प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कैरियर की संभावनाएं - Career Prospects in Print and Electronic Media
प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कैरियर की संभावनाएं - Career Prospects in Print and Electronic Media
हाल के वर्षों में पत्रकारिता ने जिस तीव्रता से नई तकनीक और नये बदलावों को आत्मसात किया है वह हैरान करने वाला है। इस क्रम में सबसे ज्यादा बदलाव स्वयं खबरें लेने-देने के व्यापार में और इस काम में लगे लोगों में इसकी तकनीक में, तथा इसके प्रभाव में हुआ है। समाज में पत्रकारिता के विभिन्न रूपों की पैठ और प्रभाव में भारी वृद्धि हुयी है। यह लोगों की राय बनाने, बदलने की वाहक भी बन गई है और उनके नजरिये तथा उनकी खबरों को सामने लाने का प्रभावी माध्यम भी बन गई है।
पेशे के तौर पर भी इसने समाज की प्रतिभाओं को आकर्षित किया है। नई पीढ़ी में प्रतिभावान और समाज के लिये कुछ करने की मंशा रखने वालों की फौज पत्रकारिता की तरफ मुड़ी है। आज पत्रकारिता से जुड़े जोखिम, काम की परेशानियाँ, जरा भी फुरसत का वक्त न होना जैसी दिक्कतें नए लोगों को इस पेशे में आने से रोकती नहीं बल्कि उन्हें चुनौती और एडवेंचर जैसी लगती हैं। शायद यही वजह है कि सभी विश्वविद्यालय और संस्थाएं अपने यहाँ पत्रकारिता का पाठ्यक्रम शुरू कर रही हैं। पत्रकारिता के अध्यापन की सामाग्री तथा किताबें तो कम पड़ रही हैं, लेकिन पत्रकारिता पढ़ने वाले लड़के - लड़कियों की कमी नहीं है। सूचना क्रान्ति के प्रभाव और लोगों में अखबार की रूचि बढ़ने के साथ-साथ अखबारों में विज्ञापनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि अखबारों की प्रसार संख्या लगातार बढ़ रही है और उसी के साथ अखबारों के स्थानीय संस्करण भी बढ़ते जा रहें है। आज उत्तराखण्ड के देहरादून तथा हल्दानी जैसे शहरों से भी तमाम बड़े दैनिकों के संस्करण प्रकाशित होने लगे हैं। इसने पत्रकारिता में रोजगार भी बढ़ाए हैं और पत्रकारों को दिल्ली-लखनऊ के बजाय अपने क्षेत्र में रह कर पत्रकारिता करने के अवसर भी सुलभ करा दिए हैं।
यह दौर पत्रकारों के लिए नई जिम्मेदारियों का दौर है पत्रकार अरविन्द मोहन अपनी पुस्तक "पत्रकार और पत्रकारिता प्रशिक्षण" में लिखते हैं कि "नये बदलावों, विस्तारों, तकनीकी ताकत ने पत्रकारों के ऊपर ज्यादा जिम्मेदारी डाल दी है। जब आप के मुंह से कही बात एक, दो चार लोगों की जगह दस बीस पचास करोड़ लोगों को सूचना दे, उनके कार्य- व्यापार और सोच को प्रभावित करती हो तब आपकी जिम्मेदारी निश्चित रूप से बहुत बढ़ जाती है।"
आज का दौर सूचना कान्ति का दौर है र है। इंटरनेट के जरिये कोई भी सूचना कितनी ही जगह पहुंचायी जा सकती है। इसलिए आज एक अच्छे पत्रकार को सूचना क्रान्ति के माध्यमों का भी अच्छा जानकार होना चाहिये। आज मीडिया में पत्रकारों अलावा सूचना तकनीक के विशेषज्ञों के लिए भी रोजगार के आकर्षक अखबारों की कमी नहीं रह गई आज स्थानीय टी वी चैनलों और दैनिक अखबारों को छोटी-छोटी जगहों पर भी नियमित अथवा अंशकालिक पत्रकारों की आवश्यकता रहती है। इंटरनेट व मोबाइल ने भी पत्रकारिता के नये रास्ते खोल दिये हैं। इससे युवाओं के लिए घर बैठे पत्रकार बनना भी आसान हो गया है। आज धीरे - धीरे प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अंग्रेजी का वर्चस्व टूट रहा है। कल तक जो पत्रकार या विशेषज्ञ हिन्दी बोलने मे अपमान महसूस करते थे, आज टीवी पर फटाफट हिन्दी बोलते हैं। हिन्दी पत्र - पत्रिकाओं की प्रसार संख्या, पहुंच, पूंजी सभी में अभूतपूर्व वृद्धि हुयी है। इस तरह अंग्रेजी के साथ ही हिन्दी भाषा के जानकार पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रूफ रीडिंग से लेकर खबरों के कुशल लेखन तक के क्षेत्र में कैरियर तलाश सकते हैं। एक फोटोग्राफर के लिए भी आज फोटोपत्रकार के रूप में कैरियर बनने के मौके पहले की तुलना में काफी बढ़ गए हैं।
आज उत्तराखण्ड से दर्जनों अखबार पत्र - पत्रिकाएं निकल रही हैं। इनमें राजनीतिक विषयों के साथ - साथ सामाजिक, सांस्कृतिक - साहित्यिक, पर्यावरण, खेल - कूद, व्यापार आदि की खबरों का विस्तार बढ़ा है। परन्तु प्रायः इन सभी पत्र - पत्रिकाओं की प्रसार संख्या कम है। इसका कारण पूंजी का अभाव, सचेत, जागरूक, खोजी एवं निडर पत्रकारों की कमी कुशल प्रबन्धन न होना, विज्ञापन न जुटा पाना, उन्नत तकनीक एवं सूचना क्रान्ति के माध्यमों का प्रयोग न करना, स्थानीयता को जगह कम देना, संचार तंत्र के कुशल प्रयोग का अभाव प्रचार की कमी आदि हो सकते हैं। आज की पीढ़ी का पत्रकार उक्त चीजों को ध्यान में रख किसी पत्र - पत्रिका से जुड़े या नया पत्र पत्रिका निकाले तो वह भी अपने कैरियर के साथ - साथ अनेक युवाओं का कैरियर संवार सकता है। इसी तरह इंटरनेट व मोबाइल पत्रकारिता में भी वह अपने लिए स्थान बना सकता है ।
यहाँ यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पत्रकारिता के सत्ता, पैसे तथा शक्ति से जुड़ जाने के कारण और कैरियर पर जरूरत से ज्यादा जोर देने से बहुत सारे नये पत्रकार जल्दी ही अवसान की ओर चले जाते हैं। दिन - रात विशेष खबरों को खोजने की प्रवृत्ति, सामान्य ड्यूटी न करना, विशिष्ट खबरों को गढ़ने का फरेब करना, प्रोन्नति के लिये दफ्तर के अन्दर जोड़ तोड़, चापलूसी से लेकर 5 - सत्ता के गलियारों तक अपनी पहुँच का इस्तेमाल करना इनका मुख्य काम होता है, लेकिन स्थितियां बदलते ही ऐसे लोग सड़क पर आ जाते हैं। लंबे पेशेवर कैरियर के हिसाब से इन सब चीजों को दरकिनार रखना चाहिए। युवा पत्रकार को पूरी लगन पूरी निष्ठा और पूरी ईमानदारी के साथ काम करना चाहिए, काम सीखना चाहिए। उसे खबर की तह में जाने की कोशिश करनी चाहिए और गलतियों से बचना चाहिए पत्रकार अरविन्द मोहन लिखते हैं - "पत्रकारों को किसी भी अन्य पेशे के लोगों की तुलना में ज्यादा संयमी और दूरदर्शी होना चाहिए, क्योंकि उनका काम ही अपने "गम" से ज्यादा जमाने के "गम" की चिंता करना है।"
इसलिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकार जितनी निडरता और ईमानदारी से अपना काम करता है उसकी साख और प्रतिष्ठा भी उतनी ही बढ़ती जाती है, कमाई तो साथ - साथ बढ़ती ही है। आज बहुत से मीडिया संस्थानों में पत्रकारों को आई ए एस अधिकारियों से भी दुगना वेतन मिल रहा है ।
प्रिंट मीडिया का पत्रकार अपने तथ्यों को देख सुनकर और प्रमाण रख कर कोई खबर लिखता है तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वालों को तथ्यों को कैमरे, ऑडियो - वीडियो के दायरे में लाना होता है। पर सभी तरह के पत्रकारों को अपनी खबरों के तथ्यों के सही होने पर सर्वाधिक ध्यान देना चाहिए। एक पत्रकार की नजर और खबर को सही समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचाना पत्रकार की दो महत्वपूर्ण विशेषताएं होती है। इन चीजों को ध्यान में रख कोई भी व्यक्ति रेडियो, टी वी, समाचार पत्र पत्रिकाओं, न्यूज एजेंसियों के लिए रिर्पोटिंग करके अपनी संवेदनशीलता, निडरता, खोजी प्रवृति आदि गुणों के आधार पर एक प्रतिष्ठित पत्रकार बन सकता है।
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