उत्पादन और फसल के बाद प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास - Development of Commercial Horticulture through Production and Post-Harvest Management
उत्पादन और फसल के बाद प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास - Development of Commercial Horticulture through Production and Post-Harvest Management
उत्पादन और फसल के बाद प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकासः राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से उन परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी जो बागवानी उत्पादों का उच्चस्तरीय वाणिज्यिक उत्पादन करेंगे। इसमें हाई डेंसिटी प्लान्टेशन, हाईटेक कल्टीवेशन, वर्षा आधारित उत्पादन, फलों, सब्जियों आदि के बेहतर बीज के लिये नर्सरी प्रबंधन, संकर बीजों का उत्पादन, आर्गेनिक फार्मिंग, बागवानी में प्लास्टिक का उपयोग, बायो तकनीक शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न संबंधित क्षेत्रों में बेहतर वैज्ञानिक प्रगति वाली परियोजनाएं भी वित्तीय सहायता की पात्र होंगी। इसके साथ-साथ वे परियोजनायें भी बोर्ड की पूंजीगत निर्देश राज सहायता की पात्र होंगी जो उत्पादन के ढांचे, फसलों की देखभाल करने, उनके परिष्करण एवं विपणन के विकास तथा बागवानी से सम्बन्धित उद्योगों के विकास में लगी हुई हों।
शीत भंडारों/बागवानी उत्पादों के लिये भंडारों के निर्माण/विस्तार /आधुनिकीकरण के लिये पूंजीगत निवेश राजसहायता :- शीत भंडारों में नियंत्रित वातावरण और संशोधित वातावरण भंडार भी शामिल हैं जो प्याज आदि के लिये मदर-स्टोरेज के रूप में काम करते हैं।
बागवानी को बढ़ावा देने के लिए टेक्नोलॉजी का विकास और इसका अन्तरण इस योजना में निम्नलिखित कार्यों के लिये सहायता दी जाती है :-
1. नई टेक्नोलॉजी (संकल्पना) को लागू करना।
2. प्रगतिशील कृषकों के दौरे
3. बढ़ावा देने वाली और विस्तार संबंधी गतिविधियां
4. भातर / विदेश से विशेषज्ञों की संवायें
5. टेक्नोलॉजी की जानकारी
6. सेमिनार / प्रदर्शनियों में भाग लेना
7. उद्यान पंडित प्रतियोगिताएं
8. प्रचार और फिल्में
9. विदेशों में अध्ययन दौरे
10. टेक्नोलॉजी का प्रभावी अन्तरण के लिये वैज्ञानिकों को मानदेय
बागवानी फसलों के लिये सूचना सेवा : इस समय सभी 33 बाजार सूचना केन्द्र अपने अपने बाजारों में बागवानी उत्पाद पहुंचने और उनकी कीमतों के बारे में सूचना इकट्ठा कर रहे हैं और ये केन्द्र बोर्ड के गुड़गांव मुख्यालय को यह सूचना भेज रहे हैं। ई-मेल और फैक्स से आने वाली सूचनायें भी एकत्रित की जाती हैं और इसका विश्लेषण किया जाता है। इस समय सभी वाणिज्यिक और मौसमी फलों एवं सब्जियों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। इन सूचनाओं के आधार पर बोर्ड आगे आने वाले वर्ष के लिये फसल उत्पादन की भविष्यवाणी करता है।
बागवानी प्रोत्साहन सेवा अध्ययन / सर्वेक्षण
1. बागवानी के विकास के लिये तकनीकी व आर्थिक सम्भाव्यता अध्ययन
2. बाजारों का अध्ययन |
3. परियोजना बनाना, उसको कार्यान्वित करना और उसका मूल्यांकन करना आदि।
4. राष्ट्रीय बोर्ड द्वारा अध्ययन
सहायता का स्वरूप : इन अध्ययनों के लिये राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड लागत की 100% सहायता करता है। परंपरागत उद्योगों के पुनरुद्धार के लिये धनराशि संबंधी योजना के उद्देश्य : वर्ष 2005-06 से शुरुआत करके 5 वर्ष की अवधि में देश के विभिन्न भागों में परंपरागत उद्योगों को सामूहिक विकसित करना परंपरागत उद्योगों को अधिकाधिक प्रतिस्पर्धा जनक बनाना ताकि उनके उत्पाद बाजार में लाभप्रद मूलय में अधिक बिक सकें तथा इनमें काम करने वाले कारीगरों और उद्यमियों को निरंतर रोजगार प्राप्त हो सके।
स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी से उद्योग समूह की स्थानीय प्रशासन प्रणाली को मजबूत बनाना ताकि वे स्वयं ही विकास की पहल कर सकें। नवीन और परंपरागत कार्यकुशलता, बेहतर तकनोलॉजी, बेहतरीन प्रक्रिया, बाजार की सूचना और सरकारी, गैर सरकारी साझेदारी के नये तरीके विकसित करना ताकि इनका लाभ प्राप्त किया जा सके।
इस योजना से कारीगरों, कामगारों, मशीन बनाने वालों, कच्चा माल उपलब्ध कराने वालों, उद्यमियों, परम्परागत उद्योगों में लगे संस्थागत और निजी व्यापार विकास सेवा उपलब्ध कराने वालों और चमड़ा तथा मिट्टी के बर्तन बनाने के उद्योग सहित खादी, जूट और ग्राम उद्योगों के चुने हुए समूह में काम करने वालों आदि को लाभ प्राप्त होगा। इस योजना में उन समूहों का चयन किया जाएगा जहां 500 लाभार्थी परिवार रहते हैं और जिनके सदस्य कारीगर छोटे-छोटे उद्यमी, कच्चे माल की सप्लाई
करने वाले व्यापारी सेवा उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति आदि हों।
नोडल एजेंसी: इस योजना के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग और जूट बोर्ड को नोडल एजेन्सी के रूप में नामित किया जायेगा। फिर ये एजेन्सियां कार्यान्वयन एजेंसियों ( IA ) का चयन करेंगी। नोडल एजेंसी चुनी गई कार्यान्वयन एजेंसियों को धनराशि वितरण के लिये और योजना की निगरानी के लिए जिम्मेदारी दें।

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