एन. जी. ओ. में खाता बनाना (Create NGO. Account)



एन. जी. ओ. में खाता  बनाना  (Create NGO. Account)

एक ट्रस्ट / एसोसिएशन को अपने वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड रखने के लिए खातों की उचित और नियमित पुस्तकें रखनी चाहिए। खाते डबल एंट्री सिस्टम से तैयार करने चाहिएं और नियमित रूप से एक ही लेखाकरण विधि को अपनाया जाना चाहिए, चाहे वह cash method हो या mercantile method।


कानूनी आवश्यकताएं: सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के अंतर्गत सोसाइटियों का अकाउंट व्यवस्थित रखना चाहिए और वार्षिक रिटर्न रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज के कार्यालय में भेजनी चाहिए। वित्तीय विवरणों के फार्म और उनकी विषय वस्तु विनिर्दिष्ट नहीं है। भारतीय ट्रस्ट अधिनियम के अधीन ट्रस्टियों को निश्चित ही ट्रस्ट की संपत्ति के साफ और सही अकाउंट रखने होते हैं। उन्हें सभी उचित समयों पर लाभविन्त व्यक्तियों के मांगने पर ट्रस्ट की संपत्ति की धनराशि और स्थिति के बारे में पूरी-पूरी और सही जानकारी देनी चाहिए। धर्मार्थ और धार्मिक ट्रस्ट अधिनियम के अधीन कोई भी व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक ट्रस्ट के मामले में ट्रस्ट के अकाउंट के ब्यौरे मांग सकता है। आयकर अधिनियम के अंतर्गत चैरिटेबल संगठनों को छूट प्राप्त करने के लिए उचित अकाउंट व्यवस्थित रखने चाहिए और उनकी लेखा परीक्षा भी करा लेनी चाहिए। 


लेखाकरण अवधि:  लेखाकरण अवधि 12 महीने की अवधि की होती है, जो सामान्यतः एक वित्तीय वर्ष (पहले वर्ष की 1 अप्रैल से अगले वर्ष की 31 मार्च तक) की होती है जिसके लिए खाते बनाये जाने चाहिए। कुछ अपवादिक मामलों में (जैसे कि जब किसी संस्था की स्थापना वर्ष के दौरान की गई हो तो स्थापना के पहले वर्ष के लिए खाते तैयार करने के लिए) लेखाकरण अवधि बदल सकती है (अर्थात् यह 12 महीने से कम या ज्यादा भी हो सकती है )


खातों के प्रकार मूल रूप से खाते तीन प्रकार के होते हैं वास्तविक (real), निजी (personal), और नामित (nominal)। वास्तविक खाते वस्तुओं से संबंधित होते हैं जैसे कि अचल परिसम्पत्तियां, माल, नगदी, बैंक आदि देनदारों और लेनदारों आदि (debtors and creditors) के खाते निजी खाते कहे जाते है। नामित खाते में आय, व्यय हानि और लाभ आते हैं


लेखाकरण के मूल सिद्धांत निजी खाते :-  जो लेन-देन व्यक्तियों व्यापारियों निकायों या अन्य संगठनों के साथ किये जाते हैं, उन्हें निजी खाते से संबंधित (transaction) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। निजी खातों के अंतर्गत कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के कुछ प्राप्त करता है या उसे देता है इस तरह के लेनदेन के लिए नियम यह हैं प्राप्तकर्ता के नाम डालो और देने वाले के नाम जमा करो।

उदाहरण के तौर पर, अगर A ने B को कुछ रकम दी है। तो, A की पुस्तकों में B के नाम रकम डाली जाएगी। क्योंकि B प्राप्तकर्ता है, और B की पुस्तकों में A के नाम रकम डाली जाएगी क्योंकि A देने वाला है।






वास्तविक खातेः - बाकी लेन-देन वास्तविक खातों में अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। इसमें वे सभी लेन-देन शामिल होंगे, जो व्यापार में पावतियों को चाहे वे सम्पत्तियों, वस्तुओं या सेवाओं से की हों और व्यापार की सभी बहिर्गामी अदायगियों को दर्शाते हैं। वास्तविक खातों में लेन-देन दर्ज करने का मूल सिद्धान्त यह है जो आया हो उसे नाम से दिखाओ और जो बाहर गया हो उसे जमा में दिखाओ उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यापारिक संस्थान कुछ सामान खरीदता है तो यह सामान को प्राप्त करना दर्शाता है, और सामान खरीदने के नाम में दिखाया जाना चाहिए। जबकि, बिक्री यह दर्शाती है कि कुछ वस्तुएं और अन्य सामग्री स्टॉक से बाहर गई हैं इसलिए बिक्री को व्यापार की पुस्तकें में जमा में दिखाया जाना चाहिए।


नामित खातें:-  व्यापार के जो लेन-देन खर्च करने या हानि से संबंधित हैं, या आय अर्जित करने या लाभ से संबंधित हैं उन्हें नामित खातों के वर्ग में रखा जाता है। नामित खातों में लेन-देन करने का मूल सिद्धांत यह है- सभी खर्चों और हानियों के नामों में डालों और सभी आय या लाभों को जमा में डालो ।


उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति अपने कर्मचारी एक महीने के वेतन की अदायगी के तौर पर 500 रुपये खर्च करता है तो वह रकम व्यय दर्शाती है और इसे व्यापार खातों के नाम में दिखाना चाहिए। इसी तरह कमीशन प्राप्त होना ब्याज पाना आय को दर्शाता है, इसलिए इसे खातों के जमा में दिखाना चाहिए।


खाता :- खाता किसी मद या व्यक्ति या किसी आय का खर्च से संबंधित लेन-देन का एक औपचारिक प्रस्तुतीकरण है। खाता, आमतौर पर फार्म में तैयार किया जाता है। जिसमें बाई तरफ के भाग के नाम भाग और दाएं तरफ के भाग को जमा भाग कहा जाता है। उपयुक्त खाता शीर्षक का चयन करना एक ट्रस्ट कई मदों में और कई व्यक्तियों के साथ कार्य व्यापार करता है। इसको कई तरह के लेनदेन करने पड़ते हैं और कई तरह के खर्च करने पड़ते हैं। हालांकि हर एक लेन-देन का दर्ज करना पड़ता है, परन्तु महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे उपयुक्त खाता शीर्षक के अंतर्गत दर्ज किया जाए। चूंकि ऐसा संभव और व्यवहार्य नहीं है कि हर एक लेन-देन के लिए एक अलग खाता खोला जाए, इसलिए कुछ चुने गए खाते खोले जाएं और हर एक खाते से संबंधित लेन-देन को तत्संबंधित खाते में दर्ज कर दिया जाए। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति दो बिजली के बल्ब, एक साबुन, चार बाल प्वाइंट पेन और एक राइटिंग पैड खरीदता है तो हर एक मद के लिए एक अलग खाता खोलना उपयुक्त नहीं होगा। इसके बदले एक "रख रखाव संबंधी खर्च खाता" खोला जाता है और उसमें बल्ब और साबुन के खर्च नाम कर दिये जाते हैं। इसी तरह बाल पांइट पैन और राइटिंग पैड दोनों को "प्रिंटिंग और स्टेशनरी खर्च खाते में डाला जाता है। अगले दिन यदि वह कुछ दस्तावेजों की फोटो कापियां करवाता है तो इस खर्च को भी प्रिंटिंग और स्टेशनरी खर्च खाते में नाम कर दिया जाए।





विभिन्न छोटे-छोटे खर्चों के लिए आमतौर पर "विविध खर्च खाता" या “ सामान्य खर्च खाता" नाम का एक अलग खाता खोल दिया जाता है। इस खाते में सिर्फ वही खर्च दर्ज किए जाएं जो कि बहुत छोटे-छोटे हों या कभी-कभी किए जाते हों, और वे मौजूदा किसी भी खाते के अंतर्गत वर्गीकृत न किए गए हों। उपयुक्त खाता शीर्षकों के अंतर्गत लेन-देन का वर्गीकरण सिर्फ वास्तविक और नामित खातों में संभव है। निजी खातों के मामले में हर एक व्यक्ति या पार्टी का, जिसके साथ कार्य व्यापार किया जाता है, एक अलग खाता होना चाहिए।