जनसंचार की अवधारणा - Concept of Mass Communication

जनसंचार की अवधारणा - Concept of Mass Communication


बीसवीं सदी के आरम्भिक समय को हम मास मीडिया का आरम्भिक काल कह सकते हैं। इस काल में संचार माध्यमों तथा संचार की तकनीक में व्यापक बदलाव आने शुरु हुए बीसवीं शताब्दी के दूसरे-तीसरे दशक में बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य में मीडिया के बड़ते हुए प्रभाव को देखते हुए मीडिया की शक्ति, सामाजिक प्रभाव और सामाजिकों को ज्ञान देने में उसकी भूमिका पर विचार करने की जरूरत महसूस होने लगी। पश्चिमी चिन्तक डीफ्लोर (Defleur) का कहना है कि सन् 1910 तक यू.एस.ए. में समाचार पत्रों की वितरण संख्या आश्चर्यजनक रूप से बढ़ी और कुछ ही समय में यूरोप तथा विश्व के अन्यान्य हिस्सों में भी यह वृद्धि होने लगी। प्रथम विश्वयुद्ध के समय सामान्य जन में मीडिया की बढ़ती शक्ति को महसूस किया जाने लगा। इसके उपरान्त सोवियत संघ तथा जर्मनी में मीडिया का उपयोग सत्ता पक्ष द्वारा अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए प्रचारक के रूप में होने लगा। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय समाचार और मनोरंजन के प्रचुर प्रयोग ने इसकी प्रचारक क्षमता को भली-भाँति स्थापित कर दिया और फिर जनप्रचार ने वैचारिक मतामत तय करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाना आरम्भ कर दिया। उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध और बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में बनते हुए नए समाज में पूँजीवाद के आगमन के साथ लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं का आविर्भाव हुआ। बाजार का विस्तार होने लगा, औद्योगीकरण और शहरीकरण होने लगा। पश्चिमी समाजशास्त्री स्पेन्सर, वेबर, दुर्खीम पार्क आदि के चिन्तन में ग्रामीण समाज के शहरीकरण और जनचेतना के स्वर उभर कर आने लगे। इस आधुनिक समाज में एक ऐसा व्यापारिक वर्ग उभरने लगा, जिसे अपने उत्पाद की अधिकाधिक खपत करने की जरूरत होने लगी और इसके लिए यातायात और संचार के तत्कालीन संसाधन अपर्याप्त होने लगे। राजनीतिक दलों को लोकतान्त्रिक व्यवस्था में अधिकाधिक लोगों के विचारों को अपने पक्ष में मोड़ने की जरूरत होने लगी लोगों को अपने विचार समाज के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए या राजसत्ता तक पहुँचाने के लिए संचार के साधनों की आवश्यकता होने लगी और इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संचार के मुद्रण माध्यमों से लेकर कम्प्यूटर तक तार से लेकर मोबाइल तक, रेडियो से लेकर टेलीविज़न तक अनेक संचार संसाधन अत्यधिक द्रुतगति से विकसित होने लगे।


सूचना प्रौद्योगिकी के इस विकास ने संचार के क्षेत्र में एक क्रान्ति उपस्थित कर दी। जनसंचार की अवधारणा को समझने के लिए संचार प्रौद्योगिकी को जानने की भी आवश्यकता है क्योंकि इस प्रौद्योगिकी के द्वारा ही जनसंचार सम्भव है।


इस प्रौद्योगिकी के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों परिणाम हमें दिखाई देते हैं। इसने एक ओर स्थानों की दूरी को कम करने में वैश्विक परिदृश्य को समझने में, ज्ञान-विज्ञान के विविध क्षेत्रों से परिचित होने में राजनीतिक परिस्थितियों को समझने में, सांस्कृतिक ऐक्य और आर्थिक नीतियों को समझने में जनमत के महत्व को समझने में, सामाजिक परिदृश्यों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई समाज की आशाओं को पंख दिये तो दूसरी ओर समाज के भय को भी प्रकट किया क्योंकि पोर्नोग्राफी जैसी विधा के प्रवेश के साथ संचार संसाधनों ने जन मन में हिंसा, क्रूरता, अश्लीलता, यौन अपराध आदि की दुष्प्रवृत्ति को भी बल दिया, जिसके कारण जनसंचार के दुष्परिणाम भी प्रकट हुए।