौज मस्ती की अपील का प्रयोग किया जाता है। इस तरह की अपील उपभोक्ताओं को इन उत्पादों और स्थलों की ओर आकर्षित करती है।
गौरव अपील: गर्व और गौरव की भावनाओं को भी कॉपी अपील में प्रेरक तत्व बनाया जाता है। किसी विशिष्ट उपलब्धि या रिकार्ड आदि का उल्लेख करके उत्पाद की अपील बढ़ाने का यह आसान तरीका है।
विज्ञापन की अपील, विज्ञापन को प्रभावी और असरदार बनाने का महत्वपूर्ण साधन होती है। अच्छे कापी लेखक के लिए यह जरूरी है कि वो अपील को सही परिप्रेक्ष्य में इस्तेमाल करे अपील का सही इस्तेमाल न होने से कई बार विज्ञापन का प्रभाव कम हो जाता है या उल्टा भी हो जाता है। हर अच्छे विज्ञापन की सफलता के पीछे उसकी अपील का सर्वाधिक योगदान होता है।
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