परियोजना की विभिन्न अवस्थाओं का विस्तृत विवरण एवं चक्र Detailed Description and Cycle of Various Stages of the Project
परियोजना की विभिन्न अवस्थाओं का विस्तृत विवरण एवं चक्र Detailed Description and Cycle of Various Stages of the Project
परियोजना की विभिन्न अवस्थाओं का विस्तृत विवरण निम्न है :
प्रथम अवस्था:- व्यवहार्यता
यह अवस्था किसी परियोजना का महत्वपूर्ण घटक होती है। इसमें सबसे पहले आपूर्ति आवश्यकताओं की पहचान की जाती है। इसके पश्चात इन आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प्रारूप तैयार किया जाता है और परियोजना का निर्माण किया जाता है । प्रारूप तैयार करते समय उपलब्ध अवसरों एवं पर्यावरण के सम्बन्ध में प्रारंभिक जानकारी एकत्र की जाती है । इसके बाद यह आकलन किया जाता है कि परियोजना के प्रारूप को स्वीकार किया जाए या नहीं। आंकलन निम्न को ध्यान में रखकर किया जाता है :
1) आवश्यकता की पहचान
2) विकल्पों की पहचान
3) परियोजना विचार के बारे में प्राथमिक व्यवहार्यता की स्थापना
4) विकल्पों का मूल्यांकन
5) लागत संबंधी निर्णय
ii) परियोजना प्रारूप :- परियोजना की लागत को विस्तृत रूप से आंकलित करना चाहिए । परियोजना के क्रियान्वयन में समयावधि का भी आंकलन जरूरी है । परियोजना के प्रारूप अवस्था की अन्तिम परिणति विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) के रूप में होती है । इस डी.पी.आर. का पुर्नमूल्यांकन वित्तिय संस्था द्वारा किया जाता है।
iii) कार्यान्वयन अवस्था :- इस अवस्था में डी.पी.आर. में उल्लिखित विचारों में मूर्त रूप दिया जाता है। इस अवस्था में गतिविधियों की तीव्रता चरम पर होती है। अतः यह अवस्था किसी भी परियोजना का महत्वपूर्ण अंश है। इसलिए जरूरी कि विभिन्न गतिविधियों पर सतत् निगरानी एवं नियंत्रण रखा जाए। साथ ही समय रहते यदि आवश्यक हो संशोधित क्रियाएँ एवं यदि इस दौरान कोई दुविधा हो तो उन्हें भी दूर किया जाए।
iv) समापन :- इस अवस्था में उत्पन्न उपलब्ध सुविधाओं का उपयोग किया जाता है। साथ ही साथ उन व्यक्तियों की पहचान की जाती है जो समस्त कार्यकलापों, रखरखाव को सुनिश्चित कर सकें । इसके लिए उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण भी दिया जाता है। अंत में नयी तैयार सुविधाओं को संचालन हेतु प्रशिक्षित लोगों को सौंप दिया जाता है । साथ ही परियोजना में लगे लोगों को हटा लेते हैं।
परियोजना चक्र :
परियोजना को संकल्पना से परिचालन की स्थिति तक पहुंचाने में विभिन्न अवस्थाओं से होकर गुजरना पड़ता है। ये अवस्थाएं परियोजना का जीवन चक्र बनाती हैं इस चक्र की शुरुआत परियोजना के विचार से होती है। जो कि संबंधित भाग ग्रामसभा, लक्ष्य समूह, विकास कार्यों में लगी स्वैच्छिक संगठन, तकनीकी अनुसंधान समूह या केन्द्रीय योजना एजेंसी के माध्यम से आता है परियोजना का विचार आने पर इसकी रूपरेखा तैयार करना इस चक्र का अगला चरण होता है। इसके लिए ध्यान रखने योग्य बातें निम्न हैं:
परियोजना की उपयोगिता के आधार पर इसका विश्लेषण स्थानीय कारकों भौतिक, सामाजिक, सांस्कृति का आंकलन रूपरेखा तैयार हो जाने के तदुपरान्त यदि परियोजना स्वीकार करने योग्य पाई जाती है तो इसे कार्यान्वयन के लिए संस्तुति प्रदान कर दी जाती है। परियोजना के कार्यान्वयन के अन्त में परिणामों का मूल्यांकन भी आवश्यक है जिससे इसके उद्देश्यों की पूर्ति तक संभव हुई है का आंकलन सम्भव हो सके।

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